राज्यसभा सीट पर कांटे की टक्कर, कांग्रेस उम्मीदवार लगभग तय लेकिन BJP की रणनीति ने बढ़ाई चिंता

भोपाल कांग्रेस मध्यप्रदेश से राज्यसभा की अपनी एक सीट बचाने की जद्दोजहद में लगी हुई है। वर्तमान सांसद दिग्विजय सिंह के दोबारा राज्यसभा जाने से इंकार करने के बाद से उम्मीदवार पर सहमति बनाने की प्रक्रिया चल रही है। कांग्रेस में दो स्तरों पर जद्दोजहद जारी है, पहला उम्मीदवार के नाम पर आम सहमति बनाना और दूसरा क्रॉस वोटिंग को रोकना। प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने पहले प्रदेश के दिग्गज नेताओं से रायशुमारी की, इसके बाद 5 मई को दिल्ली में हुई बैठक में उम्मीदवार का फैसला हो गया है। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार पार्टी में राज्यसभा उम्मीदवार तय हो गया

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Published On :

मई 24, 2026

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भोपाल
कांग्रेस मध्यप्रदेश से राज्यसभा की अपनी एक सीट बचाने की जद्दोजहद में लगी हुई है। वर्तमान सांसद दिग्विजय सिंह के दोबारा राज्यसभा जाने से इंकार करने के बाद से उम्मीदवार पर सहमति बनाने की प्रक्रिया चल रही है। कांग्रेस में दो स्तरों पर जद्दोजहद जारी है, पहला उम्मीदवार के नाम पर आम सहमति बनाना और दूसरा क्रॉस वोटिंग को रोकना। प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने पहले प्रदेश के दिग्गज नेताओं से रायशुमारी की, इसके बाद 5 मई को दिल्ली में हुई बैठक में उम्मीदवार का फैसला हो गया है। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार पार्टी में राज्यसभा उम्मीदवार तय हो गया है। पार्टी, मध्यप्रदेश के ही सर्वस्वीकार्य और व्यापक जनाधार वाले नेता को आगे करेगी।

राज्यसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा के बाद प्रदेश कांग्रेस में सक्रियता बढ़ी है। संभावित उम्मीदवार के लिए जल्द बैठक आयोजित की जाएगी। इसमें उम्मीदवारों नामों पर चर्चा कर प्रस्ताव एआइसीसी को भेजे जाएंगे।

कांग्रेस में सर्वसम्मति बनाने और क्रॉस वोटिंग रोकने पर पूरा जोर

कांग्रेस खेमे में अभी भी उम्मीदवार के नामों को लेकर ऊहापोह की स्थिति है। इतना ही नहीं, बीजेपी भी उनका खेल बिगाड़ने की कवायद में जुटी हुई है। चर्चा यहां तक है कि कांग्रेस की सीट हासिल करने के लिए बीजेपी डमी प्रत्याशी उतार सकती है।

सिर्फ 4 विधायक ज्यादा, बीना से विधायक निर्मला सप्रे के दलबदल और मुकेश मल्होत्रा के वोटिंग अधिकार निलंबन व राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद कांग्रेस के विधायक घट गए

दरअसल कांग्रेस के पास अपनी राज्यसभा सीट बचाए रखने के लिए पर्याप्त संख्या बल तो है पर वरिष्ठ नेताओं को इसमें सेंधमारी का डर सता रहा है। मध्यप्रदेश में कुल 230 विधानसभा सीटें हैं। एक सदस्य को राज्यसभा भेजने के लिए 58 विधायक जरूरी हैं। बीना से विधायक निर्मला सप्रे के दलबदल और मुकेश मल्होत्रा के वोटिंग अधिकार निलंबन व राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद कांग्रेस के विधायक घट गए हैं। पार्टी के पास वोट डालने वाले अब 62 विधायक ही बचे हैं जोकि एक सदस्य को जिताने की जरूरी संख्या से चार ही अधिक हैं।

क्रॉस वोटिंग के कारण कांग्रेस अपनी सीट गंवा सकती है, इसलिए पार्टी नेता अतिरिक्त सतर्कता बरत रहे

हरियाणा-उड़ीसा में क्रॉस वोटिंग और बिहार में विधायकों की अनुपस्थिति के कारण कांग्रेस को झटका लग चुका है। अब मप्र में भी पार्टी को इसका डर सता रहा है। क्रॉस वोटिंग के कारण कांग्रेस अपनी सीट गंवा सकती है, इसलिए पार्टी नेता अतिरिक्त सतर्कता बरत रहे हैं।

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