West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर हुई टूट ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। इस राजनीतिक उठापटक के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी मोर्चा संभाल लिया है और ममता बनर्जी पर निशाना साधा है। ऋताब्रता बनर्जी के नेतृत्व में 58 बागी विधायकों के अलग गुट को स्पीकर द्वारा मान्यता दिए जाने के बाद बंगाल का राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह बदल गया है।
भाजपा का कटाक्ष
टीएमसी में हुए इस बड़े विभाजन पर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हुए ममता बनर्जी को जिम्मेदार ठहराया है। उत्तर प्रदेश सरकार में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक तीखी टिप्पणी की। उन्होंने लिखा, “ममता बनर्जी की निर्ममता से उनकी अपनी पार्टी तृणमूल कांग्रेस, ‘तृण-तृण’ (छोटे-छोटे टुकड़ों) में बिखर गई है।” भाजपा का मानना है कि ममता बनर्जी की तानाशाही कार्यशैली और कठोर नीतियों के कारण ही पार्टी के भीतर यह असंतोष पनपा, जो अंततः इतने बड़े विद्रोह में बदल गया।
ऋताब्रता बनर्जी का दावा
बागी गुट का नेतृत्व कर रहे ऋताब्रता बनर्जी ने अपनी स्थिति और भी मजबूत होने का दावा किया है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में उनके साथ 58 विधायक हैं, और जल्द ही दो और विधायक इस खेमे में शामिल हो सकते हैं। ऋताब्रता ने नई नेतृत्व टीम की घोषणा करते हुए जावेद खान, संदीपन साहा, सबीना यास्मीन और शिउली साहा को ‘तृणमूल विधायक दल’ का उपनेता नियुक्त किया है।
ऋताब्रता ने स्पष्ट किया कि उनका गुट ममता बनर्जी का विरोध करने के लिए नहीं, बल्कि पार्टी को सही दिशा में ले जाने के लिए बना है। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि वे ‘तृणमूल विधायक दल’ के मुख्य सलाहकार की भूमिका में बनी रहें। उनका तर्क है कि संसदीय मानदंडों और दलबदल विरोधी कानून के प्रावधानों के अनुसार, उनका गुट ही ‘असली’ है और उन्हें विधानसभा में मुख्य विपक्षी दल का दर्जा मिलना चाहिए। स्पीकर रवींद्र नाथ बोस ने बागी विधायकों की इस मांग को स्वीकार कर लिया है, जो ममता बनर्जी के लिए एक बड़ा कानूनी और राजनीतिक झटका है।
विपक्ष की भूमिका और सकारात्मक राजनीति
बागी गुट ने अपनी भविष्य की रणनीति स्पष्ट करते हुए कहा है कि वे राज्य सरकार की जनविरोधी नीतियों का पुरजोर विरोध करेंगे। ऋताब्रता बनर्जी ने जोर देकर कहा कि उनकी राजनीति का उद्देश्य केवल विरोध करना नहीं, बल्कि ‘सकारात्मक राजनीति’ है। उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर विपक्ष के नेता के चयन की प्रक्रिया के उल्लंघन का आरोप लगाया और कहा कि पार्टी के भीतर लोकतांत्रिक मूल्यों की बहाली के लिए ही उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।
हिंदी पत्रकारिता की समृद्ध परंपरा युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत : राज्यपाल पटेल










