WHO Warning : WHO ने भारत को दी चेतावनी, एल नीनो से बढ़ सकते हैं स्वास्थ्य जोखिम

WHO की नई रिपोर्ट ने भारत समेत प्रभावित क्षेत्रों में अल नीनो से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों को लेकर चिंता बढ़ाई है। बदलते तापमान, बारिश के पैटर्न, गर्मी, जलजनित और मच्छरजनित बीमारियों से जोखिम बढ़ सकता है। आखिर भारत में कौन-कौन से स्वास्थ्य खतरे बढ़ सकते हैं और किन लोगों को सबसे ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है?

WHO Warning

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

सितम्बर 10, 2026

WHO Warning : विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की एल नीनो 2026 को लेकर जारी ग्लोबल पब्लिक हेल्थ सिचुएशन एनालिसिस में भारत को संभावित स्वास्थ्य जोखिम वाले देशों में शामिल किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त से अक्टूबर के बीच दक्षिण एशिया के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश और औसत से अधिक तापमान देखने को मिल सकता है। ऐसे मौसम का असर गर्मी से होने वाली बीमारियों के साथ-साथ संक्रामक और मच्छर जनित रोगों पर भी पड़ सकता है।

एल नीनो बदल सकता है मौसम का सामान्य चक्र

एल नीनो प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय हिस्से में समुद्र की सतह के तापमान में असामान्य बढ़ोतरी से जुड़ी जलवायु घटना है। इसका प्रभाव सिर्फ प्रशांत महासागर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि दुनिया के कई क्षेत्रों में बारिश और तापमान के स्वरूप को प्रभावित करता है। दक्षिण एशिया में मौसम में बदलाव से स्वास्थ्य के अलावा खेती और जल उपलब्धता पर भी असर पड़ सकता है।

दिल्ली में डेंगू के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
दिल्ली में डेंगू के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

दिल्ली में डेंगू के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

WHO की चेतावनी ऐसे समय आई है जब राजधानी दिल्ली में मच्छर जनित बीमारियों के मामले बढ़ते नजर आ रहे हैं। अगस्त में दिल्ली में डेंगू के 90 नए मामले सामने आए, जो इस साल किसी एक महीने में सबसे अधिक बताए गए हैं। 29 अगस्त तक राजधानी में डेंगू के कुल मामले बढ़कर 311 हो चुके थे। बदलते तापमान और बारिश के बीच इन आंकड़ों ने स्वास्थ्य विभाग के सामने निगरानी की चुनौती बढ़ा दी है।

अगस्त में मलेरिया के मामलों में भी उछाल

दिल्ली में डेंगू के साथ मलेरिया के मामलों में भी अगस्त के दौरान उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई। नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में मलेरिया के 17 मामले दर्ज हुए थे, जबकि अगस्त में इनकी संख्या बढ़कर 53 हो गई। 29 अगस्त तक इस साल मलेरिया के कुल 119 मामले सामने आ चुके थे। हालांकि, विशेषज्ञ इन मामलों को सीधे एल नीनो से जोड़ने के बजाय इसे संभावित जोखिम बढ़ाने वाले कारक के तौर पर देखते हैं।

बढ़ते तापमान
बढ़ते तापमान

बढ़ते तापमान से कमजोर वर्गों पर ज्यादा असर

एल नीनो के दौरान तापमान बढ़ने की स्थिति में हीट एक्सॉशन और लू से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं। पहले से हृदय, फेफड़ों, किडनी या मेटाबॉलिक बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए अत्यधिक गर्मी विशेष रूप से खतरनाक हो सकती है। गर्भवती महिलाओं और नवजात बच्चों पर भी इसका गंभीर असर पड़ने की आशंका रहती है। इसके अलावा खाद्य असुरक्षा और कुपोषण की समस्या भी खराब मौसम के कारण बढ़ सकती है।

बारिश में बदलाव से जलजनित बीमारियों का खतरा

एल नीनो से वर्षा के पैटर्न में बदलाव होने पर स्वास्थ्य संबंधी खतरे कई स्तरों पर सामने आ सकते हैं। कम बारिश से जल उपलब्धता और कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जबकि अचानक भारी बारिश या बाढ़ के दौरान दूषित पानी बीमारियों का कारण बन सकता है। ऐसे हालात में लेप्टोस्पायरोसिस जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। खराब जल निकासी वाले क्षेत्रों में संक्रमण का जोखिम और गंभीर हो सकता है।

सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने की जरूरत

भारत-नेपाल और भारत-भूटान सीमा से जुड़े इलाकों में मौसम की वजह से होने वाले विस्थापन पर भी विशेष नजर जरूरी है। लोगों के एक स्थान से दूसरे स्थान जाने पर संक्रामक रोगों के सीमापार फैलने का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे क्षेत्रों में बीमारी की जल्द पहचान, प्रभावी निगरानी और समय पर चिकित्सा सुविधा पहुंचाना महत्वपूर्ण होगा।

WHO की चेतावनी को तैयारी के संकेत के रूप में देखें

WHO का आकलन किसी एक बीमारी के निश्चित प्रकोप की भविष्यवाणी नहीं करता। इसका मुख्य उद्देश्य एल नीनो और बदलते मौसम से जुड़े संभावित स्वास्थ्य खतरों के प्रति देशों को पहले से तैयार करना है। भारत में स्थानीय मौसम, स्वास्थ्य व्यवस्था और रोगों की स्थिति के आधार पर जोखिम अलग-अलग हो सकता है। इसलिए निगरानी, जन-जागरूकता और स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारी को मजबूत करना जरूरी होगा।

Read More  :  UP Politics: मायावती ने आकाश आनंद पर लिया बड़ा फैसला, रिश्तों से लेकर सियासत तक उठे सवाल