Abhishek Banerjee: अभिषेक बनर्जी की खुली चुनौती, दलबदलू लौटे तो तुरंत छोड़ दूंगा अपना पद

तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं को खुली चुनौती देते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यदि 'दीदी' का साथ छोड़ने वाले नेता वापस लौटते हैं तो वह पार्टी से इस्तीफा देने को तैयार हैं। इस बयान के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है।

Abhishek Banerjee

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जुलाई 18, 2026

Abhishek Banerjee: तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी घमासान और पार्टी नेताओं की बगावत के बीच, अखिल भारतीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने बागी खेमे को एक बड़ी और स्पष्ट चुनौती दी है। हालिया चुनाव परिणामों के बाद पार्टी के भीतर अभिषेक की कार्यशैली पर लगातार सवाल उठाए जा रहे थे, जिस पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने शनिवार को अपने आवास के बाहर पत्रकारों से मुखातिब होते हुए कहा, “अगर पार्टी छोड़ने वाले नेता वापस आते हैं, तो मैं 24 घंटे के भीतर अपने पद से इस्तीफा दे दूंगा।” उन्होंने बागी गुटों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वे सूची तैयार कर लें, क्योंकि तृणमूल के दरवाजे उनके लिए पूरी तरह बंद हैं। यह बयान पार्टी के पुराने नेताओं, जैसे कल्याण बनर्जी और अन्य द्वारा की जा रही आलोचनाओं के बीच एक बड़ा राजनीतिक दांव माना जा रहा है।

चुनावी हार और ‘निष्क्रियता’ के आरोपों का जवाब

पार्टी की चुनावी हार के बाद से ही तृणमूल के कुछ वरिष्ठ नेता और असंतुष्ट सांसद लगातार अभिषेक बनर्जी को निशाना बना रहे हैं। उन पर टिकट बेचने और पार्टी के प्रति ‘निष्क्रिय’ रहने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। कई जनप्रतिनिधियों ने ममता बनर्जी के भतीजे के रूप में उनकी पहचान और प्रभाव को लेकर भी नाराजगी जताई है, जिसके परिणामस्वरूप कई सांसद और नेता अन्य खेमों में शामिल हो गए हैं। अभिषेक ने इन आरोपों का खंडन करते हुए बागी नेताओं से तीखा सवाल किया कि यदि वे पार्टी की हार के लिए जिम्मेदार हैं, तो इतने समय तक उन्हें जनता की याद क्यों नहीं आई? उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी के भीतर अनुशासन सर्वोपरि है और किसी भी स्थिति में दलबदलुओं को वापस नहीं लिया जाएगा।

पार्टी कार्यालय पर बुलडोजर कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट तक जाने की चेतावनी

राजनीतिक बगावत के अलावा, अभिषेक बनर्जी ने अमतला में पार्टी कार्यालय पर हुई बुलडोजर कार्रवाई को लेकर भी आक्रामक रुख अपनाया है। उन्होंने इसे मंदिर जैसी पवित्र जगह पर हमला करार देते हुए कहा कि कार्यालय के मालिकाना हक के सभी दस्तावेज उनके पास मौजूद हैं। उन्होंने घोषणा की कि वे सबसे पहले इन दस्तावेजों को कलकत्ता हाई कोर्ट में जमा करेंगे और जरूरत पड़ने पर मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाएंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि वे इस लड़ाई को तार्किक अंजाम तक पहुंचाकर ही दम लेंगे। उनका यह रुख साबित करता है कि वे न केवल पार्टी की आंतरिक राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं, बल्कि प्रशासनिक और कानूनी मोर्चों पर भी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।

कल्याण बनर्जी के बयान पर पलटवार और आंतरिक कलह

अभिषेक बनर्जी के इस बयान ने पार्टी के पुराने दिग्गजों के साथ उनके तनाव को और बढ़ा दिया है। विशेष रूप से कल्याण बनर्जी और राजीव बनर्जी जैसे वरिष्ठ नेताओं ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि यदि अभिषेक पार्टी में हैं, तो वे वहां नहीं रहेंगे। अभिषेक ने इन बयानों को सीधे चुनौती दी है। उनके समर्थकों का मानना है कि यह पलटवार उन सभी पुराने नेताओं के लिए एक स्पष्ट संदेश है जो नेतृत्व परिवर्तन की मांग कर रहे थे। टीएमसी के भीतर अब यह स्पष्ट है कि ममता बनर्जी के बाद ‘कालीघाट कैंप’ और ‘बागी कैंप’ के बीच की यह लड़ाई निर्णायक मोड़ पर आ गई है, जहां अब किसी भी तरह की सुलह की गुंजाइश कम ही नजर आती है।

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