यूपी में विधानसभा चुनावों की हलचल तेज; बीजेपी विकास और कानून-व्यवस्था के दम पर, तो सपा 'पीडीए' फॉर्मूले से सत्ता में वापसी की फिराक में

भगवान बांके बिहारी की नगरी वृंदावन और मथुरा शहर को समेटे यह सीट धार्मिक पर्यटन और राजनीतिक दृष्टिकोण से बेहद खास है

मथुरा सीट पर कुल 4.5 से 4.6 लाख के करीब मतदाता हैं, जहां हर चुनाव में नए युवाओं के जुड़ने से वोट बेस बढ़ रहा है

सीट पर करीब 25-27% ब्राह्मण मतदाता निर्णायक हैं, जबकि मुस्लिम (15%), जाट-ठाकुर (15-20%) और दलित (15-20%) हार-जीत तय करते हैं

2017 और 2022 में बीजेपी के श्रीकांत शर्मा ने भारी अंतर से जीत दर्ज की; 2022 में उन्होंने 1 लाख से अधिक वोटों के अंतर से कांग्रेस को हराया

बीजेपी से श्रीकांत शर्मा प्रबल दावेदार हैं, जबकि कांग्रेस से पूर्व विधायक प्रदीप माथुर और सपा-बसपा नए व आक्रामक चेहरों की तलाश में हैं

एनडीए में रालोद (RLD) के शामिल होने से जाट बाहुल्य क्षेत्रों में बीजेपी को मजबूती मिली है, जिससे विपक्ष की चुनौती बढ़ गई है

समाजवादी पार्टी महंगाई, बेरोजगारी, स्थानीय जनसमस्याओं और सत्ता विरोधी माहौल को भुनाकर अपनी खोई जमीन तलाशने में जुटी है

कान्हा की नगरी होने के बावजूद मथुरा में जर्जर सीवर व्यवस्था, पीने के शुद्ध पानी की किल्लत और भीषण ट्रैफिक जाम मुख्य परेशानियां हैं

यमुना जी का गंदा पानी और आवारा गोवंश की समस्या से स्थानीय लोग व किसान त्रस्त हैं, जो 2027 के चुनाव में बड़े मुद्दे बनेंगे