213 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे से दिल्ली आना-जाना आसान, कारोबार को रफ्तार

निर्यातकों को समय पर शिपमेंट भेजने में मदद, ट्रांसपोर्टरों के ईंधन खर्च में प्रति ट्रिप 3,500 से 4,000 रुपये तक की बचत सहारनपुर दिल्ली से देहरादून तक का सफर अब पहले के मुकाबले कहीं आसान और तेज हो गया है। इस साल 14 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 213 किलोमीटर लंबे दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया। यह कॉरिडोर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उद्योग-व्यापार के लिए गेम चेंजर साबित हो रहा है। करीब 12 हजार करोड़ रुपये की लागत से बने इस सिक्स लेन एक्सेस कंट्रोल्ड कॉरिडोर ने छह से सात घंटे के सफर को घटाकर ढाई से तीन घंटे

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Published On :

अक्टूबर 23, 2026

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निर्यातकों को समय पर शिपमेंट भेजने में मदद, ट्रांसपोर्टरों के ईंधन खर्च में प्रति ट्रिप 3,500 से 4,000 रुपये तक की बचत

सहारनपुर
दिल्ली से देहरादून तक का सफर अब पहले के मुकाबले कहीं आसान और तेज हो गया है। इस साल 14 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 213 किलोमीटर लंबे दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया। यह कॉरिडोर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उद्योग-व्यापार के लिए गेम चेंजर साबित हो रहा है। करीब 12 हजार करोड़ रुपये की लागत से बने इस सिक्स लेन एक्सेस कंट्रोल्ड कॉरिडोर ने छह से सात घंटे के सफर को घटाकर ढाई से तीन घंटे तक कर दिया है। इससे उद्यमियों, निर्यातकों और ट्रांसपोर्टरों को समय बचाने के साथ कारोबार की रफ्तार बढ़ाने का अवसर मिला है।

इस कॉरिडोर की खास बात यह है कि इसका 135 किलोमीटर हिस्सा, यानी लगभग 64 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश से गुजरता है। अक्षरधाम से शुरू होकर यह लोनी, मंडोला, खेकड़ा, बड़ौत, शामली, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर होते हुए देहरादून तक पहुंचता है। सहारनपुर में इसका सबसे बड़ा स्ट्रेच करीब 45 किलोमीटर का है, जिससे जिले के कारोबारियों को खास लाभ मिलने की उम्मीद है। कॉरिडोर पर 100 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड लिमिट निर्धारित है। कठा, रसूलपुर खेड़ी, सैय्यद मजरा और गणेशपुर में चार प्रमुख टोल प्लाजा बनाए गए हैं। हर एंट्री-एग्जिट पर भी टोल लगता है, लेकिन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर होने के कारण सफर में रुकावट कम होती है।

सहारनपुर के लकड़ी उद्योग और कारोबार को मिला बाजार विस्तार
सहारनपुर लकड़ी की नक्काशी, फर्नीचर और हस्तशिल्प उद्योग के लिए देश-विदेश में पहचान रखता है। यहां तैयार होने वाले उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में परिवहन और माल ढुलाई की अहम भूमिका है। दिल्ली-देहरादून कॉरिडोर से बेहतर सड़क संपर्क मिलने के बाद दिल्ली-एनसीआर के व्यापारिक केंद्रों, निर्यात कारोबार से जुड़े प्रतिष्ठानों और दूसरे बाजारों तक पहुंच आसान हुई है। लकड़ी के फर्नीचर, सजावटी वस्तुओं और हस्तशिल्प उत्पादों के कारोबारियों को तेज आपूर्ति व्यवस्था का लाभ मिल रहा है। इससे समय पर माल पहुंचाने और ग्राहकों की जरूरतों के मुताबिक कारोबार करने की संभावनाएं बढ़ी हैं।

मुजफ्फरनगर के पेपर, स्टील और चीनी उद्योग को मिली राहत
मुजफ्फरनगर पश्चिमी उत्तर प्रदेश का प्रमुख औद्योगिक केंद्र है। यहां पेपर मिलों, स्टील एवं इंजीनियरिंग इकाइयों, चीनी मिलों और उनसे जुड़ी सहायक औद्योगिक गतिविधियों की अहम भूमिका है। इन उद्योगों को कच्चे माल की नियमित आपूर्ति और तैयार उत्पादों की समयबद्ध ढुलाई की जरूरत होती है। पेपर उद्योग के लिए तैयार उत्पादों की सुरक्षित और समय पर आपूर्ति महत्वपूर्ण है, जबकि स्टील एवं इंजीनियरिंग इकाइयों को भारी सामग्री के परिवहन की आवश्यकता होती है। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से औद्योगिक इकाइयों को आपूर्तिकर्ताओं, वितरकों और ग्राहकों के साथ बेहतर समन्वय बनाने में मदद मिली है। तेज सड़क संपर्क से माल की आवाजाही आसान हुई है, जिससे कारोबार से जुड़ी गतिविधियों को गति मिलने की संभावनाएं बढ़ी हैं।

शामली के कृषि आधारित उद्योगों को फायदा
शामली जिले की अर्थव्यवस्था में कृषि और उससे जुड़े कारोबार की महत्वपूर्ण भूमिका है। चीनी मिलों, कृषि उत्पादों के व्यापार, खाद्य प्रसंस्करण और अन्य स्थानीय औद्योगिक गतिविधियों के लिए बेहतर सड़क संपर्क उपयोगी साबित हो रहा है। कॉरिडोर की कनेक्टिविटी से कृषि उपज को प्रसंस्करण इकाइयों तक पहुंचाने और तैयार उत्पादों को दिल्ली-एनसीआर तथा उत्तराखंड के बाजारों तक ले जाने में सहूलियत मिली है। इससे कृषि आधारित कारोबार से जुड़े लोगों के लिए बाजार तक पहुंच आसान होने की संभावनाएं बढ़ी हैं।

निर्यातकों का कारोबार हुआ तेज, समय पर पहुंचने लगे शिपमेंट
बेहट क्षेत्र हैंडीक्राफ्ट, वुड कार्विंग और कृषि उपकरणों के निर्यात के लिए जाना जाता है। यहां के निर्यातकों को दिल्ली-देहरादून कॉरिडोर से कारोबार में तेजी आने की उम्मीद है। इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के बेहट कन्वीनर एवं इंडियन विलेज हैंडीक्राफ्ट के स्वामी हाजी रफीक अहमद बताते हैं कि पहले सहारनपुर से दिल्ली के आईसीडी तुगलकाबाद तक कंटेनर पहुंचने में आठ से दस घंटे लग जाते थे। एनएच-709बी पर जाम और सिंगल रोड के कारण कई बार शिपमेंट देर से पहुंचती थी, जिससे विदेशी खरीदार पेनाल्टी लगा देते थे।
हाजी रफीक अहमद के मुताबिक, अब वही ट्रक ढाई से तीन घंटे में दिल्ली पहुंच रहा है। इससे एक दिन पहले ही ऑर्डर डिस्पैच करना संभव हो पा रहा है। वहीं, एक अन्य निर्यातक फैजल इलाही का कहना है कि दिल्ली आना-जाना अब आसान हो गया है। पहले दिल्ली में किसी खरीदार के साथ मीटिंग करने में पूरा दिन लग जाता था। अब सुबह छह बजे निकलकर नौ बजे दिल्ली में मीटिंग की जा सकती है और दोपहर बाद फैक्ट्री वापस पहुंचा जा सकता है। इससे व्यापारिक फैसले तेजी से लेने और कारोबार से जुड़े काम कम समय में निपटाने में मदद मिल रही है।

ट्रांसपोर्ट सेक्टर को समय और ईंधन की बचत
दिल्ली-देहरादून कॉरिडोर से ट्रांसपोर्ट कारोबार में भी बदलाव आया है। सहारनपुर उद्योग बंधु कन्वीनर और ट्रांसपोर्ट व्यवसायी अनूप खन्ना बताते हैं कि पहले एक ट्रक दिल्ली से सहारनपुर आकर अगले दिन ही वापस जा पाता था। ड्राइवर का भत्ता और ओवरटाइम जोड़ने पर खर्च काफी बढ़ जाता था। अब एक ही ट्रक दिन में दिल्ली का आना-जाना कर रहा है। उनके अनुसार, टर्नअराउंड टाइम में करीब 50 प्रतिशत की कमी आई है। ट्रांसपोर्टर माजिद अली के मुताबिक, ईंधन की बचत इस कॉरिडोर का बड़ा फायदा है।

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