Women Reservation Bill: संसद के विशेष सत्र के आगाज के साथ ही महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक को लेकर देश की सियासत पूरी तरह गर्मा गई है। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित महिला आरक्षण संबंधी संविधान संशोधन विधेयक पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने इस बिल को महिलाओं के हित में नहीं, बल्कि पिछड़ों और दलितों के खिलाफ एक ‘साजिश’ करार दिया है।
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अखिलेश के गंभीर आरोप
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए बीजेपी सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने इस विधेयक को ‘धोखे का काला दस्तावेज’ बताते हुए कहा कि यह दरअसल ‘खुफिया लोगों की एक गुप्त योजना’ है।
सपा प्रमुख के विरोध के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं
अखिलेश यादव का तर्क है कि इस बिल के जरिए पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक (PDA) समाज की महिलाओं को शक्तिहीन करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने इसे एक ऐसा ‘चक्रव्यूह’ बताया जो वंचित वर्ग की महिलाओं को वास्तविक जन प्रतिनिधित्व से दूर रखेगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह बिल बीजेपी की उस ‘शोषणकारी और दमनकारी सामंती सोच’ से उपजा है, जो वर्चस्व खोने के डर से हताश है। उनके अनुसार, यह महिला सशक्तिकरण के नाम पर केवल एक ‘जनविरोधी जुमला’ है।
बीजेपी की ‘एक्सपायरी डेट’ और कुटिल राजनीति
अखिलेश यादव ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि बीजेपी शासन अपनी ‘एक्सपायरी डेट’ के आखिरी दौर में है। उन्होंने दावा किया कि जैसे-जैसे जनता के बीच बीजेपी का विरोध बढ़ेगा, सरकार ऐसे और भी कई लोकलुभावन लेकिन खोखले बिल लेकर आएगी।
उन्होंने कहा कि बीजेपी की ‘कुटिल राजनीति’ अब बेनकाब हो रही है। जागरूक महिलाएं अब इनके छलावे में नहीं आएंगी। अखिलेश के अनुसार, इन विधेयकों का मूल उद्देश्य विपक्ष की बढ़ती एकजुटता को तोड़ना और किसी भी तरह सत्ता पर कब्जा बनाए रखना है।
सपा सांसदों ने उठाए ‘नीयत’ और ‘जल्दबाजी’ पर सवाल
अखिलेश यादव के साथ-साथ समाजवादी पार्टी के अन्य दिग्गज नेताओं ने भी इस विधेयक के समय (Timing) पर सवाल उठाए हैं—
वीरेंद्र सिंह (सांसद): उन्होंने कहा कि यदि बिल की नीयत साफ है तो कोई समस्या नहीं है, लेकिन अगर महिला आरक्षण की आड़ में अन्य विवादित बिल (जैसे परिसीमन) को पिछले दरवाजे से लागू करने की कोशिश की गई, तो सदन में जोरदार बहस और विरोध होना तय है।
बाबू सिंह कुशवाहा (सांसद): उन्होंने इस प्रक्रिया की ‘जल्दबाजी’ पर उंगली उठाई। उन्होंने तर्क दिया कि इसे 2021 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर व्यवस्थित तरीके से किया जाना चाहिए था, लेकिन सरकार बिना ठोस तैयारी के इसे राजनीतिक लाभ के लिए थोप रही है।









