
West Bengal News: पश्चिम बंगाल के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई जाने वाली बांग्ला भाषा और इतिहास की किताबों में जल्द ही बड़े बदलाव देखने को मिलने वाले हैं। राज्य सरकार द्वारा गठित पाठ्यक्रम समीक्षा समिति ने किताबों में इस्तेमाल होने वाले कुछ शब्दों को बदलने और इतिहास के पाठ्यक्रम में महत्वपूर्ण संशोधन करने की सिफारिश की है। इस बदलाव के तहत बांग्ला किताबों से कुछ विशेष शब्दों को हटाकर उनकी जगह पारंपरिक और आम बोलचाल के शब्दों को शामिल किया जा रहा है। साथ ही, इतिहास के पाठ्यक्रम को नए सिरे से तैयार करने की तैयारी है।
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भाषा और शब्दों में बदलाव: ‘पानी’ बना ‘जल’ और ‘अब्बा’ बने ‘बाबा’
बंगाल की शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की चर्चा
कल्याणी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर देबाशीष चटर्जी की अध्यक्षता में गठित पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तक समीक्षा समिति ने बांग्ला भाषा की किताबों में शब्दों के चयन को लेकर अहम फैसले लिए हैं। समिति के अनुसार, बांग्ला में आम बोलचाल के दौरान ‘पानी’, ‘अब्बा’ और ‘अम्मी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल सामान्य रूप से नहीं किया जाता है। इसलिए इन शब्दों को हटाकर इनकी जगह क्रमशः ‘जल’, ‘बाबा’ और ‘मां’ जैसे रोजमर्रा में अधिक उपयोग होने वाले शब्दों को रखा जाएगा। समिति का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्रों को पाठ्यपुस्तकों में ऐसी भाषा मिले जो उनकी स्थानीय बोलचाल और संस्कृति से अधिक मेल खाती हो।
समय सीमा और प्रकाशन की चुनौतियां

नई पाठ्यपुस्तकों का पहला संस्करण जनवरी 2027 तक तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रोफेसर देबाशीष चटर्जी ने स्पष्ट किया कि नई किताबें तैयार करने के लिए समिति के पास समय काफी कम था, क्योंकि 2 जनवरी तक किताबें उपलब्ध करानी हैं और लगभग 12 करोड़ से अधिक पुस्तकों का प्रकाशन किया जाना है। इतनी कम अवधि और विशाल संख्या में किताबों के प्रकाशन की जरूरत को ध्यान में रखते हुए, पाठ्यक्रम में बड़े और अमूलचूल बदलाव करने के बजाय इस बार केवल जरूरी संशोधन और तथ्यात्मक गलतियों को सुधारने पर जोर दिया गया है।

इतिहास के पाठ्यक्रम में नए तथ्य और पुरातात्विक खोजें
नई इतिहास की किताबों में छात्रों को केवल पारंपरिक दृष्टिकोण पढ़ाने के बजाय नवीनतम पुरातात्विक खोजों से जुड़े तथ्यों को भी शामिल किया जाएगा। इसके तहत उत्तर प्रदेश के सिनौली और हरियाणा के राखीगढ़ी में हुई पुरातात्विक खोजों से जुड़ी जानकारियों को स्थान मिलेगा। इन स्थलों पर हुई खुदाई के निष्कर्षों का उपयोग आर्यों के भारत आगमन से संबंधित प्रचलित सिद्धांतों पर नए सिरे से विचार करने के लिए किया जा रहा है। अब तक छात्रों को पढ़ाया जाता रहा है कि आर्य अपने साथ सभ्यता, रथ और घोड़े लेकर आए थे, लेकिन सिनौली और राखीगढ़ी के साक्ष्यों ने इन पुराने सिद्धांतों को एक नई वैचारिक चुनौती दी है।
मुगल इतिहास, मार्क्सवाद और पिछली सरकार के अध्यायों में कटौती
संशोधित पाठ्यक्रम के तहत इतिहास और साहित्य के कई अध्यायों में फेरबदल किया गया है। मुगल शासन, ब्रिटिश औपनिवेशिक इतिहास और मार्क्सवाद से जुड़े कुछ हिस्सों को किताबों में कम किया गया है। इसके विपरीत, साहित्य के क्षेत्र में रवींद्रनाथ टैगोर की कविता ‘शिवाजी उत्सव’ और द्विजेंद्रलाल रॉय के नाटक ‘मेवाड़ पतन’ को शामिल किया गया है, जबकि सिराजुद्दौला पर आधारित नाटक और टैगोर की कविता ‘अफ्रीका’ को पाठ्यक्रम से बाहर कर दिया गया है। इसके अलावा, पिछली सरकार के कार्यकाल में जोड़े गए सिंगूर भूमि अधिग्रहण आंदोलन और ‘कन्याश्री’ योजना से जुड़े अध्यायों को भी हटाया जा रहा है।
स्कूली व्यवस्था में अन्य सुधार और प्रशासनिक कदम

पाठ्यक्रम में बदलाव के साथ-साथ राज्य सरकार स्कूल शिक्षा व्यवस्था को अधिक अनुशासनबद्ध और प्रभावी बनाने की दिशा में भी विचार कर रही है। इसके तहत स्कूलों में मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने, पुरानी ‘नो-डिटेंशन’ (पास-फेल) नीति को समाप्त कर परीक्षा व्यवस्था को सख्त करने तथा एनसीसी (NCC) और एनएसएस जैसी सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों को दोबारा शुरू करने पर काम किया जा रहा है। इन सभी प्रस्तावों के लागू होने से पश्चिम बंगाल की स्कूली शिक्षा प्रणाली में एक बड़ा बदलाव आने की संभावना है।
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