Raghav Chadha BJP : आम आदमी पार्टी में बगावत, राघव चड्ढा समेत 3 सांसद BJP में शामिल

आम आदमी पार्टी के 'पोस्टर बॉय' रहे राघव चड्ढा को राज्यसभा में डिप्टी लीडर के पद से हटा दिया गया है। पार्टी द्वारा लगाए गए आरोपों को चड्ढा ने 'स्क्रिप्टेड कैंपेन' बताया है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि वह 3 अन्य सांसदों के साथ पाला बदल सकते हैं। क्या AAP में बड़ी टूट होने वाली है?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अप्रैल 24, 2026

Raghav Chadha BJP :  भारतीय राजनीति और विशेषकर दिल्ली व पंजाब की सत्ता पर काबिज आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर एक बहुत बड़ी बगावत देखने को मिली है। पार्टी के सबसे चर्चित चेहरों में से एक और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने अपने दो अन्य साथियों के साथ पार्टी छोड़ने का औपचारिक ऐलान कर दिया है। राघव चड्ढा के साथ इस विद्रोह में संदीप पाठक और अशोक मित्तल भी शामिल हैं। इन तीनों नेताओं ने न केवल पार्टी छोड़ी है, बल्कि एक नाटकीय घटनाक्रम में भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन भी थाम लिया है। इस कदम ने ‘आप’ के शीर्ष नेतृत्व और अरविंद केजरीवाल की रणनीति को हिलाकर रख दिया है, क्योंकि ये तीनों ही नेता पार्टी के रणनीतिक और सांगठनिक ढांचे की मुख्य कड़ी माने जाते थे।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में छलका दर्द: संदीप पाठक ने बताई पार्टी छोड़ने की मजबूरी

पार्टी छोड़ने के तुरंत बाद एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए संदीप पाठक ने भावुक लहजे में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि “मैंने कभी भी खुद के हितों को ऊपर नहीं रखा। मेरा पूरा जीवन आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल के विजन को आगे बढ़ाने के लिए समर्पित था।” पाठक ने आगे कहा कि देश में लाखों कार्यकर्ता ऐसे हैं जो निस्वार्थ भाव से पार्टी के लिए काम कर रहे हैं, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों ने उन्हें यह कठोर कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है। उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी के भीतर आंतरिक संवाद और प्राथमिकताओं में आए बदलावों के कारण अब वहां काम करना उनके लिए संभव नहीं रह गया था।

संवैधानिक प्रावधानों का हवाला: भाजपा में विलय की कानूनी रणनीति

सांसद राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक बड़ी कानूनी और संवैधानिक घोषणा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल व्यक्तिगत इस्तीफा नहीं है, बल्कि एक सुविचारित ‘विलय’ है। चड्ढा ने कहा, “हमने फैसला किया है कि हम, जो राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के दो-तिहाई सदस्य हैं, भारत के संविधान के प्रावधानों का प्रयोग करते हुए भारतीय जनता पार्टी में अपना विलय कर लेंगे।” संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत, यदि किसी पार्टी के दो-तिहाई निर्वाचित सदस्य एक साथ पाला बदलते हैं, तो उन पर दलबदल विरोधी कानून लागू नहीं होता और उनकी सदस्यता बरकरार रहती है। इसी रणनीति के तहत राघव चड्ढा ने भाजपा के साथ अपनी नई पारी का शंखनाद किया है।

दो-तिहाई बहुमत का दावा: अन्य बड़े नामों के साथ होने की बात कही

राघव चड्ढा ने इस बगावत को केवल तीन सांसदों तक सीमित नहीं बताया। उन्होंने दावा किया कि उनके पास दो-तिहाई से भी ज्यादा सांसदों का समर्थन है। चड्ढा ने मीडिया के सामने उन नामों का भी उल्लेख किया जो उनके इस फैसले के समर्थन में खड़े हैं। उन्होंने बताया कि हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता, विक्रमजीत सिंह साहनी और स्वाति मालीवाल जैसे बड़े नाम भी उनके साथ वैचारिक रूप से जुड़े हुए हैं। यदि चड्ढा का यह दावा सही साबित होता है, तो राज्यसभा में आम आदमी पार्टी का अस्तित्व लगभग समाप्त हो जाएगा और भाजपा को उच्च सदन में एक बड़ी मजबूती मिलेगी।

‘आप’ के भविष्य पर संकट: केजरीवाल के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती

इस बगावत ने अरविंद केजरीवाल के लिए एक नई और गंभीर चुनौती पैदा कर दी है। राघव चड्ढा जैसे करीबी सहयोगी का साथ छोड़ना पार्टी की छवि और भविष्य की चुनावी संभावनाओं पर गहरा असर डाल सकता है। अशोक मित्तल और संदीप पाठक जैसे संगठन के माहिर खिलाड़ियों के भाजपा में जाने से ‘आप’ के कैडर में भी असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह घटनाक्रम दिल्ली और पंजाब के आगामी चुनावों की दिशा बदल सकता है। अब देखना यह होगा कि आम आदमी पार्टी इस ‘महा-बगावत’ से कैसे उबरती है और क्या बाकी बचे सांसदों को एकजुट रख पाने में सफल होती है।

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