कोटा में PM मोदी, पूर्व CM गहलोत, अमिताभ बच्चन समेत 50 मूर्तियों वाला अनूठा मंदिर

कोटा. देशभर में देवी-देवताओं के मंदिर बहुत हैं, लेकिन शिक्षा नगरी कोटा में नयापुरा स्थित कर्मयोगी भारत माता भवन में एक ही स्थान पर न सिर्फ देवी-देवताओं और आराध्यों के दर्शन होंगे, बल्कि संतों, महापुरुषों, नेताओं, अभिनेताओं और खेल व कला जगत से जुड़ी हस्तियों के भी दर्शन किए जा सकेंगे। सामाजिक क्षेत्र में कार्य करने वाले कर्मयोगी सेवा संस्थान ने देश के महापुरुषों का विशेष ‘मंदिर’ तैयार किया है। इसमें देवी-देवताओं समेत करीब 50 मूर्तियों की स्थापना की गई है। इनमें भारत रत्न सम्मानित विभूतियां, विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियों के माध्यम से विश्वभर में देश का मान बढ़ाने

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Published On :

जनवरी 26, 2026

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कोटा.

देशभर में देवी-देवताओं के मंदिर बहुत हैं, लेकिन शिक्षा नगरी कोटा में नयापुरा स्थित कर्मयोगी भारत माता भवन में एक ही स्थान पर न सिर्फ देवी-देवताओं और आराध्यों के दर्शन होंगे, बल्कि संतों, महापुरुषों, नेताओं, अभिनेताओं और खेल व कला जगत से जुड़ी हस्तियों के भी दर्शन किए जा सकेंगे।

सामाजिक क्षेत्र में कार्य करने वाले कर्मयोगी सेवा संस्थान ने देश के महापुरुषों का विशेष ‘मंदिर’ तैयार किया है। इसमें देवी-देवताओं समेत करीब 50 मूर्तियों की स्थापना की गई है। इनमें भारत रत्न सम्मानित विभूतियां, विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियों के माध्यम से विश्वभर में देश का मान बढ़ाने वाले महापुरुष, देश की आजादी में अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले क्रांतिकारी, शिक्षा नगरी के विकास में योगदान देने वाले जनप्रतिनिधि, क्रिकेट के भगवान, स्वर कोकिला, आजादी के नायक और सदी के महानायक तक शामिल हैं। चार मंजिला कर्मयोगी भवन में वर्ष 2023 में तीन प्रतिमाओं की स्थापना से इसकी शुरुआत की गई थी। संस्थान के संस्थापक राजाराम जैन ‘कर्मयोगी’ का मानना है कि संभवतः ऐसा कोई अन्य भवन नहीं है, जहां एक ही स्थान पर इतनी विविध हस्तियों की मूर्तियों की स्थापना की गई हो।

भारत के ये नौ रत्न
भवन के अलग-अलग भागों में देश की पहली महिला प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न इंदिरा गांधी, पं. जवाहरलाल नेहरू, लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल, पूर्व राष्ट्रपति व वैज्ञानिक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, डॉ. भीमराव आंबेडकर, राजीव गांधी, स्वर कोकिला लता मंगेशकर, सचिन तेंदुलकर और मदर टैरेसा की मूर्तियां स्थापित की गई है। इनके अलावा श्रद्धा व आस्था के प्रतीक भगवान राम, महादेव, हनुमान, देवी दुर्गा, देवी सरस्वती, राधा-कृष्ण, भगवान परशुराम, भगवान देवनारायण, महाराजा अग्रसेन, बाबा रामदेव, तेजाजी महाराज, भगवान झूलेलाल, मीनेश भगवान, महर्षि वाल्मीकि, भगवान महावीर की मूर्तियों की स्थापना की गई है।

देशभक्ति भावना के प्रतीक
भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, स्वामी विवेकानंद, चंद्रशेखर आजाद, लाला लाजपत राय, सुभाषचंद्र बोस, महात्मा गांधी, लाल बहादुर शास्त्री, महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी महाराज और झांसी की रानी, शेर-ए-पंजाब महाराजा रणजीत सिंह और खेतसिंह खंगार की मूर्तियां भी स्थापित की गई हैं। गायिका लता मंगेशकर, सदी के महानायक अमिताभ बच्चन, साहित्यकार हरिवंश राय बच्चन, मुंशी प्रेमचंद, हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद और क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर की प्रतिमाएं भी मंदिर में स्थापित हैं।

शहर व देश के ये गौरव
देशभर में कोटा का नाम रोशन करने वाले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, विकास की दृष्टि से कोटा को विशेष पहचान दिलाने वाले पूर्व मंत्री शांति धारीवाल, ‘जादूगर’ के नाम से प्रख्यात पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तथा देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिमा भी स्थापित की गई है। कर्मयोगी का कहना है कि मोदी के कार्यकाल में कई ऐतिहासिक कार्य हुए हैं, इसी कारण उनकी प्रतिमा यहां स्थापित की गई है।

भारत बनेगा कोहिनूर –
महात्मा गांधी और सुभाषचंद्र बोस के मध्य 7 फीट ऊंची व 5 फीट चौड़ी भारत माता की आकृति दीवार में उकेरी गई है। प्रतिमा के दोनों ओर शेरमुख बनाए गए हैं। एक हाथ में कोहिनूर दर्शाया गया है, जो यह संदेश देता है कि अब तक ‘सोने की चिड़िया’ कहलाने वाला भारत, आगे चलकर ‘कोहिनूर’ बनेगा। करीब 56 फीट की ऊंचाई पर तीन मूर्तियां स्थापित की गई हैं, जबकि शेष प्रतिमाएं लगभग 50 फीट की ऊंचाई तक स्थापित की गई हैं। इनमें 12 प्रतिमाएं 3-3 फीट ऊंची हैं और शेष 15-15 इंच की हैं। सभी प्रतिमाएं सफेद संगमरमर से तैयार की गई हैं। बड़ी प्रतिमाओं का वजन लगभग 250 किलो और छोटी प्रतिमाओं का वजन 50-50 किलो है।

कला, संस्कृति, सद्भाव और देशभक्ति का संदेश
संस्थान के कर्मयोगी और अल्का दुलारी का मानना है कि यह मंदिर महापुरुषों द्वारा बताए गए आदर्शों पर चलने के लिए प्रेरित करेगा। साथ ही यह सद्भाव, कला, संस्कृति, अध्ययन और पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। कर्मयोगी बताते हैं कि उनके परिसर में 15 अगस्त और 26 जनवरी का विशेष महत्व है। मंदिर निर्माण के प्रेरक उनके पिता मेवालाल जैन का जन्म, मृत्यु और विवाह 26 जनवरी को हुआ, जबकि दादा श्रीबख्श जैन का जन्म और विवाह 15 अगस्त को हुआ था। इसी कारण 26 जनवरी को मंदिर का उद्घाटन किया जाएगा। उद्घाटन मां कांता जैन करेंगी।

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