इस साल जितिया या जीवित्पुत्रिका व्रत 3 अक्टूबर 2026 को रखा जाएगा, जबकि नहाय-खाय 2 अक्टूबर को होगा

माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और उज्जवल भविष्य के लिए 24 घंटे का निर्जला व्रत रखती हैं

यह कठिन व्रत सप्तमी तिथि को नहाय-खाय से शुरू होकर अष्टमी पर मुख्य उपवास और मातृ नवमी पर पारण के साथ संपन्न होता है

पूजा के लिए गन्ना, बांस की डलिया, नेनुआ या तोरई के पत्ते, जिउतिया का धागा, और मौसमी फल अनिवार्य रूप से रखे जाते हैं

इस पावन दिन पर भगवान जीमूतवाहन के साथ-साथ मिट्टी और गोबर से बनी चील और सियारिन की प्रतिमाओं की भी पूजा की जाती है

पूजा के लिए 3 अक्टूबर को ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 04:38 से 05:26) और अभिजित मुहूर्त (दोपहर 11:46 से 12:34) बेहद शुभ हैं

सबसे पहले भगवान गणेश और जीमूतवाहन जी को जल छिड़ककर स्नान कराएं, फिर धूप-दीप जलाकर रोली, अक्षत और फूल अर्पित करें

विधि-विधान से पूजा करने के बाद जितिया व्रत की कथा जरूर सुनें और पूजन के बाद महिलाएं गले में जितिया का धागा धारण करती हैं

अंत में भगवान की आरती करके सभी में प्रसाद बांटा जाता है और नवमी तिथि के दिन नियमानुसार व्रत का पारण किया जाता है