Yogi Govt Strict Action: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार राज्य को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के अपने लक्ष्य की ओर लगातार सख्त कदम उठा रही है। इसी क्रम में सरकार ने सरकारी कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने के लिए बड़ी कार्रवाई की है। राज्य सरकार द्वारा मांगे गए चल-अचल संपत्ति के विवरण को समय पर जमा न करने वाले करीब 68 हजार कर्मचारियों की सैलरी रोक दी गई है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक संपत्ति का पूरा ब्यौरा नहीं दिया जाएगा, तब तक वेतन जारी नहीं होगा।
संपत्ति विवरण न देने पर सख्त कार्रवाई
राज्य सरकार ने सभी कर्मचारियों को निर्देश दिया था कि वे अपनी चल-अचल संपत्ति का विवरण निर्धारित समयसीमा के भीतर अपलोड करें। हालांकि, बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने इस आदेश की अनदेखी की। सरकार के अनुसार, कुल 68,236 कर्मचारियों ने अंतिम तारीख तक अपना संपत्ति विवरण नहीं दिया, जिसके चलते उनके खिलाफ यह कठोर कदम उठाया गया है। माना जा रहा है कि सैलरी रुकने के बाद कर्मचारी जल्द ही नियमों का पालन करेंगे।
आचरण नियमावली के तहत अनिवार्य था विवरण
सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली, 1956 के नियम-24 के अंतर्गत प्रदेश के कुल 8,66,261 कर्मचारियों को वर्ष 2025 तक की अपनी चल-अचल संपत्ति का विवरण 31 जनवरी तक मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य था। इस संबंध में सभी विभागों के नोडल अधिकारी और आहरण-वितरण अधिकारियों को पहले ही स्पष्ट निर्देश जारी किए गए थे। साथ ही चेतावनी दी गई थी कि समयसीमा का पालन न करने वालों की सैलरी रोक दी जाएगी।
तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की संख्या अधिक
सरकार के आंकड़ों के अनुसार, संपत्ति का विवरण न देने वालों में सबसे अधिक संख्या तृतीय श्रेणी कर्मचारियों की है। ऐसे कर्मचारियों की संख्या 34,926 बताई गई है। इसके अलावा 22,624 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, 7,204 द्वितीय श्रेणी और 2,628 प्रथम श्रेणी अधिकारी भी शामिल हैं। वहीं अन्य श्रेणी के 1,612 कार्मिकों में से 854 ने भी संपत्ति का ब्यौरा नहीं दिया है।
कई अहम विभागों के कर्मचारी शामिल
जिन कर्मचारियों ने संपत्ति का विवरण जमा नहीं किया है, उनमें कई महत्वपूर्ण विभागों के कर्मचारी शामिल हैं। इनमें लोक निर्माण विभाग, राजस्व, बेसिक और माध्यमिक शिक्षा, समाज कल्याण, महिला कल्याण, सहकारिता, आबकारी, खाद्य एवं रसद, चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण अभियंत्रण, उद्यान, पशुधन और परिवहन विभाग प्रमुख हैं। कुल मिलाकर लगभग आठ प्रतिशत कर्मचारियों ने तय समय तक जानकारी नहीं दी।
फरवरी में नहीं मिलेगी जनवरी की सैलरी
सरकार ने साफ कर दिया है कि जिन कर्मचारियों ने संपत्ति का ब्यौरा नहीं दिया है, उन्हें जनवरी माह का वेतन फरवरी में नहीं मिलेगा। यह निर्णय सरकार की सख्ती को दर्शाता है। मुख्य सचिव एसपी गोयल की ओर से पहले ही विभागाध्यक्षों और कार्यालय प्रमुखों को निर्देश दिए गए थे कि सभी कर्मचारी 31 जनवरी तक विवरण अपलोड करें।
जीरो टॉलरेंस नीति पर कायम सरकार
योगी सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति पर काम कर रही है। इसी नीति के तहत सरकारी कर्मचारियों की संपत्ति का पूरा ब्यौरा जुटाने को सरकार बेहद गंभीर है। सरकार का मानना है कि पारदर्शिता और जवाबदेही से ही प्रशासन को ईमानदार और मजबूत बनाया जा सकता है, और यह कदम उसी दिशा में एक बड़ा प्रयास है।










