UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस समय हलचल काफी तेज है. सीएम योगी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) के सरसंघचालक मोहन भागवत की मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं जोर-शोर से चल रही है.दोनों की मुलाकात को अधिकारिक तौर पर संघ के शताब्दी वर्ष की तैयारी बताया जा रहा है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस मुलाकात को 2027 के विधानसभा चुनाव की रणनीतिक घेराबंदी माना जा रहा है.
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हिंदुत्व के एजेंडे से विपक्ष के ‘PDA’ कार्ड की काट
आपको बता दे कि, दोनों की बैठक का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बिंदु हिंदुत्व के वैचारिक आधार को और अधिक धार देना था। सूत्रों के अनुसार, समाजवादी पार्टी और विपक्ष के ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) गठबंधन के जवाब में संघ और सरकार मिलकर ‘एकजुट हिंदू’ का बड़ा संदेश देने की तैयारी में हैं। इस चर्चा में विपक्ष की जातिगत राजनीति को नाकाम करने के लिए विकास और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के मिश्रण पर विचार किया गया, ताकि 2027 के चुनावी रोडमैप को अभी से अमली जामा पहनाया जा सके।
ग्राउंड लेवल पर संगठन विस्तार
उत्तर प्रदेश में बीजेपी की स्थिति को जमीनी स्तर पर अभेद्य बनाने के लिए संघ के लगभग 2 लाख समर्पित कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की योजना है। ये कार्यकर्ता केवल वैचारिक प्रचार नहीं करेंगे, बल्कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों (बेनिफिशियरी) तक सीधे पहुंचेंगे। मुख्यमंत्री योगी द्वारा अक्सर उल्लिखित काशी, अयोध्या और मथुरा के विजन को संघ के ‘हम सब हिंदू हैं’ वाले सामाजिक समरसता अभियान के साथ जोड़कर जातिगत बाधाओं को तोड़ने की तैयारी है।
अवैध घुसपैठ और ‘घर वापसी’ पर साझा कड़ा रुख
मुलाकात के दौरान केवल चुनावी समीकरण ही नहीं, बल्कि सुरक्षा और सामाजिक ढांचे पर भी गंभीर चर्चा हुई। अवैध घुसपैठियों, विशेषकर बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई पर दोनों नेताओं ने एक सुर में सहमति जताई। इसके साथ ही ‘घर वापसी’ और सामाजिक समरसता जैसे विषयों को प्राथमिकता दी गई।मोहन भागवत का स्पष्ट मानना है कि एक जागरूक और समरस समाज ही राजनीतिक विकृतियों का अंत कर सकता है, जो योगी आदित्यनाथ के कानून-व्यवस्था मॉडल को नैतिक समर्थन प्रदान करता है।
‘डबल इंजन’ की तीसरी बार वापसी का संकल्प
भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए मोहन भागवत ने सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल और सामाजिक प्रभाव की जिम्मेदारी (SIR) पर जोर दिया है। संघ की सोशल इंजीनियरिंग के जरिए मुख्यमंत्री योगी के हिंदुत्व कार्ड को हर वर्ग तक पहुंचाया जाएगा। इस गहन मंथन का अंतिम लक्ष्य आपसी समन्वय को इस स्तर पर ले जाना है, जिससे उत्तर प्रदेश में लगातार तीसरी बार ‘डबल इंजन’ सरकार की सत्ता में वापसी सुनिश्चित की जा सके।









