दिल्ली में बड़ा बदलाव! करीब दो दशक बाद जंतर-मंतर रोड पर दौड़ेंगे वाहन

   नई दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के केंद्र में स्थित प्रसिद्ध प्रदर्शन स्थल जंतर-मंतर से जुड़ी सड़क पर अब आम लोगों और वाहनों की आवाजाही सामान्य हो गई है. सुरक्षा समीक्षा और राजधानी में प्रदर्शनों को लेकर बने शांतिपूर्ण माहौल के बाद दिल्ली पुलिस ने यहां पिछले कई सालों से लगाए गए भारी बैरिकेड्स को हटाने का फैसला लिया।  लगभग दो दशक बाद, इस तय क्षेत्र में लगाए गए स्थाई और अस्थायी नाकेबंदी (बैरिकेड्स) को हटा दिया गया है. इसके साथ ही अशोक रोड को टॉल्स्टॉय मार्ग से जोड़ने वाली मुख्य सड़क पर सामान्य आवाजाही बहाल कर दी गई है.

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Published On :

नवम्बर 5, 2026

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   नई दिल्ली

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के केंद्र में स्थित प्रसिद्ध प्रदर्शन स्थल जंतर-मंतर से जुड़ी सड़क पर अब आम लोगों और वाहनों की आवाजाही सामान्य हो गई है. सुरक्षा समीक्षा और राजधानी में प्रदर्शनों को लेकर बने शांतिपूर्ण माहौल के बाद दिल्ली पुलिस ने यहां पिछले कई सालों से लगाए गए भारी बैरिकेड्स को हटाने का फैसला लिया। 

लगभग दो दशक बाद, इस तय क्षेत्र में लगाए गए स्थाई और अस्थायी नाकेबंदी (बैरिकेड्स) को हटा दिया गया है. इसके साथ ही अशोक रोड को टॉल्स्टॉय मार्ग से जोड़ने वाली मुख्य सड़क पर सामान्य आवाजाही बहाल कर दी गई है. अब इस मार्ग से गुजरने वाले दैनिक यात्रियों और वाहन चालकों को घुमावदार रास्तों से राहत मिलेगी। 

आपको बता दें कि कॉकरोच जनता पार्टी के हालिया विरोध प्रदर्शनों के बाद पिछले महीने दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को आधिकारिक विरोध प्रदर्शन स्थल की सूची से डी-नोटीफाई कर दिया था. हालांकि, सुरक्षा स्थिति और अन्य प्रदर्शनों के इनपुट को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने यहां एहतियातन भारी नाकेबंदी जारी रखी थी। 

राजधानी में हाल के दिनों में प्रदर्शनों से जुड़ी शांति और सुरक्षा समीक्षा के बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने बैरिकेड्स हटाकर रास्ते को खोलने का निर्णय लिया. सड़क खुलने के बाद अब जंतर-मंतर रोड पर वाहनों की आवाजाही सुचारू रूप से शुरू हो गई है। 

विरोध-प्रदर्शनों की आवाज रहा है जंतर-मंतर
आपको बता दें कि जंतर-मंतर कई आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों का गवाह रहा है. 1990 के दशक के शुरुआती वर्षों 1993 के बाद से प्रदर्शनकारियों को संसद और सत्ता के गलियारों के पास अपनी बात रखने के लिए अनौपचारिक रूप से जंतर-मंतर रोड पर शिफ्ट कर दिया गया. तब से यह जगह देशभर के आंदोलनों, धरना-प्रदर्शनों और सामाजिक मुद्दों की आवाज बन गई थी। 

2011 में भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन अन्ना हजारे आंदोलन जंतर- मंतर पर शुरू हुआ था जो बाद में रामलीला मैदान पर शिफ्ट हो गया. 2012 का निर्भया कांड विरोध प्रदर्शन भी जंतर- मंतर पर हुआ था. दिल्ली में हुए इस जघन्य कांड के बाद न्याय और महिला सुरक्षा की मांग को लेकर हजारों लोग और छात्र जंतर-मंतर पर इकट्ठा हुए थे। 

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