पश्चिम बंगाल चुनाव: भाजपा ने एक से दो चरणों की प्रक्रिया पर जोर दिया

कोलकाता भारतीय जनता पार्टी की पश्चिम बंगाल इकाई ने राज्य में निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने के लिए भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) की पूर्ण पीठ के समक्ष विस्तृत प्रस्तुति दी। पार्टी ने चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और निष्पक्ष बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव आयोग के सामने रखे। भाजपा ने कहा कि पश्चिम बंगाल में लंबे समय तक चलने वाली चुनाव प्रक्रिया से हिंसा और प्रशासनिक दखल की आशंका बढ़ जाती है। पार्टी ने आयोग से मांग की कि छह सप्ताह तक 7–8 चरणों में मतदान कराने के बजाय कम समय में अधिकतम एक या दो चरणों

Wrriten By :

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Published On :

मार्च 9, 2026

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कोलकाता
भारतीय जनता पार्टी की पश्चिम बंगाल इकाई ने राज्य में निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने के लिए भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) की पूर्ण पीठ के समक्ष विस्तृत प्रस्तुति दी। पार्टी ने चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और निष्पक्ष बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव आयोग के सामने रखे। भाजपा ने कहा कि पश्चिम बंगाल में लंबे समय तक चलने वाली चुनाव प्रक्रिया से हिंसा और प्रशासनिक दखल की आशंका बढ़ जाती है।

पार्टी ने आयोग से मांग की कि छह सप्ताह तक 7–8 चरणों में मतदान कराने के बजाय कम समय में अधिकतम एक या दो चरणों में मतदान कराया जाए। साथ ही, पिछले तीन चुनावों 2019 व 2024 के लोकसभा चुनाव और 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान निर्वाचन आयोग के आदेश से स्थानांतरित किए गए सभी अधिकारियों को फिर से ट्रांसफर करने की मांग की। भाजपा ने “संवेदनशील बूथ” के बारे में बताते हुए कहा कि जहां पिछले तीन चुनावों के दौरान मतदान के समय या उसके बाद हिंसा हुई हो, या जहां 85 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ है और अशांति फैलाई जा सकती है।

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सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भाजपा ने पश्चिम बंगाल पुलिस पर निर्भरता कम करने की बात कही। पार्टी ने मांग की कि पर्याप्त संख्या में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल की अग्रिम तैनाती की जाए और उनके लिए क्षेत्र से परिचित कराने हेतु हैंडबुक उपलब्ध कराई जाए। साथ ही सीएपीएफ के नोडल अधिकारियों को निर्देश दिया जाए कि बल की तैनाती व आवाजाही पूरी तरह पारदर्शी हो और जवान स्थानीय लोगों से किसी प्रकार की मेहमाननवाजी स्वीकार न करें।

भाजपा ने यह भी सुझाव दिया कि सामान्य पर्यवेक्षकों और पुलिस पर्यवेक्षकों को काफी पहले से तैनात किया जाए ताकि वे स्वतंत्र आकलन कर सकें। वहीं, सीएपीएफ की ओर से एरिया डॉमिनेशन, रूट मार्च और कॉन्फिडेंस बिल्डिंग उपाय स्थानीय पुलिस के बजाय ऑब्जर्वरों की पहचान के आधार पर किए जाएं। भाजपा ने वोटरों की पहचान के लिए दो चरणों की व्यवस्था, हर पोलिंग स्टेशन पर वेबकैम और राज्य व केंद्र सरकार के अधिकारियों की 50-50 फीसदी भागीदारी की भी मांग की। पार्टी का कहना है कि इन उपायों से चुनाव प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बन सकेगी।

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