Women Reservation Bill: महिला आरक्षण से जुड़े मुद्दे पर देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। प्रधानमंत्री के हालिया संबोधन में विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), पर निशाना साधे जाने के बाद अब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कड़ा जवाब दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र सरकार के रुख की आलोचना की और इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
“देश को गुमराह करने की कोशिश”
ममता बनर्जी ने अपने बयान में कहा कि यह बेहद निराशाजनक है कि प्रधानमंत्री ने इस महत्वपूर्ण मुद्दे का समाधान निकालने के बजाय देश की जनता को भ्रमित करने का रास्ता चुना। उनके मुताबिक, महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील विषय पर राजनीति करने के बजाय सभी दलों को मिलकर समाधान निकालना चाहिए था।
टीएमसी का महिला प्रतिनिधित्व पर जोर
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस हमेशा से महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की समर्थक रही है। उन्होंने आंकड़ों के जरिए यह बताने की कोशिश की कि उनकी पार्टी में महिलाओं को कितना महत्व दिया जाता है। उन्होंने कहा कि लोकसभा में टीएमसी के करीब 37.9 प्रतिशत सांसद महिलाएं हैं, जबकि राज्यसभा में पार्टी ने लगभग 46 प्रतिशत महिलाओं को प्रतिनिधित्व दिया है। इसके अलावा, पश्चिम बंगाल विधानसभा में भी महिला विधायकों की संख्या अन्य दलों के मुकाबले अधिक है। ममता बनर्जी ने दो टूक कहा कि उनकी पार्टी ने कभी भी महिला आरक्षण का विरोध नहीं किया है और भविष्य में भी इसका समर्थन जारी रहेगा।
परिसीमन प्रक्रिया पर उठाए सवाल
हालांकि, ममता बनर्जी ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका विरोध महिला आरक्षण से नहीं, बल्कि परिसीमन प्रक्रिया से है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार इस प्रक्रिया का इस्तेमाल अपने राजनीतिक हित साधने के लिए कर रही है। उनके अनुसार, सरकार महिलाओं के मुद्दे को आगे रखकर असल में राजनीतिक सीमाओं में बदलाव करना चाहती है, जिससे कुछ राज्यों को फायदा पहुंचे और अन्य राज्यों को नुकसान उठाना पड़े।
संघीय ढांचे पर खतरे का आरोप
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि इस तरह की कोशिशें देश के संघीय ढांचे के लिए खतरा हैं। उन्होंने कहा कि संविधान में बदलाव और राज्यों के बीच संतुलन बिगाड़ने की कोई भी कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने बाबा साहेब अंबेडकर के संविधान का जिक्र करते हुए कहा कि उसमें किसी भी तरह का छेड़छाड़ देश के लोकतंत्र को कमजोर कर सकता है।
विपक्ष का कड़ा रुख
ममता बनर्जी के इस बयान से साफ है कि विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार के खिलाफ एकजुट होने की कोशिश कर रहा है। महिला आरक्षण के समर्थन के साथ-साथ विपक्ष परिसीमन जैसे मुद्दों पर भी सरकार को घेर रहा है।









