West Bengal politics: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों उथल-पुथल का दौर चल रहा है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सुप्रीमो ममता बनर्जी के लिए यह समय बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। हाल ही में घटी घटनाओं ने संकेत दिए हैं कि उनकी पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है। एक ओर जहाँ ममता बनर्जी ‘इंडिया ब्लॉक’ (INDIA Bloc) की महत्वपूर्ण बैठक में व्यस्त थीं, वहीं दूसरी ओर उनकी ही पार्टी के सांसदों के एक बागी गुट ने दिल्ली में सियासी सरगर्मियां तेज कर दी हैं।
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गुप्त बैठक और बढ़ती दूरियां
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, टीएमसी के करीब 20 बागी सांसदों ने दिल्ली में एक गुप्त बैठक की। इस बैठक में प्रसून बनर्जी, शताब्दी रॉय और जगदीश बसुनिया जैसे प्रमुख नाम शामिल रहे। हैरानी की बात यह है कि इस बैठक के तुरंत बाद, ये सभी सांसद केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर पहुंचे। इस बैठक में पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी की मौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। यह घटनाक्रम सीधे तौर पर ममता बनर्जी के लिए खतरे की घंटी के रूप में देखा जा रहा है।
सुखेंदु शेखर रॉय का इस्तीफा और गंभीर आरोप
इस बगावत की सबसे बड़ी कड़ी राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय का इस्तीफा है। इस्तीफा देने के बाद सुखेंदु शेखर रॉय ने ममता बनर्जी और टीएमसी नेतृत्व पर तीखे हमले किए। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर ‘सत्ता का नशा’ हावी हो गया है, जिसके कारण नेतृत्व जमीनी हकीकत से पूरी तरह कट चुका है।
रॉय ने अपने बयानों में कहा कि पिछले 15 वर्षों में मंत्री, पंचायत स्तर के नेता, पार्षद और मेयर जैसे लोग जनता की पहुंच से बाहर हो गए हैं। उन्होंने पार्टी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जिन समर्पित कार्यकर्ताओं ने वाममोर्चा के खिलाफ लड़कर पार्टी को खड़ा किया, उन्हें दरकिनार कर दिया गया है। उनकी जगह ‘बिचौलियों, चोरों और अपराधियों’ को तरजीह दी गई, जिसके कारण राज्य में करोड़ों रुपये की लूट हुई। रॉय का यह बयान पार्टी के अंदर लंबे समय से पनप रहे असंतोष को स्पष्ट करता है।
क्या अलग गुट बनाने की तैयारी है?
सूत्रों का दावा है कि टीएमसी के ये 20 बागी सांसद भविष्य की बड़ी योजना पर काम कर रहे हैं। चर्चा है कि ये सांसद या तो लोकसभा अध्यक्ष के दिल्ली लौटने का इंतजार कर रहे हैं ताकि उन्हें सामूहिक इस्तीफा सौंप सकें, या फिर 20 सांसदों के हस्ताक्षर के साथ एक औपचारिक पत्र के जरिए अपनी अलग पहचान बनाने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।
शुभेंदु अधिकारी और भूपेंद्र यादव के साथ इन नेताओं की मुलाकात इस बात की ओर इशारा करती है कि बंगाल की राजनीति में भाजपा सक्रिय रूप से इस असंतोष को भुनाने की कोशिश में है। अगर यह बगावत वास्तव में एक अलग गुट में बदलती है, तो यह ममता बनर्जी की सरकार और संगठन दोनों के लिए एक गहरा राजनीतिक संकट पैदा कर सकता है।
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