नर्मदा नदी के पास बन रही कॉलोनी पर प्रशासन की सख्ती, जबलपुर में बुलडोजर कार्रवाई

 जबलपुर  जबलपुर जिले में तेजी से अवैध कॉलोनी और फार्म लैंड विकसित हो रहे हैं, जिन पर एक बार फिर कार्रवाई शुरू हो गई है। जिला प्रशासन ने तहसील जबलपुर अंतर्गत आने वाली ग्राम समद पिपरिया में नर्मदा नदी के तट से महज तीन सौ मीटर के दायरे के भीतर बन रही अवैध कॉलोनी और फार्म के खिलाफ कार्रवाई की है। पर्ल एवेन्यू फार्म के नाम से बन रहे फार्म लैंड में नर्मदा संरक्षण के नियमों की अनदेखी कर निर्माण कार्य किया जा रहा था। शिकायत के बाद जिला प्रशासनिक ने इसकी जांच की, जिसमें पाया कि बिल्डर द्वारा नर्मदा

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Published On :

जनवरी 28, 2026

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 जबलपुर
 जबलपुर जिले में तेजी से अवैध कॉलोनी और फार्म लैंड विकसित हो रहे हैं, जिन पर एक बार फिर कार्रवाई शुरू हो गई है। जिला प्रशासन ने तहसील जबलपुर अंतर्गत आने वाली ग्राम समद पिपरिया में नर्मदा नदी के तट से महज तीन सौ मीटर के दायरे के भीतर बन रही अवैध कॉलोनी और फार्म के खिलाफ कार्रवाई की है।

पर्ल एवेन्यू फार्म के नाम से बन रहे फार्म लैंड में नर्मदा संरक्षण के नियमों की अनदेखी कर निर्माण कार्य किया जा रहा था। शिकायत के बाद जिला प्रशासनिक ने इसकी जांच की, जिसमें पाया कि बिल्डर द्वारा नर्मदा नदी के किनारे फार्म लैंड का विकास किया गया। इतना ही नहीं निजी घाट भी बनाया गया था। यहां पर न केवल छोटे-छोटे भूखंड काटे गए, बल्कि बिना किसी सक्षम अनुमति के आंतरिक सड़कें, रास्ते तथा एक पक्का मकान भी निर्मित कर दिया गया।

पर्यावरण संतुलन को पहुंचता है नुकसान

जबलपुर तहसील के तहसीलदार ने अवैध कॉलोनी ग्राम समद पिपरिया स्थित खसरा नंबर 26, 27, 28/1, 28/2, 30/1, 30/2, 31 सहित अन्य भूमि पर विकसित की जा रही थी। वहीं नदी के तट के 300 मीटर के प्रतिबंधित क्षेत्र में स्थित प्राकृतिक टीलों को तोड़कर भूमि को समतल किया गया, जिससे नदी के प्राकृतिक प्रवाह और पर्यावरणीय संतुलन को गंभीर क्षति पहुंची है।

अवैध कॉलोनी में नर्मदा नदी के किनारे निजी घाट, रेलिंग, चबूतरा तथा अन्य संरचनाएं भी बनाई गई थीं। ये सभी निर्माण अवैध थे। न तो कॉलोनी सेल से इसकी स्वीकृति ली गई और न ही प्रशासन से। इस पर जिला प्रशासन ने इसे नर्मदा संरक्षण अधिनियम और पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन मानते हुए अवैध निर्माण तोड़ दिए।
जैव विविधता को गंभीर खतरा

तहसीलदार रविंद्र पटेल ने बताया कि नर्मदा नदी के 300 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार का निर्माण प्रतिबंधित है, क्योंकि इससे नदी के इकोसिस्टम पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। टीलों को तोड़ना, भूमि समतलीकरण और घाटों का निर्माण न केवल प्राकृतिक जलधाराओं को प्रभावित करता है, बल्कि बाढ़, कटाव और जैव विविधता के लिए भी गंभीर खतरा उत्पन्न करता है।

कार्रवाई के दौरान अवैध निर्माणों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई। वहीं संबंधित भूमि पर आगे किसी भी प्रकार का निर्माण न किए जाने के निर्देश दिए गए। साथ ही, कॉलोनी विकसित करने वालों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

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