Abhijeet Dipke: ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान में सामने आई बदहाली, अभिजीत दीपके ने सरकार को घेरा

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने स्वतंत्रता दिवस पर महाराष्ट्र के हिंगोली स्थित अपने पैतृक गांव से 'स्कूल ठीक करो' अभियान की शुरुआत की है।

Abhijeet Dipke

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अगस्त 15, 2026

Abhijeet Dipke: स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर महाराष्ट्र में शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलते हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने एक नए और आक्रामक ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान का आगाज कर दिया है। पार्टी के संयोजक अभिजीत दीपके ने शनिवार (15 अगस्त) को हिंगोली जिले के अपने पैतृक गांव संतुक पिंपरी से इस राष्ट्रव्यापी अभियान की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने ग्रामीण इलाकों के सरकारी स्कूलों में फैली बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी को लेकर सरकारों पर तीखे सवाल उठाए और साफ कहा कि इस बदहाली का सबसे बड़ा खामियाजा गरीब परिवारों के मासूम बच्चों को भुगतना पड़ रहा है।

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ज़मीनी हकीकत की पड़ताल

स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण कार्यक्रम में शामिल होने के बाद अभिजीत दीपके सीधे अपने गांव के जिला परिषद स्कूल पहुंचे। वहां उन्होंने कक्षाओं और परिसरों का जायजा लिया, जो बेहद निराशाजनक था। दीपके ने चौंकाने वाले दावे करते हुए कहा कि:

स्कूल के शौचालयों में पीने या उपयोग के लिए पानी तक की कोई व्यवस्था नहीं थी।

कक्षाओं की खिड़कियां टूटी हुई थीं और उन्हें ढकने के लिए उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की तस्वीर वाले राजनीतिक बैनरों का इस्तेमाल किया गया था।

स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या के मुकाबले बैठने के लिए पर्याप्त बेंच नहीं थीं, बमुश्किल चार बेंच ही वहां मौजूद थीं।

उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, “भारत को आजाद हुए 80 साल हो गए हैं, लेकिन अगर आज भी हमारे सरकारी स्कूलों में पीने का पानी और बुनियादी बेंच जैसी सुविधाएं नहीं हैं, तो हम देश के विकास का दावा कैसे कर सकते हैं?” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके आने की भनक लगते ही ऐन वक्त पर शौचालयों की खानापूर्ति के लिए सफाई की गई थी।

शिक्षा बजट में कटौती और 94 हजार स्कूल बंद होने का आरोप

अभिजीत दीपके ने केंद्र और राज्य सरकारों पर निशाना साधते हुए शिक्षा बजट में लगातार कटौती करने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि सोची-समझी रणनीति के तहत निजी स्कूलों और कॉरपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए सरकारी विद्यालयों को या तो कमजोर किया जा रहा है या फिर बंद किया जा रहा है।

उन्होंने आंकड़े सामने रखते हुए कहा कि पिछले दस वर्षों के भीतर देश भर में 94,000 से अधिक सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए हैं। एक तरफ जहां गांवों में नए और आधुनिक स्कूलों के निर्माण की सख्त जरूरत है, वहीं स्कूलों को ताले लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि खराब सड़कों और बदहाल स्कूलों के कारण ग्रामीण विद्यार्थियों को शिक्षा पाने के लिए भारी संघर्ष करना पड़ता है। जब तक देश के हर बच्चे को समान अवसर नहीं मिलेंगे, तब तक सच्चे अर्थों में राष्ट्र का विकास संभव नहीं है।

राष्ट्रव्यापी डेटा संकलन और निजी स्कूलों की फीस पर नियंत्रण की मांग

इस अभियान के अगले चरण की रूपरेखा बताते हुए दीपके ने घोषणा की कि उनकी पार्टी महाराष्ट्र और देश भर के सरकारी स्कूलों की मौजूदा स्थिति का एक डेटाबेस तैयार करेगी। इसके तहत यह सूची बनाई जाएगी कि किस स्कूल में कौन सी बुनियादी सुविधा गायब है। पार्टी का मकसद इन आंकड़ों को सार्वजनिक कर सरकार पर सुधार के लिए दबाव बनाना है।

इसके साथ ही, उन्होंने निजी शिक्षण संस्थानों की मनमानी पर लगाम कसने की मांग उठाई। दीपके ने कहा कि आज आम परिवार बच्चों की पढ़ाई पर सालाना एक से डेढ़ लाख रुपये खर्च करने को मजबूर हैं, जिससे गरीब बच्चों के लिए उच्च शिक्षा के रास्ते बंद हो रहे हैं। सरकार को तुरंत निजी स्कूलों की फीस को सीमित और नियंत्रित करना चाहिए। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी मुद्दों पर अब गांवों के युवाओं को भी अपनी सक्रिय राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी।

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