Air India CEO Campbell Wilson Resigns: भारतीय विमानन क्षेत्र की दिग्गज कंपनी एयर इंडिया (Air India) से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। एयरलाइन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और प्रबंध निदेशक कैंपबेल विल्सन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। कैंपबेल विल्सन ने सितंबर 2022 में टाटा समूह के स्वामित्व वाली इस एयरलाइन की कमान संभाली थी और उनका कार्यकाल 2027 तक था, लेकिन उन्होंने समय से पहले ही पद छोड़ने का निर्णय लिया है। पिछले हफ्ते हुई बोर्ड मीटिंग में उनके इस्तीफे को स्वीकार कर लिया गया है, हालांकि वह उत्तराधिकारी मिलने तक पद पर बने रहेंगे।
कैंपबेल विल्सन का प्रस्थान
बताते चले कि, विल्सन के अचानक इस्तीफे के बाद अब कंपनी नए सीईओ और प्रबंध निदेशक (Managing Director) की तलाश में जुट गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, जिम्मेदारी सौंपने (Handover) की प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए विल्सन इस साल सितंबर तक कामकाज देखते रहेंगे। कंपनी एक ऐसे अनुभवी नेतृत्वकर्ता की तलाश कर रही है जो एयरलाइन के कायाकल्प (Transformation) को अगले चरण पर ले जा सके। एयर इंडिया के भीतर चल रही इस उथल-पुथल ने विमानन जगत में कई सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि विल्सन के नेतृत्व में एयरलाइन ने विस्तार की कई बड़ी योजनाएं बनाई थीं।
वित्तीय संकट और भारी घाटा
आपकी जानकारी के लिए बता दे कि, विल्सन के जाने के पीछे एयरलाइन के सामने खड़ी वित्तीय चुनौतियां (Financial Challenges) एक बड़ी वजह मानी जा रही है। एयर इंडिया इस समय बढ़ते खर्च और भारी आर्थिक घाटे के दौर से गुजर रही है। अनुमान लगाया जा रहा है कि इस साल एयरलाइन को ₹20,000 करोड़ का भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसके अतिरिक्त, पिछले साल अहमदाबाद में हुए विमान हादसे की जांच रिपोर्ट का दबाव भी प्रबंधन पर बना हुआ है। इन विषम परिस्थितियों ने कंपनी की वित्तीय स्थिरता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं, जिससे नए नेतृत्व के लिए राह आसान नहीं होगी।
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर युद्ध का असर
कामकाज के स्तर पर देखें तो पश्चिम एशिया (Middle East) में जारी तनाव ने एयर इंडिया की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के गणित को बिगाड़ दिया है। युद्ध के कारण हवाई मार्ग प्रतिबंधित होने से विमानों को लंबे और वैकल्पिक रास्तों से उड़ान भरनी पड़ रही है। इससे न केवल समय की बर्बादी हो रही है, बल्कि बीच में ईंधन भरवाने (Refueling) के लिए रुकने के कारण ऑपरेशनल कॉस्ट में भारी बढ़ोतरी हुई है। कंपनी अब एक ऐसे ‘क्राइसिस मैनेजर’ की तलाश में है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एयरलाइन की साख को पुनः स्थापित कर सके और घाटे के इस चक्र को तोड़ सके।










