Abbas Araghchi Challenge US: “आओ हम तैयार हैं”, ईरानी विदेश मंत्री ने अमेरिका को दी सबसे बड़ी चुनौती

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि अगर उसने ईरान की धरती पर कदम रखा, तो यह अमेरिकी सेना के लिए 'महाविनाश' (Big Disaster) साबित होगा। अराघची ने सीजफायर की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि ईरान झुकने के बजाय टकराने के लिए पूरी तरह तैयार है।

Abbas Araghchi Challenge US

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 6, 2026

Abbas Araghchi Challenge US: अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ लगातार की जा रही सैन्य कार्रवाई और हवाई हमलों ने पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में बारूद का ढेर लगा दिया है। इन भीषण हमलों के बावजूद ईरान ने अपनी रणनीतिक नीतियों में किसी भी प्रकार के समझौते या नरमी के संकेत नहीं दिए हैं। इस बीच, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक अत्यंत साहसी और कड़ा बयान जारी किया है। अराघची ने स्पष्ट रूप से कहा है कि ईरान अमेरिका के किसी भी ‘ग्राउंड इन्वेजन’ (जमीनी हमले) का सामना करने के लिए न केवल तैयार है, बल्कि उसका इंतजार कर रहा है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब वाशिंगटन और यरूशलेम में सैन्य रणनीतिकार ईरान के भीतर जमीनी अभियान शुरू करने की संभावनाओं पर गंभीरता से मंथन कर रहे हैं।

बातचीत की संभावनाओं को नकारा: ‘सीजफायर’ की मांग से इनकार

हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान NBC को दिए एक विशेष इंटरव्यू में अब्बास अराघची ने अमेरिका के साथ किसी भी कूटनीतिक वार्ता की संभावना को सिरे से खारिज कर दिया। तेहरान से वीडियो लिंक के माध्यम से बात करते हुए उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान ने अब तक किसी भी मोर्चे पर सीजफायर (युद्धविराम) की कोई मांग नहीं की है। जब उनसे यह पूछा गया कि क्या ईरान अमेरिकी सैन्य शक्ति और संभावित जमीनी घुसपैठ से डरा हुआ है, तो अराघची का जवाब चौंकाने वाला था। उन्होंने आत्मविश्वास के साथ कहा, “हम डरे नहीं हैं, बल्कि हम उनका इंतजार कर रहे हैं। हमें अपनी सैन्य क्षमता पर पूरा भरोसा है। अगर अमेरिका जमीन पर कदम रखता है, तो यह उनके लिए एक बड़ी और कभी न खत्म होने वाली मुसीबत साबित होगी।”

ईरानी सेना की तैयारी: दुश्मन के लिए बनेगा ‘कठिन रास्ता’

विदेश मंत्री अराघची ने यह साफ कर दिया कि ईरान की सशस्त्र सेनाएं लंबे समय से एक बड़े युद्ध की तैयारी कर रही हैं। उन्होंने बताया कि ईरान यह सुनिश्चित कर रहा है कि यदि कोई भी बाहरी शक्ति संघर्ष को और अधिक बढ़ाना चाहती है, तो उसके लिए यह रास्ता अत्यंत दुर्गम और कष्टकारी हो। अराघची ने अमेरिकी प्रशासन पर हमला बोलते हुए कहा कि अतीत में दो बार बातचीत की कोशिशें की गई थीं, लेकिन दोनों ही बार वार्ता के बीच में ही हमले किए गए। उन्होंने इस विश्वासघात के लिए पूरी तरह से अमेरिकी प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि अमेरिका की कथनी और करनी में जमीन-आसमान का अंतर है।

पुराने अनुभवों का हवाला: इजरायल ने मांगी थी बिना शर्त माफी

ईरानी विदेश मंत्री ने अपनी बात को पुख्ता करने के लिए पिछले युद्धों का उदाहरण दिया। उन्होंने जून में इजरायल के साथ चले 12 दिनों के भीषण युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय भी ईरान ने हार नहीं मानी थी और न ही शांति की भीख मांगी थी। उन्होंने दावा किया कि अंततः इजरायल को ही बिना किसी शर्त के युद्धविराम स्वीकार करना पड़ा था। अराघची ने यह भी याद दिलाया कि उस दौरान अमेरिका ने ईरान की परमाणु सुविधाओं को निशाना बनाने की कोशिश की थी, लेकिन वे ईरान के संकल्प को तोड़ने में पूरी तरह विफल रहे।

विश्वास की कमी: बेईमान पक्ष के साथ वार्ता संभव नहीं

अराघची ने अंत में यह स्पष्ट किया कि अमेरिका के साथ बातचीत का ईरान का अनुभव हमेशा कड़वा रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में हुई वार्ताओं के दौरान अमेरिका ने ‘गुड फेथ’ (अच्छी नीयत) का प्रदर्शन नहीं किया। बातचीत के मेज पर होने के बावजूद हमलों का सिलसिला जारी रखना यह दर्शाता है कि अमेरिका ईमानदार नहीं है। अराघची के अनुसार, ईरान अब ऐसे पक्ष के साथ दोबारा बातचीत करने का कोई कारण नहीं देखता जो अपनी प्रतिबद्धताओं का सम्मान नहीं करता। तेहरान का यह सख्त संदेश साफ करता है कि आने वाले दिनों में यह संघर्ष और भी हिंसक रूप ले सकता है।

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