बाढ़ के बाद अब कीटों का कहर, बस्तर में फसलें खतरे में

जगदलपुर. बस्तर संभाग के किसानों के लिए इस बार खरीफ सीजन लगातार मुश्किलों का दौर बनता जा रहा है. खेतों में फसल तैयार होने से पहले ही कुदरत ने ऐसा चक्र चलाया कि किसानों की उम्मीदें कमजोर पड़ने लगी हैं. शुरुआत में अतिवृष्टि और बाढ़ ने हजारों एकड़ खेतों को प्रभावित किया. लंबे समय तक पानी में डूबी फसल कहीं सड़ गई तो कहीं पौधों की जड़ें कमजोर पड़ गईं. जिन किसानों को बची हुई फसल से कुछ राहत की उम्मीद थी, उनके सामने अब कीट प्रकोप ने नई चुनौती खड़ी कर दी है. कई इलाकों में धान की बालियां

Wrriten By :

Editor

Published On :

नवम्बर 1, 2026

Advertisements
728x90-Pension-Mission-Shakti-Digital

जगदलपुर.

बस्तर संभाग के किसानों के लिए इस बार खरीफ सीजन लगातार मुश्किलों का दौर बनता जा रहा है. खेतों में फसल तैयार होने से पहले ही कुदरत ने ऐसा चक्र चलाया कि किसानों की उम्मीदें कमजोर पड़ने लगी हैं. शुरुआत में अतिवृष्टि और बाढ़ ने हजारों एकड़ खेतों को प्रभावित किया.

728x90-Pension-Mission-Shakti-Digital

लंबे समय तक पानी में डूबी फसल कहीं सड़ गई तो कहीं पौधों की जड़ें कमजोर पड़ गईं. जिन किसानों को बची हुई फसल से कुछ राहत की उम्मीद थी, उनके सामने अब कीट प्रकोप ने नई चुनौती खड़ी कर दी है. कई इलाकों में धान की बालियां कटकर गिर रही हैं और दाने भी नुकसान झेल रहे हैं. कहीं बालियां निकलने के बाद दाने नहीं भर रहे, तो कहीं भूरा माहू और तनाछेदक जैसे कीट फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं. इसका असर सीधे उत्पादन और धान की गुणवत्ता पर पड़ने की आशंका है.

किसानों के सामने अब खाद, बीज, कीटनाशक, मजदूरी और खेती की तैयारी में लगी लागत निकालने का संकट है. ऊपर से कटी हुई फसल को खेतों से सुरक्षित निकालना भी आसान नहीं है. ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल फसल नुकसान के वास्तविक आकलन और किसानों को मिलने वाली राहत का है. यदि समय रहते उचित मुआवजा नहीं मिला तो इस साल खेती का घाटा ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी भारी पड़ सकता है.

2