Women Reservation Bill: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की पत्नी, डॉ. गुरप्रीत कौर ने केंद्र सरकार द्वारा लाए गए महिला आरक्षण बिल का पुरजोर समर्थन किया है। उन्होंने इसे महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम बताते हुए कहा कि यह कानून देश की राजनीति में महिलाओं की कमी को पूरा करेगा और उन्हें समाज के मुख्यधारा के निर्णयों में बराबर की हिस्सेदारी दिलाएगा।
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“जहाँ पुरुष ज्यादा होते हैं, वहां महिलाओं की कम सुनी जाती है”
डॉ. गुरप्रीत कौर ने महिला आरक्षण पर अपने विचार साझा करते हुए एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहलू की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा, “प्रायः यह देखा गया है कि जिस भी क्षेत्र में पुरुषों की संख्या अधिक होती है, वहां महिलाओं की आवाज दब जाती है या उनकी बात कम सुनी जाती है।” उनका मानना है कि इस बिल के लागू होने से राजनीति में एक संतुलन (Balance) पैदा होगा। जब सदन में महिलाओं की संख्या बढ़ेगी, तो न केवल उनकी बात सुनी जाएगी, बल्कि महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर अधिक संवेदनशीलता के साथ निर्णय लिए जा सकेंगे। उन्होंने कहा कि महिलाएं आज हर क्षेत्र में कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं, और अब राजनीति में भी उनका प्रतिनिधित्व बढ़ने से एक सकारात्मक माहौल बनेगा।
पंजाब में महिलाओं की बढ़ती सक्रियता और ‘आप’ का मॉडल
पंजाब की जमीनी राजनीति का जिक्र करते हुए डॉ. कौर ने कहा कि उन्होंने पूरे प्रदेश का दौरा किया है और देखा है कि महिलाएं अब घर की चारदीवारी से निकलकर राजनीति में सक्रिय हो रही हैं।
स्थानीय निकाय: पंजाब में महिलाएं अब केवल नाम के लिए नहीं, बल्कि असल में सरपंच, कॉर्पोरेशन सदस्य और मेयर बनकर जिम्मेदारी संभाल रही हैं।
आम आदमी पार्टी का योगदान: उन्होंने गर्व के साथ बताया कि आम आदमी पार्टी (AAP) ने हमेशा महिलाओं को प्राथमिकता दी है। पिछले विधानसभा चुनावों में पार्टी ने 11 महिलाओं को टिकट दिया था और वे सभी जीत दर्ज कर विधानसभा पहुंचीं। यह इस बात का प्रमाण है कि जनता भी अब महिला नेतृत्व को स्वीकार कर रही है।
चुनाव लड़ने पर क्या बोलीं डॉ. गुरप्रीत कौर?
जब पत्रकारों ने उनसे उनकी भविष्य की राजनीतिक योजनाओं और चुनाव लड़ने की संभावना पर सवाल किया, तो उन्होंने बहुत ही शालीनता से उत्तर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका मुख्य उद्देश्य ‘सेवा’ करना है। उन्होंने कहा, “मेरा काम पार्टी का प्रचार करना और लोगों की सेवा करना है। पार्टी मुझे जहाँ भी और जो भी जिम्मेदारी देगी, मैं उसे पूरी निष्ठा के साथ निभाऊंगी।”
परिसीमन और जनगणना पर ‘आप’ का विरोध
हालाँकि डॉ. गुरप्रीत कौर ने बिल के मूल उद्देश्य का समर्थन किया, लेकिन उनकी पार्टी (आम आदमी पार्टी) ने इस बिल को लागू करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। आप सांसद संजय सिंह ने बिल के साथ जुड़ी ‘परिसीमन’ (Delimitation) और ‘जनगणना’ की शर्तों को एक “गहरी साजिश” करार दिया है।
पार्टी का तर्क है कि बिना तत्काल जनगणना के सीटों का आरक्षण करना केवल एक चुनावी वादा बनकर रह सकता है। परिसीमन के कारण राज्यों के अधिकारों और उनकी जनसंख्या के संतुलन पर असर पड़ सकता है, जिसे ‘आप’ राज्यों के साथ धोखा मानती है।
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