Abhijeet Dipke: दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे एक अनूठे विरोध प्रदर्शन के दौरान मानवता और संवेदनाओं को झकझोर देने वाली एक तस्वीर सामने आई है। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे प्रदर्शनकारी छात्रों को बारिश से बचाने के लिए दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के आगे हाथ जोड़ते और पैर पकड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं। यह वीडियो न केवल प्रदर्शन की गंभीरता को दर्शाता है, बल्कि प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच बने गतिरोध की कड़वी सच्चाई को भी बयां करता है।
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छात्रों की सुरक्षा के लिए भावुक अपील
जंतर-मंतर पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के साथ कई छात्र भूख हड़ताल पर बैठे हैं। बीते कुछ दिनों से दिल्ली में हो रही मूसलाधार बारिश ने इन प्रदर्शनकारियों के लिए स्थितियां बेहद विकट कर दी हैं। अभिजीत दीपके द्वारा शेयर किए गए वीडियो में उनकी लाचारी स्पष्ट झलक रही है। वीडियो में उन्हें बार-बार “सर, सर, सर… तिरपाल लगाने दीजिए। सर बारिश हो रही है…” कहते हुए सुना जा सकता है। जब उन्होंने अपने प्रदर्शनकारियों को बचाने के लिए पुलिस के पैर पकड़ने का प्रयास किया, तो वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोका, लेकिन छात्रों की दुर्दशा से व्यथित दीपके अपनी मांग पर अडिग रहे।
तीन दिन से अनुमति का इंतजार
अभिजीत दीपके ने अपने एक्स (ट्विटर) हैंडल पर अपनी व्यथा साझा करते हुए बताया कि वे और उनकी पूरी टीम पिछले तीन दिनों से केवल एक सामान्य अनुमति के लिए संघर्ष कर रही है—ताकि वे एक मामूली तिरपाल लगा सकें। उन्होंने लिखा, “रात भर बारिश होती रही और भूख हड़ताल पर बैठे हमारे साथियों के पास सोने के लिए जगह नहीं थी। उनका सारा सामान भीग चुका है। हम सुबह 11 बजे से ही पुलिस की अनुमति का इंतजार कर रहे हैं, ताकि कम से कम इन छात्रों को बारिश से सुरक्षित किया जा सके।”
प्रदर्शन और प्रशासन का टकराव
यह घटना जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन के पीछे के संघर्ष को उजागर करती है। एक तरफ सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का अनशन है, तो दूसरी तरफ प्रशासन की सख्त सुरक्षा नीतियां हैं। कार्यकर्ताओं का तर्क है कि प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार है और इसमें शामिल लोगों की न्यूनतम सुरक्षा—जैसे सिर पर छत—सुनिश्चित करना मानवीय आधार पर अनिवार्य है। वहीं, पुलिस सुरक्षा मानकों और नियमों का हवाला देते हुए अनुमति देने से हिचकिचा रही है।
इस वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। जहाँ एक वर्ग प्रदर्शनकारियों के प्रति दिखाई गई इस संवेदनशीलता पर सवाल उठा रहा है, वहीं दूसरा वर्ग कानूनी नियमों की मर्यादा पर जोर दे रहा है। बहरहाल, जंतर-मंतर पर भीगते हुए छात्रों की यह तस्वीर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा रही है। क्या विरोध प्रदर्शन करने वालों के लिए बुनियादी सुविधाएं जुटाना इतना कठिन है कि उसके लिए किसी को पुलिस के पैर पकड़ने पड़ें? यह घटना दिल्ली में जारी इस प्रदर्शन को एक नया और भावुक मोड़ दे गई है।










