भोपाल RGPV में 36 प्रोफेसरों को पदोन्नति का इंतजार, कुलगुरु के फैसले पर टिकी निगाहें

भोपाल  राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) में 36 प्रोफेसरों की पदोन्नति की फाइल चार साल बाद कुलगुरु के पास पहुंच गई है। करियर एडवांसमेंट स्कीम (कैस) के तहत प्रोफेसरों को पदोन्नति देने की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद अब तक अंतिम आदेश जारी नहीं हो सका है। विश्वविद्यालय में अधिकारियों के स्तर पर फाइल का परीक्षण करने के बाद इसे कुलगुरु प्रो. आलोक शर्मा के पास भेजा गया है। अब कुलगुरु के निर्णय के बाद प्रोफेसरों की पदोन्नति का रास्ता साफ होगा। चार साल से अटका प्रमोशन चार साल पहले पदोन्नति के लिए स्क्रूटनी कमेटी गठित की गई थी। इसमें

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Published On :

नवम्बर 8, 2026

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भोपाल
 राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) में 36 प्रोफेसरों की पदोन्नति की फाइल चार साल बाद कुलगुरु के पास पहुंच गई है। करियर एडवांसमेंट स्कीम (कैस) के तहत प्रोफेसरों को पदोन्नति देने की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद अब तक अंतिम आदेश जारी नहीं हो सका है।

विश्वविद्यालय में अधिकारियों के स्तर पर फाइल का परीक्षण करने के बाद इसे कुलगुरु प्रो. आलोक शर्मा के पास भेजा गया है। अब कुलगुरु के निर्णय के बाद प्रोफेसरों की पदोन्नति का रास्ता साफ होगा।

चार साल से अटका प्रमोशन
चार साल पहले पदोन्नति के लिए स्क्रूटनी कमेटी गठित की गई थी। इसमें तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक प्रशांत कुमार जैन, प्रो. सीमा सक्सेना, प्रो. असीम तिवारी, प्रो. एससी चौबे और डिप्टी रजिस्ट्रार आरके सहित अन्य अधिकारी शामिल थे। कमेटी ने प्रोफेसरों के दस्तावेजों की जांच की। इसके बाद दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया भी पूरी कराई गई।

आपत्तियों के कारण अटकी रही फाइल
पदोन्नति प्रक्रिया के दौरान तत्कालीन कुलपति और रजिस्ट्रार स्तर से प्रोफेसरों के मामलों में कई आपत्तियां दर्ज की गई थीं। बाद में तत्कालीन कुलपति राजीव त्रिपाठी ने इन आपत्तियों का निराकरण किया। हालांकि, कुलपति और रजिस्ट्रार के इस्तीफे के बाद पदोन्नति की फाइल आगे नहीं बढ़ सकी और मामला लंबित हो गया।

स्क्रूटनी कमेटी सदस्य ने दर्ज कराई आपत्ति
स्क्रूटनी कमेटी के सदस्य एससी चौबे ने आपत्ति दर्ज कराई कि उन्हें प्रोफेसरों के आवेदनों की जांच के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला। हालांकि, स्क्रूटनी समिति के प्रतिवेदन पर उनके हस्ताक्षर भी हैं।

विश्वविद्यालय स्तर पर इन आपत्तियों का परीक्षण किया गया। अधिकारियों ने आपत्तियों का निराकरण करने के बाद पदोन्नति की फाइल कुलगुरु को भेज दी है।

अब कुलगुरु स्तर से अंतिम निर्णय और आदेश जारी होना बाकी है। इसके बाद पात्र प्रोफेसरों को कैस के तहत पदोन्नति का लाभ मिल सकेगा।

 

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