होली के दौरान हमले की साजिश, भीड़भाड़ वाली जगहों की रेकी; लश्कर आतंकी मॉड्यूल के खिलाफ बड़ी जांच

नई दिल्ली दिल्ली में पकड़े गए लश्कर-ए-तैयबा के संदिग्ध मॉड्यूल की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के मुताबिक पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की साजिश के तहत बांग्लादेशी मूल के युवकों का नेटवर्क तैयार किया गया। इस नेटवर्क का संचालन बांग्लादेश में बैठा लश्कर का एक कमांडर कर रहा था, जिसने वहीं बैठक कर हमलों की पूरी रूपरेखा बनाई। जांच में सामने आया है कि मॉड्यूल के निशाने पर देश के बड़े मेट्रो शहर दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई थे। सूत्रों के मुताबिक कुछ स्थानों की रेकी भी कर ली गई थी और

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Published On :

फ़रवरी 23, 2026

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नई दिल्ली

दिल्ली में पकड़े गए लश्कर-ए-तैयबा के संदिग्ध मॉड्यूल की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के मुताबिक पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की साजिश के तहत बांग्लादेशी मूल के युवकों का नेटवर्क तैयार किया गया। इस नेटवर्क का संचालन बांग्लादेश में बैठा लश्कर का एक कमांडर कर रहा था, जिसने वहीं बैठक कर हमलों की पूरी रूपरेखा बनाई।

जांच में सामने आया है कि मॉड्यूल के निशाने पर देश के बड़े मेट्रो शहर दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई थे। सूत्रों के मुताबिक कुछ स्थानों की रेकी भी कर ली गई थी और होली के मौके पर हमले की तैयारी थी। खुफिया इनपुट के बाद स्पेशल सेल ने कार्रवाई तेज की और मॉड्यूल का भंडाफोड़ कर दिया।
हाफिज सईद और लखवी से सीधा संपर्क

जांच से जुड़े अधिकारियों का दावा है कि बांग्लादेशी हैंडलर शब्बीर अहमद लोन सीधे लश्कर प्रमुख हाफिज सईद और आतंकी सरगना जैकी उर रहमान लखवी के संपर्क में था।पुलिस का कहना है कि आईएसआई भारत में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों के जरिए लोकल मॉड्यूल खड़ा कर रही थी। इसके लिए फंडिंग भी की जा रही थी, ताकि बड़े शहरों में समन्वित हमले किए जा सकें। शब्बीर इस नेटवर्क में आईएसआई और बांग्लादेशी मूल के आतंकी सैदुल इस्लाम के बीच कड़ी का काम कर रहा था। सैदुल संदिग्धों को निर्देश देता था और उन्हें टारगेट तय करने में मदद करता था।
2007 में पकड़ा गया, 2018 में फिर सक्रिय

स्पेशल सेल के अनुसार शब्बीर अहमद लोन 2007 में आत्मघाती हमले की साजिश में एके-47 और हैंड ग्रेनेड के साथ पकड़ा गया था। सजा पूरी करने के बाद 2018 में जेल से बाहर आया और दोबारा लश्कर से जुड़ गया। उसने अपना बेस बांग्लादेश में बनाया, जबकि कनेक्शन पाकिस्तान से बनाए रखे।

अधिकारियों का कहना है कि जेल से रिहाई के बाद उसने पुराने नेटवर्क को फिर सक्रिय किया और सोशल मीडिया के जरिए युवकों को जोड़ना शुरू किया। जांच एजेंसियों को उसके डिजिटल ट्रेल से कई अहम सुराग मिले हैं।
सोशल मीडिया से जोड़ा गया मॉड्यूल

पुलिस के मुताबिक पकड़े गए संदिग्धों को पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए संपर्क में लाया गया। इसके बाद उन्हें बांग्लादेश बुलाकर बैठक की गई। कोलकाता से पकड़े गए उमर फारूक को संवेदनशील स्थानों की रेकी का जिम्मा दिया गया था। संदिग्धों को किराए पर अपार्टमेंट लेने और सुरक्षित ठिकाने बनाने के निर्देश भी दिए गए। मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच में हथियार जुटाने की कोशिशों से जुड़े वीडियो और चैट सामने आए हैं। सुरक्षा एजेंसियों को पहले ही इनपुट मिला था कि लश्कर होली के दौरान बड़ी वारदात की फिराक में है।
ऑपरेशन जारी, कई राज्यों में छापे

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल का ऑपरेशन अभी जारी है। कुछ संदिग्धों के फरार होने की आशंका में कई राज्यों में छापेमारी की जा रही है। सभी आरोपियों को दिल्ली लाकर पूछताछ की जाएगी। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि समय रहते साजिश नाकाम कर दी गई, लेकिन नेटवर्क के बाकी सिरों तक पहुंचना अभी बाकी है।

सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं और देश के बड़े शहरों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। स्पेशल सेल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह मॉड्यूल लंबी योजना का हिस्सा था। अगर समय पर कार्रवाई नहीं होती तो होली के मौके पर बड़ा नुकसान हो सकता था।
विवादित पोस्टर से खुला मॉड्यूल का राज

स्पेशल सेल के हत्थे चढ़े आठ संदिग्धों में से चार दिल्ली में ‘फ्री कश्मीर’ जैसे विवादित पोस्टर लगाकर तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल लौट गए थे। जांच यहीं से आगे बढ़ी और नेटवर्क का सिरा हाथ लगा। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टरबाजी महज ट्रायल रन थी, असली मकसद बड़े हमले की तैयारी था। खुफिया एजेंसियों ने पहले अलर्ट जारी किया था कि आईएसआई समर्थित लश्कर लोकल मॉड्यूल तैयार कर रहा है। एक अन्य इनपुट में लाल किले के आसपास हमले की आशंका जताई गई थी। सुरक्षा एजेंसियों को पहले ही इनपुट मिला था कि लश्कर होली के दौरान बड़ी वारदात की फिराक में है।

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