
UP News: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश अब माफिया राज से बाहर निकलकर कानून के शासन की ओर बढ़ चुका है। साल 2017 से पहले प्रदेश में कानून-व्यवस्था और निवेश को लेकर लोगों के मन में संदेह रहता था। माफिया के कारण विकास के काम प्रभावित होते थे, लेकिन सरकार ने कानून का शासन स्थापित कर प्रदेश की छवि बदली है। उन्होंने युवा वकीलों से कहा कि जब सामने अन्याय हो तो चुप रहना कोई विकल्प नहीं है। इतिहास अपना फैसला सुनाएगा, लेकिन बहस करने की जिम्मेदारी अधिवक्ताओं की है।
लोहिया विधि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में पहुंचे सीएम योगी

बताते चले कि, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के पांचवें दीक्षांत समारोह में शामिल हुए। उन्होंने मां सरस्वती के सामने दीप जलाकर कार्यक्रम की शुरुआत की। इस दौरान छात्राओं ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। मुख्यमंत्री ने पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पदक देकर सम्मानित किया। उन्होंने युवाओं से संविधान और कानून के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने की अपील की।
आपातकाल का जिक्र कर कानून के शासन पर दिया जोर
इसी कड़ी में आगे, सीएम योगी ने कहा कि 15 अगस्त 1947 और 26 जनवरी 1950 की तरह 25 जून 1975 भी देश के लोकतांत्रिक इतिहास की अहम तारीख है। आपातकाल ने बताया कि कानून का शासन और शासक का शासन अलग-अलग होते हैं। उन्होंने न्यायमूर्ति एचआर खन्ना के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि सिद्धांतों के लिए लिया गया फैसला इतिहास में जगह बनाता है। युवा वकीलों को संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को संदेश दिया कि ‘सत्यं वद, धर्मं चर, स्वाध्यायान्मा प्रमदः’ यानी सत्य बोलें, धर्म के रास्ते पर चलें और पढ़ाई से कभी पीछे न हटें। उन्होंने कहा कि इन सिद्धांतों को केवल चैंबर की दीवारों तक सीमित न रखें, बल्कि अपने जीवन में अपनाएं।
विकसित भारत के लक्ष्य में युवा वकीलों की अहम भूमिका
योगी आदित्यनाथ ने विकसित भारत के लक्ष्य का जिक्र करते हुए कहा कि वर्ष 2047 तक देश को विकसित बनाने के संकल्प में युवा अधिवक्ताओं की बड़ी भूमिका होगी। इस लक्ष्य को तथ्यों, सबूतों और ईमानदारी के साथ आगे बढ़ाना होगा। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश को वर्ष 2029-30 तक एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए कार्ययोजना तैयार है।
एआई का इस्तेमाल करें, लेकिन अपने विवेक से लें फैसला
मुख्यमंत्री ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते इस्तेमाल पर कहा कि तकनीक काम आसान कर सकती है, लेकिन उसे अपना सारथी नहीं बनाना चाहिए। अंतिम फैसला इंसान के विवेक से ही होना चाहिए। उन्होंने आगाह किया कि लापरवाही से तैयार कानूनी दस्तावेज किसी निर्दोष की आजादी पर असर डाल सकते हैं।
उन्होंने बताया कि प्रदेश के सभी 75 जिलों में साइबर थाने हैं और 1,583 थानों में साइबर हेल्प डेस्क बनाई गई हैं। ‘एआई प्रज्ञा’ कार्यक्रम के तहत 10 लाख युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने युवा वकीलों से गांवों में जमीन और पारिवारिक विवाद सुलझाने में भी योगदान देने की अपील की।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ बोले- दूसरों की जिंदगी में बदलाव ही असली सफलता
सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने कहा कि डिग्री मिलना मंजिल नहीं, बल्कि नई यात्रा की शुरुआत है। शिक्षा की असली परीक्षा विश्वविद्यालय से बाहर शुरू होती है। किसी व्यक्ति की सफलता इस बात से तय होती है कि वह दूसरों के जीवन में कितना सकारात्मक बदलाव लाता है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली ने भी विद्यार्थियों से कानून के शासन को मजबूत करने और संस्थान की अच्छी परंपराओं को आगे बढ़ाने की अपील की।
20 साल में 250 से ज्यादा न्यायिक अधिकारी तैयार
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अमर पाल सिंह ने बताया कि संस्थान ने पिछले 20 वर्षों में उत्तर प्रदेश समेत दूसरे राज्यों को 250 से अधिक न्यायिक अधिकारी दिए हैं। उन्होंने कहा कि विधि शिक्षा का उद्देश्य केवल करियर बनाना नहीं, बल्कि समाज के कमजोर और वंचित वर्गों की मदद करना भी है।
रुपाली जायसवाल और तेजस्वनी कौशल को मिला गोल्ड मेडल
दीक्षांत समारोह में एलएलएम की छात्रा रुपाली जायसवाल को स्वर्ण, चित्रा सिंह को रजत और सौम्या गिरी को कांस्य पदक मिला। एलएलबी ऑनर्स में तेजस्वनी कौशल ने स्वर्ण, ईशा अग्रवाल ने रजत और निशा वर्मा ने कांस्य पदक हासिल किया।
ईशा अग्रवाल को क्रिमिनल लॉ, कॉन्स्टिट्यूशनल लॉ और स्टूडेंट ऑफ द ईयर के लिए भी सम्मानित किया गया। तान्या वर्मा को टैक्सेशन और मालविका पचौरी को सर्वश्रेष्ठ मूटिंग के लिए स्वर्ण पदक मिला। डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में साइबर लॉ के भास्कर पांडे, जयंत अग्रवाल और चिराग निगम को क्रमशः स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक दिए गए। बौद्धिक संपदा अधिकार और मीडिया लॉ के मेधावी विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया गया।











