Afghanistan Pakistan War : दक्षिण एशिया के अशांत क्षेत्र से एक बड़ी सैन्य हलचल की खबर सामने आ रही है। अफगानिस्तान की सेना ने पाकिस्तान के साथ लगी विवादित सीमा, ‘डूरंड लाइन’ को पार करते हुए खोस्त-खुर्रम बॉर्डर के पास स्थित पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर भीषण हमला बोल दिया है। रणनीतिक विशेषज्ञों द्वारा इस अचानक की गई कार्रवाई को एक ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ के तौर पर देखा जा रहा है। इस हमले ने न केवल सीमा पर तनाव को चरम पर पहुँचा दिया है, बल्कि दोनों पड़ोसी मुल्कों के बीच युद्ध जैसी स्थिति पैदा कर दी है। अफगान सैनिकों ने साहस दिखाते हुए सीमा लांघी और पाकिस्तानी सेना के महत्वपूर्ण सामरिक केंद्रों को निशाना बनाया।
सैन्य ठिकानों और वाहनों को किया आग के हवाले: भारी नुकसान की खबर
हमले की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अफगान सेना ने खुर्रम इलाके में स्थित पाकिस्तानी सेना के एक मुख्य अड्डे और वहां खड़ी सैन्य गाड़ियों को पूरी तरह आग के हवाले कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों और सूत्रों के अनुसार, इस हमले में पाकिस्तान के कई सैन्य ढांचे जमींदोज हो गए हैं। अफगान बलों ने न केवल चौकियों को ध्वस्त किया, बल्कि पाकिस्तानी रसद और परिवहन व्यवस्था को भी भारी चोट पहुंचाई है। आगजनी और विस्फोटों की आवाज़ें कई किलोमीटर दूर तक सुनी गईं, जिससे सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले नागरिकों के बीच दहशत का माहौल व्याप्त है।
टैंकों और तोपखानों से गोलाबारी: हताहत हुए कई पाकिस्तानी सैनिक
सीमा पर रात भर भारी गोलाबारी का सिलसिला जारी रहा। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, अफगान सेना ने आधुनिक आर्टिलरी (तोपखाने) और टैंकों का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तानी ठिकानों पर लगातार गोले बरसाए। रात करीब साढ़े 12 बजे तक की रिपोर्ट के अनुसार, इस जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान के कम से कम 3 सैनिकों की मौत हो गई है, जबकि 12 अन्य गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। घायलों को नजदीकी सैन्य अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जिनमें से कुछ की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। अफगानिस्तान की ओर से टैंकों के मोर्चे पर आने से यह स्पष्ट हो गया है कि यह केवल एक छोटी झड़प नहीं, बल्कि एक सुनियोजित सैन्य अभियान है।
तनाव की पृष्ठभूमि: पाकिस्तान के हवाई हमलों का अफगानिस्तान ने दिया जवाब
इस ताजा संघर्ष की जड़ें पिछले कुछ महीनों से जारी तनाव में छिपी हैं। इससे पहले, 3 मार्च को अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर कुनार प्रांत के असदाबाद में रिहायशी इलाकों पर अंधाधुंध गोलाबारी का आरोप लगाया था। उस हमले में एक मासूम की जान चली गई थी और 16 लोग घायल हुए थे, जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल थे। विवाद की शुरुआत फरवरी में हुई थी जब पाकिस्तान ने अफगान सीमा के भीतर कथित तौर पर हवाई हमले किए थे। अफगानिस्तान ने तभी चेतावनी दी थी कि वह अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाएगा। वर्तमान ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ को उसी पाकिस्तानी उकसावे का करारा जवाब माना जा रहा है।
टीटीपी और पनाहगाहों का विवाद: बिगड़ते द्विपक्षीय संबंधों का मुख्य कारण
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच रिश्तों में आई इस कड़वाहट का सबसे बड़ा कारण ‘तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान’ (TTP) है। पाकिस्तान का निरंतर यह आरोप रहा है कि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार टीटीपी के आतंकियों को अपने यहां सुरक्षित पनाहगाह मुहैया करा रही है, जो पाकिस्तान में घुसकर आतंकी गतिविधियों को अंजाम देते हैं। दूसरी ओर, अफगान तालिबान इन आरोपों को सिरे से खारिज करता रहा है। उनका तर्क है कि टीटीपी पाकिस्तान की अपनी आंतरिक समस्या है और पाकिस्तान को अपनी सुरक्षा विफलताओं का ठीकरा अफगानिस्तान पर नहीं फोड़ना चाहिए। आरोपों के इस दौर ने अब बंदूकों और टैंकों की भाषा ले ली है, जिससे क्षेत्रीय शांति खतरे में पड़ गई है।










