दाखिल-खारिज और रजिस्ट्री घोटालों पर कार्रवाई, सरकार ने उठाया बड़ा कदम

पटना  बिहार में जमीन से जुड़े फर्जीवाड़े, दाखिल-खारिज में गड़बड़ी और अंचल कार्यालयों में फैले भ्रष्टाचार पर अब सरकार सख्त हो गई है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में पारदर्शिता लाने के लिए बिहार सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने पहली बार आर्थिक अपराध इकाई (EOU) के अधीन एक विशेष सेल का गठन किया है, जो जमीन विवाद, फर्जी दस्तावेज, अवैध रजिस्ट्री और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच करेगा। इस फैसले के बाद जमीन माफियाओं और बिचौलियों में हड़कंप मचा हुआ है। अब सीधे होगी जांच और कार्रवाई सरकार की ओर से बनाए गए इस विशेष सेल

Wrriten By :

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Published On :

मई 21, 2026

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पटना

 बिहार में जमीन से जुड़े फर्जीवाड़े, दाखिल-खारिज में गड़बड़ी और अंचल कार्यालयों में फैले भ्रष्टाचार पर अब सरकार सख्त हो गई है।

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में पारदर्शिता लाने के लिए बिहार सरकार ने बड़ा कदम उठाया है।

सरकार ने पहली बार आर्थिक अपराध इकाई (EOU) के अधीन एक विशेष सेल का गठन किया है, जो जमीन विवाद, फर्जी दस्तावेज, अवैध रजिस्ट्री और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच करेगा।

इस फैसले के बाद जमीन माफियाओं और बिचौलियों में हड़कंप मचा हुआ है।

अब सीधे होगी जांच और कार्रवाई
सरकार की ओर से बनाए गए इस विशेष सेल में DSP से लेकर इंस्पेक्टर, SI और ASI स्तर तक के अधिकारियों की तैनाती की गई है।

यानी यह टीम सिर्फ शिकायतें सुनने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि मौके पर जांच, छापेमारी और कानूनी कार्रवाई भी करेगी।

बताया जा रहा है कि कई जिलों में सरकारी जमीन की खरीद-बिक्री, फर्जी जमाबंदी और गलत तरीके से दाखिल-खारिज कराने की लगातार शिकायतें मिल रही थीं।

इन्हीं मामलों को देखते हुए सरकार ने यह सख्त फैसला लिया है।

अंचल कार्यालयों में फैली घूसखोरी पर शिकंजा
राज्य में लंबे समय से लोगों की शिकायत रही है कि जमीन की रजिस्ट्री, म्यूटेशन, रसीद कटाने और दाखिल-खारिज के लिए कार्यालयों में रिश्वत देनी पड़ती है।
कई जगह बिचौलियों का नेटवर्क भी सक्रिय बताया जाता रहा है।

अब सरकार का दावा है कि नए सेल की निगरानी से ऐसे मामलों पर लगाम लगेगी।
भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों की पहचान कर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

यह विशेष सेल आर्थिक अपराध इकाई यानी EOU के अधीन काम करेगा। EOU पहले से ही आर्थिक अपराध और बड़े घोटालों की जांच के लिए जानी जाती है।

ऐसे में जमीन से जुड़े मामलों में भी तकनीकी जांच और डिजिटल निगरानी को मजबूत किया जाएगा।

सरकार को उम्मीद है कि इससे फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले गिरोह और जमीन कब्जाने वाले नेटवर्क का खुलासा आसान होगा।
साथ ही लंबित मामलों के निपटारे में भी तेजी आ सकती है।

आम लोगों को मिल सकती है बड़ी राहत
सरकार का कहना है कि इस नई व्यवस्था का सबसे ज्यादा फायदा आम लोगों को मिलेगा।

खासकर वे लोग जो जमीन के कागजात, दाखिल-खारिज या रजिस्ट्री को लेकर महीनों दफ्तरों के चक्कर लगाते हैं।

नई निगरानी व्यवस्था लागू होने के बाद पारदर्शिता बढ़ने और भ्रष्टाचार कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।

अब देखना होगा कि सरकार का यह बड़ा कदम जमीन माफियाओं और भ्रष्ट नेटवर्क पर कितना असर डाल पाता है।

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