Adhir Ranjan Chowdhury Attacks Mamata Banerjee: कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर मतदाता सूची में हेरफेर करने का सनसनीखेज आरोप लगाया। उन्होंने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को ‘वोट चोरी का हथियार’ बताया। उनके अनुसार, बंगाल में लगभग 58.2 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जो चुनावी निष्पक्षता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि बूथ लेवल ऑफिसर (BLO), जिनमें से अधिकांश सरकारी कर्मचारी हैं, सत्ता पक्ष के दबाव में काम कर रहे हैं।
Congress 140th Foundation Day: मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी ने पार्टी की विचारधारा पर जोर दिया
‘डराओ और मसीहा बनो’ की रणनीति का पर्दाफाश
बताते चले कि, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी पर सीधा प्रहार करते हुए अधीर चौधरी ने कहा कि टीएमसी राजनीतिक ध्रुवीकरण और मतदाताओं को भयभीत करने की नीति अपना रही है। उन्होंने दावा किया कि पहले लोगों को डराया जाता है और फिर मदद का हाथ बढ़ाकर ‘मसीहा’ बनने का नाटक किया जाता है। चौधरी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ममता बनर्जी बंगाल की जनता के लिए सुरक्षा कवच नहीं, बल्कि एक बड़ी चुनौती बन गई हैं।
चुनावी हिंसा और लोकतंत्र की हत्या का दावा
आपको बता दे कि, अधीर रंजन चौधरी ने बंगाल के पुराने चुनावी हिंसक इतिहास का जिक्र करते हुए टीएमसी को घेरा। उन्होंने 2021 के पंचायत चुनावों में हुई 65 हत्याओं और नामांकन रद्दीकरण की घटनाओं को याद दिलाया। चौधरी का आरोप है कि विधानसभा चुनाव 2026 में भी विपक्षी उम्मीदवारों को रोकने के लिए वही डराने-धमकाने वाला पैटर्न दोहराया जा रहा है, ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित किया जा सके।
PM मोदी से मुलाकात और राजनीतिक गठबंधन पर सस्पेंस
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अधीर रंजन चौधरी की भेंट ने बंगाल के राजनीतिक गलियारों में अटकलों को तेज कर दिया है। हालांकि चौधरी ने इसे औपचारिक मुलाकात बताया है, लेकिन टीएमसी पर उनके कड़े रुख ने ‘इंडिया गठबंधन’ की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक तरफ ममता बनर्जी अकेले चुनाव लड़ने का संकेत दे चुकी हैं, वहीं चौधरी के तेवरों ने कांग्रेस और टीएमसी के बीच की खाई को और चौड़ा कर दिया है।
बंगाल में कांग्रेस का भविष्य और चुनावी समीकरण
2021 के चुनावों में मात्र 3 फीसदी वोट शेयर हासिल करने वाली कांग्रेस के लिए यह चुनाव अस्तित्व की लड़ाई है। चौधरी के इन तीखे हमलों को कांग्रेस की आक्रामक चुनावी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। भाजपा नेता प्रदीप भंडारी द्वारा चौधरी के बयानों का समर्थन करने से यह मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। अब सवाल यह है कि क्या चौधरी का यह रुख बंगाल में कांग्रेस को पुनर्जीवित कर पाएगा या यह केवल विपक्षी खेमे में बिखराव का कारण बनेगा।










