डिजिटल रिकॉर्ड की ओर तेज़ी: 6 माह में ऑनलाइन होंगे उप निबंधक कार्यालयों के पुराने दस्तावेज

लखनऊ. उत्तर प्रदेश में उप निबंधक कार्यालयों में पंजीकृत पुराने दस्तावेजों के डिजिटाइजेशन को लेकर योगी सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में वर्ष 2002 से 2017 तक पंजीकृत विलेखों की स्कैनिंग व इंडेक्सिंग की परियोजना अवधि को अगले 6 माह तक बढ़ाने को मंजूरी दे दी गई है। यह परियोजना पहले ही अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और इसके लिए सरकार ने किसी अतिरिक्त बजट की आवश्यकता नहीं बताई है। इस योजना को पहले वर्ष 2022 में 95 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दी गई थी।

Wrriten By :

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Published On :

जनवरी 29, 2026

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लखनऊ.
उत्तर प्रदेश में उप निबंधक कार्यालयों में पंजीकृत पुराने दस्तावेजों के डिजिटाइजेशन को लेकर योगी सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में वर्ष 2002 से 2017 तक पंजीकृत विलेखों की स्कैनिंग व इंडेक्सिंग की परियोजना अवधि को अगले 6 माह तक बढ़ाने को मंजूरी दे दी गई है। यह परियोजना पहले ही अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और इसके लिए सरकार ने किसी अतिरिक्त बजट की आवश्यकता नहीं बताई है।

इस योजना को पहले वर्ष 2022 में 95 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दी गई थी। बाद में व्यावहारिक कारणों से इसमें देरी होने पर जुलाई 2024 में परियोजना की अवधि बढ़ाते हुए कुल लागत 123.62 करोड़ रुपये कर दी गई थी। वित्तीय वर्ष 2024-25 के अंत तक इस योजना पर 109.05 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं और शेष कार्य उपलब्ध बजट में ही पूरा कर लिया जाएगा।

99% से अधिक इंडेक्सिंग, 98% स्कैनिंग पूरी

प्रदेशभर में इस परियोजना के तहत इंडेक्सिंग का 99.11 प्रतिशत और स्कैनिंग का 98.37 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। अधिकांश जिलों में यह कार्य शत-प्रतिशत पूरा कर लिया गया है। फिलहाल एटा, वाराणसी, मुरादाबाद, मैनपुरी, लखनऊ, अलीगढ़, हाथरस, आगरा, सहारनपुर व प्रयागराज में कुछ कार्य शेष है, जिसे अगले 6 माह में पूरा कर लिया जाएगा।

दो स्तर पर हो रही जांच व सत्यापन

डिजिटाइजेशन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए हर दस्तावेज का दो स्तर पर सत्यापन किया जा रहा है। पहले स्तर पर सहायक महानिरीक्षक निबंधन द्वारा जांच की जा रही है, जबकि दूसरे स्तर पर मंडलों और वृत्तों के उप महानिरीक्षक निबंधन द्वारा पुनः परीक्षण किया जा रहा है। यह प्रक्रिया शत-प्रतिशत सत्यापन तक जारी रहेगी। पुराने दस्तावेजों के डिजिटाइजेशन से कूटरचना व फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी और जमीन-जायदाद से जुड़े रिकॉर्ड पूरी तरह सुरक्षित हो सकेंगे।

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