Abhijit Deepke: देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर कथित नीट (NEET) पर्चा लीक मामले और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन अब एक नए और गरमाते विवाद के केंद्र में आ गया है। इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल मंगलवार को अपने 10वें दिन में प्रवेश कर चुकी है। लेकिन इसी बीच, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक और प्रमुख आंदोलनकारी अभिजीत दीपके का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में दीपके जंतर-मंतर प्रदर्शन स्थल पर ब्रेड पकौड़ा और नूडल्स खाते हुए दिखाई दे रहे हैं।
जैसे ही यह वीडियो इंटरनेट पर आया, सोशल मीडिया यूजर्स और आलोचकों ने इस पर तीखे तंज कसने शुरू कर दिए। लोगों का आरोप है कि एक तरफ जहां मुख्य चेहरा सोनम वांगचुक छात्रों के भविष्य के लिए भूखे पेट बैठकर अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आंदोलन से जुड़े बाकी मुख्य सहयोगी और नेता धरना स्थल पर ही लजीज व्यंजनों का लुत्फ उठा रहे हैं।
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अभिजीत दीपके का पलटवार: ‘मुद्दे से ध्यान भटकाने की बचकानी कोशिश’
वीडियो पर मचे भारी हंगामे और बढ़ते विवाद को देखते हुए सीजेपी (CJP) प्रमुख अभिजीत दीपके ने खुद सामने आकर स्थिति स्पष्ट की है। ‘दिल्ली तक’ न्यूज चैनल से विशेष बातचीत के दौरान दीपके ने वायरल वीडियो की पूरी सच्चाई उजागर की और इसे विरोधियों द्वारा मुख्य मुद्दे से ध्यान भटकाने की एक बेहद बचकानी और साजिशी कोशिश करार दिया।
बिना संदर्भ के वायरल किया वीडियो: अभिजीत दीपके ने सफाई देते हुए साफ कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही यह क्लिप हाल-फिलहाल की नहीं है। यह वीडियो उस समय का है जब सोनम वांगचुक ने अपना आधिकारिक अनशन शुरू भी नहीं किया था। उनके भूख हड़ताल पर बैठने से पहले की एक सामान्य क्लिप को संदर्भ से काटकर (Out of Context) अब जानबूझकर दुष्प्रचार के लिए फैलाया जा रहा है।
क्यों अनशन पर नहीं बैठी आयोजन की कोर टीम?
अभिजीत दीपके ने इस दौरान आंदोलन की रणनीतिक व्यवस्था पर भी खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि इस बड़े आंदोलन की पूरी कोर टीम का भूख हड़ताल पर न बैठना कोई लापरवाही नहीं, बल्कि एक सोचा-समझा फैसला है।
सोनम वांगचुक का ही था निर्देश: दीपके के मुताबिक, खुद सोनम वांगचुक ने कोर टीम के सदस्यों को सख्त निर्देश दिए थे कि वे अनशन पर न बैठें।
प्रशासनिक व्यवस्था संभालना जरूरी: आंदोलनकारियों का तर्क है कि अगर पूरी कोर कमेटी ही भूख हड़ताल पर बैठ जाएगी और शारीरिक रूप से कमजोर हो जाएगी, तो देश भर से आ रहे हजारों प्रदर्शनकारी छात्रों की रहने-खाने की व्यवस्था कौन संभालेगा? इसके अलावा, हर दिन पुलिस और नागरिक प्रशासन के साथ होने वाली संवेदनशील बातचीत और कानूनी कागजी कार्रवाई को संभालने के लिए टीम का मुस्तैद और स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है।
10 दिन में 5 किलो वजन घटा, वांगचुक की सेहत पर गहरी चिंता
अपनी सफाई देने के साथ ही अभिजीत दीपके ने सोनम वांगचुक के गिरते स्वास्थ्य पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि लगातार 10 दिनों तक अन्न का एक दाना न लेने के कारण वांगचुक का वजन करीब 5 किलोग्राम तक घट गया है और डॉक्टरों के मुताबिक उनकी शारीरिक स्थिति तेजी से बिगड़ रही है।
कोर टीम और डॉक्टरों ने वांगचुक की गंभीर हालत को देखते हुए उनसे कई बार अपना अनशन वापस लेने या उसे प्रतीकात्मक बनाने का पुरजोर अनुरोध किया था। हालांकि, सोनम वांगचुक देश के करोड़ों छात्रों की आवाज बनकर अपनी मांगों पर पूरी तरह अड़े हुए हैं। उनका स्पष्ट और कड़ा स्टैंड है कि जब तक पेपर लीक मामले की पूरी जवाबदेही तय नहीं होती और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक उनका यह अनशन और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन इसी तरह और उग्र रूप से जारी रहेगा।
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