UP Politics: सीएम योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव के बीच अयोध्या विधानसभा सीट को लेकर जुबानी जंग तेज हो गई है। बलरामपुर में सीएम योगी ने अखिलेश यादव को आमने-सामने चुनाव लड़ने की चुनौती दी, तो सपा प्रमुख ने ‘PDA प्रहरी’ का जिक्र करते हुए पलटवार किया। इस सियासी टकराव के बीच दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर तीखे आरोप लगाए।
सीएम योगी ने अखिलेश यादव को दिया खुला ऑफर
बताते चले कि, उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सियासी बयानबाजी तेज होती दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बलरामपुर में एक कार्यक्रम के दौरान समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती दी। सीएम योगी ने कहा कि अखिलेश भी अयोध्या से नामांकन करें और वह खुद भी वहां से चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि मुकाबला आमने-सामने होना चाहिए, ताकि जनता का फैसला साफ हो सके।

आपको बता दे कि, मुख्यमंत्री बलरामपुर में 803 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली 78 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करने पहुंचे थे। इसी दौरान उन्होंने अखिलेश यादव के बयान का जवाब देते हुए अयोध्या को आस्था का केंद्र बताया। योगी ने कहा कि वह अयोध्या में राजनीति करने नहीं, बल्कि विकास कार्यों की निगरानी करने जाते हैं, ताकि वहां विकास में कोई कमी न रह जाए।
अयोध्या के विकास और पिछली सरकार पर सियासी वार
सीएम योगी ने अयोध्या की मौजूदा स्थिति की तुलना समाजवादी पार्टी की पिछली सरकार के कार्यकाल से की। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय अयोध्या में बिजली की आपूर्ति सीमित थी और शहर में गंदगी की समस्या थी। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि अब अयोध्या विकास के नए उदाहरण पेश कर रही है और उसकी पहचान में बड़ा बदलाव आया है।
सीएम योगी ने सपा पर माफिया के सामने झुकने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक लड़ाई सीधे होनी चाहिए, समर्थकों के जरिए नहीं। मुख्यमंत्री के इन बयानों को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच बढ़ती राजनीतिक खींचतान के तौर पर देखा जा रहा है।
अखिलेश यादव ने किया पलटवार
सीएम योगी की चुनौती के बाद अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए जवाब दिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के अहंकार को खत्म करने के लिए समाजवादी पार्टी के एक युवा ‘PDA प्रहरी’ की ताकत ही काफी होगी। अखिलेश ने अपने बयान में चढ़ावा, चंदा और दान से जुड़े कथित भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया और भाजपा पर निशाना साधा।

सपा प्रमुख ने यह भी कहा कि जनता इस बार घमंड का जवाब देगी। उन्होंने अपनी पोस्ट में अयोध्या की महिलाओं का जिक्र करते हुए भाजपा पर लोगों की भावनाओं का सम्मान नहीं करने का आरोप लगाया। अखिलेश के इस पलटवार ने अयोध्या सीट को लेकर चल रही बयानबाजी को और तेज कर दिया है।
अखिलेश का दावा: अयोध्या से चुनाव लड़ने को तैयार नहीं भाजपा के नेता
अखिलेश यादव ने अपने बयान में दावा किया कि भाजपा के आंतरिक सर्वे में अयोध्या सीट को लेकर ऐसी स्थिति सामने आई है, जहां पार्टी की तरफ से कोई चुनाव नहीं लड़ना चाहता। हालांकि, यह अखिलेश का राजनीतिक दावा है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं है। अखिलेश ने धार्मिक स्थलों और उनसे जुड़े मुद्दों को लेकर भी भाजपा पर तंज कसा। दोनों नेताओं के बयानों से साफ है कि अयोध्या अब केवल धार्मिक आस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में भी अहम स्थान रखती है।
सीएम योगी ने जिले में हुए बदलाव का किया जिक्र
बलरामपुर में विकास परियोजनाओं के कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिले में हुए बदलावों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पहले यहां की पहचान तस्करी और अव्यवस्थाओं से जुड़ी थी, लेकिन अब जनता का एक वोट विकास और तरक्की का आधार बन रहा है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, सही फैसलों से किसी आकांक्षी जिले को संभावनाओं वाले जिले में बदला जा सकता है।
यूपी की पिछली सरकारों पर योगी का हमला
मुख्यमंत्री ने 2017 से पहले की सरकारों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उस समय बलरामपुर की सड़कें खराब थी और अराजकता का माहौल था। उन्होंने दावा किया कि माफिया जमीनों पर कब्जा करते थे और व्यापारियों को धमकाया जाता था। सीएम योगी ने कहा कि उनकी सरकार में विकास और कानून-व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है। हालांकि, पिछली सरकारों को लेकर लगाए गए ये आरोप मुख्यमंत्री के राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं।
कुल मिलाकर, अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती और ‘PDA प्रहरी’ वाले पलटवार ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में भाजपा और समाजवादी पार्टी इस मुद्दे को किस तरह आगे बढ़ाती हैं।










