Abdullah Azam Khan : दोहरे पासपोर्ट मामले में अब्दुल्ला आजम खान को बड़ी राहत, सेशन कोर्ट ने किया पूरी तरह बरी

सपा नेता आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम खान को रामपुर सेशन कोर्ट से दोहरे पासपोर्ट मामले में मिली इस बड़ी राहत की पूरी इनसाइड स्टोरी क्या है? कोर्ट ने किन सबूतों और दलीलों को मानकर उन्हें पूरी तरह बरी कर दिया, और इस फैसले का उत्तर प्रदेश की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा, जानिए।

Abdullah Azam Khan

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मई 29, 2026

Abdullah Azam Khan : उत्तर प्रदेश के रामपुर से समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान के परिवार के लिए कानून के मोर्चे से एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। सपा नेता आजम खान के बेटे और पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम खान को बहुचर्चित दोहरे पासपोर्ट मामले में अदालत से बहुत बड़ी कानूनी कामयाबी मिली है। रामपुर की विशेष एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट ने इस मामले की गहन सुनवाई करने के बाद निचली अदालत (मजिस्ट्रेट कोर्ट) द्वारा दी गई सात साल की कठोर कारावास की सजा को पूरी तरह से निरस्त कर दिया है। सेशन कोर्ट ने अब्दुल्ला आजम की ओर से दायर की गई अपील को मंजूर करते हुए उन्हें इस मामले के सभी आरोपों से ससम्मान बरी कर दिया है।

एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट ने पलटा मजिस्ट्रेट कोर्ट का पुराना फैसला

इस पूरे अदालती घटनाक्रम और मामले की कानूनी बारीकियों की जानकारी देते हुए अब्दुल्ला आजम खान के वरिष्ठ अधिवक्ता नासिर सुल्तान ने मीडिया को पूरी बात बताई। उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले रामपुर की ही मजिस्ट्रेट अदालत ने इस दोहरे पासपोर्ट प्रकरण में अब्दुल्ला आजम खान को प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए सात वर्ष की जेल की सजा मुकर्रर की थी। इस दंडात्मक फैसले को चुनौती देते हुए अब्दुल्ला आजम के वकीलों की टीम ने एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट में एक आपराधिक अपील दायर की थी। इस अपील पर शुक्रवार को दोपहर तकरीबन तीन बजे अंतिम सुनवाई हुई, जिसमें अदालत ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए निचली अदालत के आदेश को कानूनी रूप से गलत पाया और उसे तत्काल प्रभाव से खारिज कर दिया।

बचाव पक्ष के वकील नासिर सुल्तान ने दी अदालती कार्यवाही की पूरी जानकारी

अब्दुल्ला आजम के वकील नासिर सुल्तान ने अदालती फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि माननीय सेशन कोर्ट ने पत्रावली पर उपलब्ध सभी कानूनी तथ्यों, साक्ष्यों और सरकारी दस्तावेजों का बहुत ही बारीकी व निष्पक्षता से अध्ययन किया। अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि अभियोजन पक्ष अब्दुल्ला आजम के खिलाफ लगाए गए आरोपों को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा है। यही वजह रही कि सेशन कोर्ट ने पूर्व में दिए गए दोषसिद्धि के आदेश को पलटते हुए अब्दुल्ला आजम को दोषमुक्त करार दे दिया। इस न्यायसंगत फैसले के आते ही आजम खान के समर्थकों और समाजवादी पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर दौड़ गई है, वहीं जिले के सियासी गलियारों में भी चर्चाओं का बाजार बेहद गर्म हो गया है।

क्या था पूरा मामला और किन गंभीर आरोपों से घिरे थे पूर्व विधायक

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह पूरा विवाद अब्दुल्ला आजम खान द्वारा कथित रूप से दो अलग-अलग पासपोर्ट बनवाने और उनका इस्तेमाल करने से जुड़ा हुआ था। उन पर यह गंभीर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने आपराधिक साजिश के तहत फर्जी और कूट रचित दस्तावेजों का सहारा लिया, ताकि वे अलग-अलग जन्मतिथि दर्शाने वाले दो वैध पासपोर्ट हासिल कर सकें। इस मामले की लंबी जांच के बाद रामपुर की विशेष एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट ने पिछले साल दिसंबर 2025 में अपना फैसला सुनाया था। उस समय मजिस्ट्रेट कोर्ट ने अब्दुल्ला आजम खान को जालसाजी का दोषी करार देते हुए 5 दिसंबर 2025 को सात साल की जेल और भारी-भरकम आर्थिक जुर्माने की सजा से दंडित किया था।

इस ऐतिहासिक अदालती फैसले के दूरगामी राजनीतिक मायने

मजिस्ट्रेट कोर्ट के उस कड़े फैसले के बाद अब्दुल्ला आजम खान की विधानसभा सदस्यता और उनके राजनीतिक भविष्य पर एक बड़ा संकट खड़ा हो गया था। लेकिन अब सेशन कोर्ट से पूरी तरह क्लीन चिट मिलने के बाद उनकी कानूनी मुश्किलें बहुत हद तक कम हो गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले से आजम खान के परिवार को न केवल कानूनी मोर्चे पर बल्कि सार्वजनिक जीवन में भी अपनी खोई हुई साख वापस पाने में काफी मदद मिलेगी। जहां एक तरफ समाजवादी पार्टी इस फैसले को न्याय की जीत बता रही है, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दल अब इस मामले को उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) में चुनौती देने की तैयारियों पर विचार कर रहे हैं। फिलहाल, रामपुर और उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस फैसले के गहरे मायने निकाले जा रहे हैं।

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