इंदौर
इंदौर में मई में सामने आए चर्चित हनी ट्रैप पार्ट-2 मामले में पुलिस ने जांच पूरी कर कोर्ट में करीब 600 पन्नों का चालान पेश कर दिया है। पुलिस के चालान में साल 2019 के चर्चित हनी ट्रैप मामले की आरोपित रह चुकी श्वेता विजय जैन को इस कथित गिरोह का सरगना बताया गया है। वहीं, सागर निवासी रेशू चौधरी को उसकी सहयोगी बताते हुए आरोप लगाया गया है कि वह फोटो और वीडियो के जरिए लोगों पर दबाव बनाने की कथित योजना में शामिल थी।
इस मामले में पुलिस ने कुल सात लोगों को आरोपित बनाया है। हालांकि, जांच अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। पुलिस द्वारा जब्त किए गए मोबाइल फोन, पेनड्राइव और अन्य इलेक्ट्रानिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। जांच अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल साक्ष्यों से नए तथ्य सामने आने पर मामले में पूरक चालान भी न्यायालय में पेश किया जा सकता है।
कारोबारी की शिकायत से सामने आया मामला
मामला शराब और प्रापर्टी कारोबारी हितेंद्र उर्फ चिंटू ठाकुर की शिकायत के बाद सामने आया था। उन्होंने 18 मई को क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार 28 अप्रैल को उन्हें रास्ते में रोका गया और प्रापर्टी कारोबार में हिस्सेदारी देने या एक करोड़ रुपये का भुगतान करने के लिए कथित रूप से दबाव बनाया गया। शिकायत में यह आरोप भी लगाया गया था कि फोटो और वीडियो सार्वजनिक करने की धमकी देकर उन्हें दबाव में लेने का प्रयास किया गया। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।
शुरुआती एफआईआर में नहीं था श्वेता का नाम
प्रारंभिक एफआईआर में श्वेता विजय जैन का नाम शामिल नहीं था। हालांकि, जांच और बाद में दर्ज किए गए बयानों के दौरान उसका नाम सामने आया। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर पूछताछ की। पूछताछ और अन्य आरोपितों के बयानों के आधार पर सागर निवासी रेशू चौधरी का नाम भी जांच में जुड़ा। पुलिस का दावा है कि आरोपितों से हुई पूछताछ और अब तक जुटाए गए अन्य साक्ष्यों के आधार पर कारोबारी पर दबाव बनाने की कथित योजना के बारे में जानकारी मिली है।
सागर की रेशू को बनाया हनीट्रैप गर्ल
पुलिस जांच के अनुसार, श्वेता जैन ने सागर की रहने वाली रेशू को गिरोह में शामिल किया था। आरोप है कि उसे नेताओं और रसूखदार लोगों से नजदीकी बढ़ाने की सलाह दी गई थी। इसके जरिए इंदौर, उज्जैन समेत अन्य बड़े शहरों के ठेकेदारों और प्रभावशाली लोगों को निशाना बनाने की योजना थी।
हालांकि, शराब ठेकेदार की शिकायत के बाद इंदौर पुलिस सक्रिय हो गई। पुलिस ने सागर स्थित श्वेता के घर पर छापा मारकर 9 मोबाइल फोन, कैमरे, मेमोरी कार्ड, पेन कैमरे और बटन कैमरे समेत कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए। पुलिस के अनुसार, इन उपकरणों का इस्तेमाल कथित तौर पर लोगों के वीडियो बनाने के लिए किया जाता था।पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह में अन्य कितने लोग शामिल थे और किन-किन लोगों को निशाना बनाया गया।
फोटो और वीडियो के जरिए दबाव बनाने का आरोप
पुलिस के अनुसार, चालान में यह उल्लेख किया गया है कि श्वेता और उसके साथियों ने संगठित तरीके से लोगों को निशाना बनाने और फोटो-वीडियो के आधार पर उन्हें ब्लैकमेल कर अवैध वसूली की कथित योजना बनाई थी। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने आरोपितों पर फोटो और वीडियो के माध्यम से लोगों को डराने और आर्थिक लाभ लेने के लिए दबाव बनाने के आरोप लगाए हैं।
9 मोबाइल और दो पेनड्राइव की फॉरेंसिक रिपोर्ट बाकी
मामले में पुलिस ने नौ मोबाइल फोन, दो पेनड्राइव सहित अन्य इलेक्ट्रानिक उपकरण जब्त किए हैं। इन सभी की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। जांच एजेंसियां इन उपकरणों से फोटो, वीडियो, चैट, अन्य डिजिटल डाटा और संभावित ब्लैकमेलिंग से जुड़े प्रमाण तलाश रही हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इलेक्ट्रानिक उपकरणों में कोई आपत्तिजनक, परिवर्तित या डीपफेक सामग्री मौजूद है या नहीं। फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद मामले में कई और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
नए सबूत मिले तो पेश होगा पूरक चालान
पुलिस अधिकारियों के अनुसार इलेक्ट्रानिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट के बाद यदि कोई नया और महत्वपूर्ण साक्ष्य मिलता है तो उसे भी जांच का हिस्सा बनाया जाएगा। ऐसी स्थिति में न्यायालय में पूरक चालान पेश किया जा सकता है। मामले में संगठित अपराध से संबंधित धाराएं भी जोड़ी गई हैं। पुलिस का कहना है कि अब चालान पेश होने के बाद न्यायालय में आगे की कानूनी प्रक्रिया चलेगी। आरोप तय होने के बाद मामले का नियमित विचारण शुरू होगा।
चार साल पहले भी आया था श्वेता का नाम
चार साल पहले सामने आए चर्चित हनीट्रैप मामले में भी श्वेता जैन का नाम प्रमुख रूप से सामने आया था। पुलिस जांच में आरोप लगा था कि श्वेता ने अपने संपर्क में आई आरती दयाल को गिरोह में शामिल किया और उसके जरिए इंदौर नगर निगम के तत्कालीन अधीक्षण यंत्री हरभजन सिंह को हनीट्रैप में फंसाया गया।
बताया गया कि हरभजन सिंह ने आरती के लिए इंदौर के एक होटल में कमरा बुक कराया था। आरोप है कि वहां उनका वीडियो बनाया गया और बाद में पैसों की मांग शुरू कर दी गई। इसके बाद हरभजन सिंह ने पुलिस से शिकायत की थी। उस समय पुलिस ने इंदौर और भोपाल से हनीट्रैप गिरोह से जुड़ी चार महिलाओं को गिरफ्तार किया था। यह मामला पूरे प्रदेश में काफी चर्चित रहा था। बाद में डेढ़ साल पहले हरभजन सिंह रीवा स्थित अपने घर में मृत पाए गए थे।
अब आगे क्या होगा?
पुलिस ने इस मामले में करीब 600 पेज का पूरक चालान कोर्ट में पेश किया है। अब गवाहों और सबूतों के आधार पर आरोपों को साबित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। पुलिस गिरोह के कथित मददगारों की भी तलाश कर रही है। जांच में यदि अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो उन्हें भी आरोपी बनाया जा सकता है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि गिरोह के संपर्क में कौन-कौन है।
अब तक सात आरोपितों पर कार्रवाई
हनी ट्रैप पार्ट-2 मामले में पुलिस अब तक कुल सात लोगों को आरोपित बना चुकी है। पुलिस का चालान मुख्य रूप से कारोबारी चिंटू ठाकुर की शिकायत, आरोपितों के बयान और जांच के दौरान जुटाए गए अन्य साक्ष्यों पर आधारित है।










