आम आदमी पार्टी को सुप्रीम कोर्ट से झटका, बिक्रम मजीठिया को मिली जमानत

चंडीगढ़   इस समय सबसे बड़ी खबर सामने आई है।  सुप्रीम कोर्ट ने आज बिक्रम मजीठिया को जमानत दे दी है। मजीठिया को 25 जून 2025 को गिरफ्तार किया गया था और तब से वह नाभा जेल में बंद थे। बता दें कि बिक्रम मजीठिया की आमदन से ज्यादा संपत्ति मामले में  गिरफ्तारी हुई थी  जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने राहत दी है।   सूत्रों के अनुसार, जमानत मिलने के बाद थोड़ी देर पहले डेरा ब्यास प्रमुख गुरिंदर सिंह ढिल्लों ने नाभा जेल जाकर बिक्रम मजीठिया से मुलाकात की। इस दौरान डेरा प्रमुख ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि मजीठिया पर लगे

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Published On :

फ़रवरी 2, 2026

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चंडीगढ़ 

 इस समय सबसे बड़ी खबर सामने आई है।  सुप्रीम कोर्ट ने आज बिक्रम मजीठिया को जमानत दे दी है। मजीठिया को 25 जून 2025 को गिरफ्तार किया गया था और तब से वह नाभा जेल में बंद थे। बता दें कि बिक्रम मजीठिया की आमदन से ज्यादा संपत्ति मामले में  गिरफ्तारी हुई थी  जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने राहत दी है।  

सूत्रों के अनुसार, जमानत मिलने के बाद थोड़ी देर पहले डेरा ब्यास प्रमुख गुरिंदर सिंह ढिल्लों ने नाभा जेल जाकर बिक्रम मजीठिया से मुलाकात की। इस दौरान डेरा प्रमुख ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि मजीठिया पर लगे सभी आरोप झूठे हैं। बिक्रम मजीठिया को जमानत मिलने के बाद अब उनके पक्ष में राजनीतिक और सामाजिक हलचल भी तेज हो गई है। इसी बीच ये भी चर्चाएं तेज हो गई हैं आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगा है। 

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को जवाबी हलफनामा दाखिल करने का समय देते हुए मामले को स्थगित करते हुए कहा था कि मजीठिया की अंतरिम जमानत पर अगली सुनवाई पर विचार किया जाएगा। गौरतलब है कि पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने मजीठिया पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। इसी प्राथमिकी से राहत के लिए श्री मजीठिया ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में जमानत के लिए याचिका दायर की थी, लेकिन अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी। फिर मजीठिया ने उच्चतम न्यायालय का रुख किया था।

प्राथमिकी सात जून, 2025 को मजीठिया के खिलाफ पिछले एनडीपीएस मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) की रिपोर्ट के आधार पर दर्ज की गई थी। एसआईटी ने आरोप लगाया कि मजीठिया और उनकी पत्नी ने घरेलू और विदेशी संस्थाओं के नेटवर्क के माध्यम से अपनी आय के ज्ञात स्रोतों से 540 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जमा की थी। ये आरोप 2007 और 2017 के बीच की अवधि से संबंधित हैं, जब मजीठिया पंजाब में विधानसभा सदस्य और बाद में कैबिनेट मंत्री के रूप में कार्यरत थे।

आरोप लगाया है कि मजीठिया दंपति ने सराया इंडस्ट्रीज लिमिटेड और उसकी सहायक कंपनियों सहित कई कंपनियों पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष नियंत्रण रखा। उन्होंने इन कंपनियों का उपयोग बेनामी संपत्ति हासिल करने के लिए किया। इसके साथ ही, उन्होंने साइप्रस और सिंगापुर स्थित संस्थाओं के माध्यम से विदेशी निवेश और विभिन्न कंपनियों के बीच लेनदेन का उपयोग किया गया। यह भी आरोप लगाया गया कि श्री मजीठिया ने अपने परिवार के सदस्यों और नकली संस्थाओं के माध्यम से शराब, परिवहन और विमानन क्षेत्रों में व्यावसायिक फायदे के लिए अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग किया।

मजीठिया ने सुप्रीम कोर्ट में तर्क दिया था कि भ्रष्टाचार का मामला उसी एनडीपीएस मामले का परिणाम है जिसमें उन्हें अगस्त 2022 में जमानत दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2025 में उस जमानत को रद्द करने की राज्य सरकार की याचिका खारिज कर दी थी।

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