सिद्धारमैया और DK की अनबन के बीच कांग्रेस में तीसरे मोर्चे की तैयारी, विधायक कर रहे बैठकें

बेंगलुरु कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के खेमों के बीच रस्साकशी करीब एक साल से चल रही है। शिवकुमार गुट का कहना है कि सिद्धारमैया ने सीएम बनने से पहले आधे कार्यकाल को लेकर वादा किया था और बाद में वह कुर्सी छोड़ने वाले थे। लेकिन सिद्धारमैया गुट इससे इनकार करता रहा है। इसे लेकर मामला हाईकमान तक भी पहुंच चुका है और हालात संभालने के कई बार प्रयास हो चुके हैं। यही नहीं कई बार ऐसी चर्चाएं भी छिड़ी हैं कि सिद्धारमैया अपने किसी करीबी नेता को मुख्यमंत्री बनाकर हट सकते हैं। इस बीच कांग्रेस

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Published On :

फ़रवरी 5, 2026

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बेंगलुरु

कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के खेमों के बीच रस्साकशी करीब एक साल से चल रही है। शिवकुमार गुट का कहना है कि सिद्धारमैया ने सीएम बनने से पहले आधे कार्यकाल को लेकर वादा किया था और बाद में वह कुर्सी छोड़ने वाले थे। लेकिन सिद्धारमैया गुट इससे इनकार करता रहा है। इसे लेकर मामला हाईकमान तक भी पहुंच चुका है और हालात संभालने के कई बार प्रयास हो चुके हैं। यही नहीं कई बार ऐसी चर्चाएं भी छिड़ी हैं कि सिद्धारमैया अपने किसी करीबी नेता को मुख्यमंत्री बनाकर हट सकते हैं। इस बीच कांग्रेस में सत्ता के लिए तीसरा मोर्चा खुलता दिख रहा है।

बेंगलुरु में एससी, एसटी और लिंगायत समुदाय के विधायकों की बैठकें हुई हैं। इन लोगों की इच्छा है कि उनके समुदाय के किसी नेता को सीएम का पद मिले या फिर कैबिनेट में फेरबदल की स्थिति में ज्यादा से ज्यादा मंत्री पद मिल जाएं। लिंगायत विधायकों की बैठक सोमवार रात को उद्योग मंत्री एमबी पाटिल की लीडरशिप में हुई। इसके अलावा एससी-एसटी वर्ग के विधायकों की बैठक होम मिनिस्टर जी. परमेश्वर के घर पर मंगलवार की शाम को हुई। नवंबर और दिसंबर में सिद्धारमैया एवं शिवकुमार खेमे के बीच कई बैठकें हुई थीं। तब से फिलहाल स्थिति जस की तस थी, लेकिन विधायकों की फिर से शुरू हुई बैठकों ने हलचल मचा दी है।

कुछ सूत्रों का कहना है कि ये मीटिंगें इसलिए हुई हैं ताकि अपने समुदाय की ताकत दिखाकर हाईकमान को दबाव में लाया जा सके। वहीं कांग्रेस के ही कुछ सूत्रों का कहना है कि एमबी पाटिल और जी. परमेश्वर दोनों ही सिद्धारमैया खेमे के ही हैं। ऐसी स्थिति में यह बैठकें शायद शिवकुमार खेमे को जवाब के तौर पर भी हो सकती हैं ताकि उनके दबाव को कम किया जा सके। दरअसल शिवकुमार वोक्कालिगा समुदाय के नेता हैं, जो राज्य की दूसरी सबसे बड़ी आबादी है। लेकिन सबसे बड़ी संख्या लिंगायतों की है और एक समूह के तौर पर देखा जाए तो एससी और एसटी समुदाय की भी अच्छी संख्या है। ऐसे में इन दोनों वर्गों के विधायकों की बैठकें करके शिवकुमार को बैकफुट पर लाने की कोशिश है।

एमबी पाटिल ने कहा कि हमारी यह बैठक किसी मकसद से नहीं थी बल्कि रूटीन बैठक थी। उन्होंने कहा कि इस बैठक का मतलब सत्ता परिवर्तन या फिर पर्सनल एजेंडा नहीं था। उन्होंने कहा कि लिंगायत तो राज्य का सबसे बड़ा वर्ग हैं। उनके 34 विधायक हैं। विधायकों का कहना था कि सरकार में लिंगायत समुदाय को उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। चर्चाएं इस बात की भी तेज हैं कि सिद्धारमैया खुद हटने की स्थिति में अपने किसी करीबी को कमान देना चाहते हैं। ऐसे में ये बैठकें उसके लिए शक्ति प्रदर्शन या फिर सहमति बनाने की कोशिश है।

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