Abhishek Bunty Withdraws Name: बिहार की हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। बीजेपी के आधिकारिक उम्मीदवार अभिषेक सिन्हा उर्फ अभिषेक बंटी ने चुनावी मैदान से हटने का चौंकाने वाला फैसला लिया है। गुरुवार को ही भारी लाव-लश्कर और दिग्गज नेताओं की मौजूदगी में नामांकन दाखिल करने वाले अभिषेक बंटी ने शुक्रवार शाम प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपने नामांकन को वापस लेने का ऐलान कर दिया है। उनके इस फैसले ने राज्य की राजनीति में तमाम तरह की अटकलों को जन्म दे दिया है।
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पारिवारिक कारणों का दिया हवाला
अभिषेक सिन्हा बंटी ने मीडिया के सामने अपने इस कदम के पीछे ‘पारिवारिक कारणों’ का हवाला दिया है। उन्होंने कहा कि किन्हीं व्यक्तिगत और पारिवारिक मजबूरियों के चलते अब वे चुनावी समर में बने रहने में असमर्थ हैं। इस संबंध में उन्होंने बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी को औपचारिक पत्र लिखकर अपने फैसले से अवगत करा दिया है।
गौरतलब है कि नामांकन के समय सीएम सम्राट चौधरी सहित बिहार भाजपा के कई कद्दावर नेता उनके साथ मौजूद थे। यहां तक कि नामांकन दाखिल करने के ठीक बाद उन्होंने पूर्व सीएम नीतीश कुमार से भी मुलाकात की थी, जिससे उनकी उम्मीदवारी को काफी मजबूती मिल रही थी। लेकिन नामांकन के महज 24 घंटे के भीतर उनके इस अचानक कदम ने सबको हैरान कर दिया है। अब बीजेपी के सामने इस महत्वपूर्ण सीट के लिए किसी दूसरे उपयुक्त उम्मीदवार को तलाशने की बड़ी चुनौती आ गई है।
कौन हैं अभिषेक सिन्हा बंटी?
अभिषेक बंटी पिछले करीब 27 वर्षों से भारतीय जनता पार्टी के एक निष्ठावान और सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने राजनीति की शुरुआत सबसे निचले पायदान यानी बूथ अध्यक्ष के तौर पर की थी। अपने लंबे राजनीतिक सफर में उन्होंने मंडल मंत्री, मंडल महामंत्री और पटना महानगर युवा मोर्चा के अध्यक्ष जैसी अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं। वर्तमान में वे बीजेपी युवा मोर्चा, बिहार के प्रदेश उपाध्यक्ष के पद पर कार्यरत थे।
अभिषेक बंटी की संगठनात्मक क्षमता और लंबे अनुभव को देखते हुए ही पार्टी नेतृत्व ने उन्हें बांकीपुर जैसी अहम सीट से टिकट देने का फैसला किया था। उन्हें बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और कद्दावर नेता नितिन नवीन का बेहद करीबी माना जाता है। बांकीपुर क्षेत्र में उनकी लंबे समय से सक्रियता और स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच उनकी मजबूत पकड़ को ध्यान में रखते हुए ही पार्टी ने उन पर दांव लगाया था।
बीजेपी के सामने अब नई चुनौती
इस उपचुनाव में बीजेपी ने किसी स्थापित बड़े चेहरे के बजाय संगठन से जुड़े एक जमीन से जुड़े कार्यकर्ता को आगे लाकर एक बड़ा संदेश देने की कोशिश की थी, जिसे कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा था। लेकिन अभिषेक बंटी के अचानक चुनाव से हटने के बाद अब बीजेपी को फिर से अपनी रणनीति पर विचार करना होगा। पार्टी नेतृत्व अब नए सिरे से उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया में जुट गया है। बांकीपुर का यह उपचुनाव अब भाजपा के लिए सिर्फ एक सीट का मामला नहीं, बल्कि अपनी साख और रणनीति को दुरुस्त करने का भी इम्तिहान बन गया है।
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