Abhishek Banerjee Letter : अभिषेक बनर्जी ने ओम बिरला को लिखी चिट्ठी, रसायन एवं उर्वरक समिति की नियुक्ति पर जताई आपत्ति

टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने रसायन एवं उर्वरक समिति की अध्यक्ष नियुक्ति को लेकर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखा है। उन्होंने नियुक्ति प्रक्रिया पर आपत्ति जताते हुए स्पष्टीकरण मांगा है। बनर्जी के पत्र के बाद अब सवाल उठ रहा है कि समिति की अध्यक्ष नियुक्ति को लेकर आखिर विवाद क्या है और इसका अगला कदम क्या होगा?

Abhishek Banerjee Letter

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अक्टूबर 4, 2026

Abhishek Banerjee Letter :  तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और सांसद अभिषेक बनर्जी ने हाल ही में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक कड़ा पत्र लिखा है। इस पत्र के माध्यम से उन्होंने रसायन एवं उर्वरक संबंधी संसदीय समिति के चेयरपर्सन पद पर की गई नई नियुक्ति पर कड़ी आपत्ति जताई है। बनर्जी ने मांग की है कि इस विवादास्पद नियुक्ति को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए और समिति की अध्यक्षता पार्टी द्वारा विधिवत रूप से नामित सदस्य को सौंपी जाए।

लोकसभा बुलेटिन का हवाला देकर उठाई गई आपत्ति

अपने पत्र में अभिषेक बनर्जी ने 3 अक्टूबर 2026 के लोकसभा बुलेटिन-पार्ट II संख्या 6185 का विशेष रूप से जिक्र किया है। उन्होंने दावा किया है कि इस संसदीय समिति का चेयरपर्सन ऐसे सदस्य को बना दिया गया है, जिनके खिलाफ संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्यता से जुड़ी याचिकाएं वर्तमान में लोकसभा स्पीकर के पास लंबित हैं। बनर्जी का कहना है कि किसी भी सदस्य की राजनीतिक संबद्धता और अयोग्यता का मामला विचाराधीन होने पर उन्हें ऐसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देना संसदीय परंपराओं के विपरीत है।

संसदीय समितियों की अध्यक्षता से धोना पड़ा हाथ

उल्लेखनीय है कि हाल ही में राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विभिन्न विभाग-संबंधी संसदीय स्थायी समितियों का पुनर्गठन किया है। इस पुनर्गठन के बाद से तृणमूल कांग्रेस को दो अहम समितियों की अध्यक्षता गंवानी पड़ी है। जहां एक तरफ बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी को वाणिज्य संबंधी समिति का नया चेयरपर्सन बनाकर टीएमसी की डोला सेन की जगह दी गई है, वहीं रसायन एवं उर्वरक समिति की कमान टीएमसी के बागी गुट की नेता काकोली घोष दस्तीदार को सौंप दी गई है।

पार्टी के नामांकन नजरअंदाज करने का आरोप

अभिषेक बनर्जी ने याद दिलाया कि उन्होंने 23 सितंबर 2026 को भेजे गए अपने पत्रों में पहले ही अनुरोध किया था कि अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला आने तक ऐसे सदस्यों को समितियों में नियुक्ति के लिए विचार से बाहर रखा जाए। साथ ही, पार्टी ने एक स्थायी समिति की अध्यक्षता अपने पास रखने के लिए मौजूदा चेयरपर्सन को ही बनाए रखने का नामांकन भेजा था। उनका आरोप है कि पार्टी की इन स्पष्ट आपत्तियों और नामांकनों को दरकिनार करते हुए यह विवादास्पद फैसला लिया गया है।

पार्टी संबद्धता पर उठाए गए गंभीर सवाल

बनर्जी ने सवाल उठाया कि डिजिटल संसद की वेबसाइट पर एआईटीसी के 28 सदस्य दिखाए जा रहे हैं, जबकि नई चेयरपर्सन ने विलय के आधार पर नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) से अपनी संबद्धता का दावा किया है। उन्होंने लोकसभा स्पीकर से पूछा कि यदि यह पद एआईटीसी के कोटे का था, तो पार्टी की इच्छा के खिलाफ नामित सदस्य क्यों बदला गया? और अगर यह पद एनसीपीआई को दिया गया है, तो किस आधार पर मान्यता दी गई?

लोकसभा अध्यक्ष को लिखित जवाब

अंत में अभिषेक बनर्जी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस नियुक्ति को पार्टी के हिस्से की अध्यक्षता के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से आग्रह किया है कि वे इस नियुक्ति को तुरंत रद्द करें, समिति की कमान टीएमसी के नामित सदस्य को दें, लंबित अयोग्यता याचिकाओं पर जल्द फैसला लें और इन सभी गंभीर सवालों पर अपना एक स्पष्ट लिखित जवाब भी दें।