UP News: योगी सरकार का बड़ा एक्शन प्लान, सड़क हादसे रोकने के लिए ZFD मिशन तेज

उत्तर प्रदेश में सड़क हादसों पर रोक लगाने के लिए योगी सरकार ने जीरो फैटैलिटी डिस्ट्रिक्ट योजना को मिशन मोड में लागू करने के निर्देश दिए हैं। 59 जिलों में 228 क्रिटिकल कॉरिडोर टीमें काम कर रही हैं। जनवरी-अगस्त 2026 में हादसों में 6.97% और मृतकों में 8.03% की कमी दर्ज हुई।

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Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

सितम्बर 8, 2026

UP News: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सड़क दुर्घटनाओं और हादसों में होने वाली जनहानि को न्यूनतम करने के विजन के तहत उत्तर प्रदेश में जीरो फैटैलिटी डिस्ट्रिक्ट योजना को मिशन मोड में लागू करने की तैयारी तेज कर दी गई है। सरकार का फोकस केवल दुर्घटना के बाद कार्रवाई करने पर नहीं, बल्कि हादसों के मूल कारणों की पहचान कर उन्हें स्थायी रूप से खत्म करने पर है।

इसी क्रम में लखनऊ स्थित पुलिस मुख्यालय में जीरो फैटैलिटी डिस्ट्रिक्ट यानी ZFD योजना के तीसरे और चौथे चरण की क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों के प्रभारियों की एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें प्रदेश के 59 जिलों से 228 क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों के प्रभारी और ZFD नोडल अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

सड़क दुर्घटना रोकथाम पर डीजीपी राजीव कृष्ण का जोर

बताते चले कि, डीजीपी राजीव कृष्ण ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सड़क हादसों को महज संयोग मानकर कार्रवाई तक सीमित न रहें। हर दुर्घटना के पीछे छिपे वास्तविक कारणों की वैज्ञानिक तरीके से पहचान की जाए और फिर उन कारणों को दूर करने के लिए स्थायी समाधान लागू किया जाए।

उन्होंने कहा कि दुर्घटना संभावित स्थानों की पहचान के साथ वहां प्रभावी रोकथाम और प्रवर्तन कार्रवाई जरूरी है। सड़क सुरक्षा को लेकर काम करने वाली टीमों को अपने क्षेत्र की परिस्थितियों और दुर्घटनाओं के पैटर्न का अध्ययन कर ठोस रणनीति बनानी होगी।

ZFD योजना में 59 जिलों की 228 टीमें सक्रिय

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि, जीरो फैटैलिटी डिस्ट्रिक्ट योजना के तहत प्रदेश के 59 जिलों में 213 दुर्घटना बाहुल्य स्थानों को चिन्हित किया गया है। इन स्थानों पर 228 क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों का गठन किया गया है। इन टीमों की जिम्मेदारी दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में कारणों की पहचान करने से लेकर आवश्यक सुरक्षा और प्रवर्तन उपाय लागू कराने तक है।

डीजीपी ने स्पष्ट किया कि क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों की भूमिका सिर्फ दुर्घटना होने के बाद जांच या कार्रवाई तक सीमित नहीं है। सड़क दुर्घटना रोकथाम भी इन टीमों की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

दुर्घटना के बाद जांच के साथ रोकथाम भी जरूरी

डीजीपी राजीव कृष्ण ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रत्येक सड़क हादसे के बाद उसकी वजहों की समीक्षा की जाए। यह पता लगाया जाए कि सड़क, यातायात व्यवस्था, प्रवर्तन या किसी अन्य कमी के कारण दुर्घटना हुई और भविष्य में उसी स्थान पर ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।

उन्होंने संबंधित विभागों के साथ लगातार समन्वय बनाए रखने और चिन्हित कमियों को दूर कराने का फॉलोअप करने पर भी जोर दिया। जरूरी संसाधनों, सड़क सुरक्षा उपायों और प्रभावी प्रवर्तन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।

ZFD योजना से बची 1,107 लोगों की जान

जीरो फैटैलिटी डिस्ट्रिक्ट योजना के सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं। जनवरी से अगस्त 2026 के बीच ZFD के दायरे में आने वाले स्थानों पर पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में सड़क दुर्घटनाओं में 6.97 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। वहीं दुर्घटनाओं में मृतकों की संख्या 8.03 प्रतिशत और घायलों की संख्या 6.11 प्रतिशत कम हुई।

आंकड़ों के मुताबिक इस अवधि में 1,255 सड़क दुर्घटनाएं कम हुईं और 1,107 मानव जीवन बचाने में सफलता मिली। यानी औसतन हर दिन करीब सात सड़क हादसे कम हुए और लगभग पांच लोगों की जान बची।

‘जहां हादसे ज्यादा, वहां कार्रवाई ज्यादा’ का फॉर्मूला

ZFD योजना का आधार ‘जहां दुर्घटनाएं अधिक, वहां कार्रवाई अधिक’ का सिद्धांत है। इसके तहत वैज्ञानिक विश्लेषण के जरिए दुर्घटना बाहुल्य और संवेदनशील स्थानों की पहचान की जा रही है। ऐसे स्थानों पर लक्षित प्रवर्तन, सड़क अभियांत्रिकी में सुधार और जरूरी संसाधनों की उपलब्धता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

प्रशिक्षण और तकनीक से मजबूत होगी सड़क सुरक्षा

कार्यशाला में अधिकारियों और टीम प्रभारियों को सड़क सुरक्षा, मोटर वाहन अधिनियम, दुर्घटना जांच, ब्लैक स्पॉट की पहचान, प्रथम उपचार और CPR सहित विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया।

डीजीपी ने टीमों को तकनीकी और व्यावहारिक विशेषज्ञता विकसित करने, जरूरी प्रशिक्षण प्राप्त करने और उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी इस्तेमाल करने के निर्देश दिए। वहीं हादसों की रोकथाम में बेहतर काम करने वाली टीमों को सम्मानित भी किया गया।

योगी सरकार के इस अभियान का लक्ष्य साफ है—सड़क हादसों को किस्मत का खेल मानकर छोड़ने के बजाय उनके पीछे की वजह तलाशना और उसे खत्म करना। जीरो फैटैलिटी डिस्ट्रिक्ट योजना इसी सोच के साथ उत्तर प्रदेश में सड़क सुरक्षा को नई दिशा देने की कोशिश है।