भारत में SIR से 11.83 करोड़ नाम हटे, ब्राजील में पड़े थे 11.18 करोड़ वोट; क्या कहते हैं आंकड़े?

नई दिल्ली भारत में मतदाता सूची के पुनरीक्षण अभियान यानी विशेष गहन संशोधन (SIR) को लेकर नया बहस खड़ा हो गया है। अब तक की इस पूरी प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से करीब 11.83 करोड़ नाम हटाए गए हैं। यह संख्या कितनी विशाल है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रतिशत में यह आंकड़ा 12.1 है। तुलनात्मक रूप से देखें तो 2022 के ब्राजील आम चुनाव में कुल 11.18 करोड़ वोट पड़े थे। वहीं दुनिया में भारत और चीन के अलावा केवल 14 देश ही ऐसे हैं जिनकी कुल आबादी ही 10 करोड़ से अधिक

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Published On :

सितम्बर 2, 2026

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नई दिल्ली

भारत में मतदाता सूची के पुनरीक्षण अभियान यानी विशेष गहन संशोधन (SIR) को लेकर नया बहस खड़ा हो गया है। अब तक की इस पूरी प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से करीब 11.83 करोड़ नाम हटाए गए हैं। यह संख्या कितनी विशाल है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रतिशत में यह आंकड़ा 12.1 है। तुलनात्मक रूप से देखें तो 2022 के ब्राजील आम चुनाव में कुल 11.18 करोड़ वोट पड़े थे। वहीं दुनिया में भारत और चीन के अलावा केवल 14 देश ही ऐसे हैं जिनकी कुल आबादी ही 10 करोड़ से अधिक है।

इतने बड़े पैमाने पर हटाए गए नाम ने देश में राजनीतिक चर्चा को गर्म कर दिया है। सरकार के आलोचकों का तर्क है कि इस प्रक्रिया के कारण लाखों वैध और वास्तविक मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटा दिए गए हैं। दूसरी ओर सरकार के समर्थकों का दावा है कि केवल मृत, किसी दूसरे जगह पर चले गए और फर्जी मतदाताओं को ही सूची से बाहर किया गया है। हालांकि, आंकड़े बताते हैं कि सच्चाई इन दोनों राजनीतिक दावों के बीच स्थित है।

बिहार, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुदुचेरी में संशोधन के बाद चुनाव हो चुके हैं। यहां एसआईआर के बाद अंतिम सूची में मतदाताओं की संख्या में 8.1% की गिरावट दर्ज की गई। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात जैसे 8 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। यहां पूर्व सूची की तुलना में 10.7% नाम कम हुए हैं। 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जहां अभी केवल ड्राफ्ट रोल जारी हुआ है वहां यह दर 17% तक देखी गई है। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि शुरुआत में नाम हटने की दर बहुत अधिक होती है, लेकिन दावे और आपत्तियां दर्ज होने के बाद अंतिम सूची में कई नाम वापस जुड़ जाते हैं।

क्या कहते हैं आंकड़े?
आपको बता दें कि 17 राज्यों में चुनाव एसआईआर का ड्राफ्ट चरण पूरा हो चुका है। यहां एसआईआर से पहले 36.09 करोड़ वोटर थे। ड्राफ्ट रोल के बाद 29.94 करोड़ बचे। यहां अभी फाइनल वोटर लिस्ट आना बाकी है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 8 ऐसे राज्य हैं जहां एसआईआर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन अभी तक कोई चुनाव नहीं हुआ है। ऐसे राज्यों में 34.01 करोड़ वोटर थे। ड्राफ्ट रोल में 29.25 करोड़ रह गए। फाइनल लिस्ट आने के बाद 30.36 करोड़ मतदाता बचे।

मताधिकार से वंचित हो रहे हैं लोग?
इतने बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के बावजूद अब तक के आंकड़े एक दिलचस्प पैटर्न दिखाते हैं। जिन राज्यों में संशोधन के बाद चुनाव हुए हैं, वहां कुल मतदान में बड़ी गिरावट दर्ज नहीं की गई है। इसके विपरीत मतदाता सूची में कुल नाम कम होने के कारण मतदान प्रतिशत में वृद्धि देखी गई है। इसका मतलब यह नहीं है कि गलतियां नहीं हुई हैं। जमीनी स्तर पर और कुछ विधानसभा क्षेत्रों में वास्तविक मतदान संख्या घटी है। कई जगहों पर कागजी औपचारिकताओं के भारी बोझ के कारण नागरिकों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। उदाहरण के लिए पश्चिम बंगाल में लगभग 27 लाख मतदाता सूची से हटाए जाने के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।

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