Women Reservation Bill 2026 : महिला आरक्षण संशोधन को केंद्र की मंजूरी, लोकसभा में 273 सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन को मंजूरी मिली। इसके तहत लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 816 होंगी, जिनमें 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगी।

Women Reservation Bill 2026

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अप्रैल 9, 2026

Women Reservation Bill 2026 : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन के ड्राफ्ट बिल को मंजूरी दे दी गई। इस संशोधन के अनुसार, लोकसभा की सीटें मौजूदा 543 से बढ़ाकर 816 कर दी जाएंगी, जिनमें 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। सरकार ने बजट सत्र बढ़ाकर 16 से 18 अप्रैल तक संसद का विशेष सत्र बुलाया है, जिसमें इस बिल के पारित होने की संभावना है।

मंजू जायसवाल का अनोखा तरीका: चित्रों के जरिए गणित सिखाकर जबलपुर में बच्चों का 95% रिजल्ट

नए आरक्षण का लागू होना

संसद से मंजूरी मिलने के बाद यह कानून 31 मार्च 2029 से लागू होगा। यह पहली बार 2029 के लोकसभा चुनाव और कुछ राज्यों के विधानसभा चुनाव में प्रभावी होगा। आरक्षण ‘वर्टिकल’ आधार पर लागू होगा, यानी अनुसूचित जाति और जनजाति की आरक्षित सीटों में भी महिलाओं के लिए हिस्सेदारी सुनिश्चित की जाएगी।

परिसीमन कानून में भी होगा संशोधन

राज्यों की विधानसभाओं में भी इसी अनुपात में महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित होंगी। सरकार परिसीमन कानून में संशोधन के लिए अलग साधारण बिल भी लाएगी ताकि नए सिरे से सीटों का निर्धारण किया जा सके। नई सीटों का निर्धारण 2027 की जनगणना के बजाय 2011 की जनगणना के आधार पर किया जा सकता है। यह कानून राज्यों की विधानसभाओं और केंद्र शासित प्रदेशों जैसे दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी में भी लागू होगा।

राज्यवार महिला सीटों का विवरण

महिला आरक्षण लागू होने के बाद उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 40 सीटें बढ़ेंगी। वर्तमान में 80 सीटों वाली यूपी में अब यह संख्या 120 तक पहुंच जाएगी। महाराष्ट्र में महिलाओं के लिए 24 सीटें आरक्षित होंगी, जबकि कुल सीटें 48 से बढ़कर 72 होंगी। बिहार में महिला सीटों की संख्या 20 तक हो सकती है, कुल सीटें 40 से बढ़कर 60 हो जाएंगी। मध्य प्रदेश में 15, तमिलनाडु में 20, दिल्ली में 4 और झारखंड में 7 महिला आरक्षित सीटें बढ़ने का अनुमान है।

महिला आरक्षण का ऐतिहासिक संदर्भ

महिला आरक्षण का मुद्दा भारत में 1931 में पहली बार उठा, जब बेगम शाह नवाज और सरोजिनी नायडू ने समान राजनीतिक स्थिति की मांग की थी। 1971 में महिलाओं की स्थिति पर समिति बनी, जिसमें विधायी निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण पर विरोध हुआ। 1974 में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के लिए शिक्षा और समाज कल्याण मंत्रालय को रिपोर्ट सौंपी गई।

1988 में राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना (National Perspective Plan) ने पंचायत स्तर से संसद तक महिलाओं के लिए आरक्षण की सिफारिश की। इसके बाद 1993 में 73वें और 74वें संविधान संशोधनों के तहत पंचायतों और नगर निकायों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित की गईं। कई राज्यों जैसे महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड और केरल ने स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए 50% आरक्षण भी लागू किया।

एमपी के इस बड़े शहर को लेकर हाईकोर्ट की चेतावनी: पहाड़ियां बचाना जरूरी, नहीं तो बनेगा रेगिस्तान