West Bengal Election: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की चुनावी सरगर्मी अब अपने चरम पर है। राज्य की 294 सीटों के लिए होने वाले इस महामुकाबले का पहला चरण 23 अप्रैल को निर्धारित है। चुनाव आयोग की कड़ी निगरानी के बीच, शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। इसी कड़ी में, पश्चिम बंगाल सरकार के आबकारी निदेशालय ने एक चौंकाने वाला फैसला लेते हुए शराब की बिक्री पर पाबंदियों के समय को बदल दिया है। सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए अब मतदान से पहले ही शराब की दुकानों पर ताले लटकाने का आदेश जारी कर दिया गया है, जिससे चुनावी क्षेत्रों में हड़कंप मच गया है।
निर्वाचन आयोग की सख्ती और समय सीमा में बदलाव
आबकारी विभाग के शुरुआती कार्यक्रम के अनुसार, शराब की बिक्री पर रोक 21 अप्रैल से लगनी थी, लेकिन निर्वाचन आयोग की सुरक्षा व्यवस्था और चुनावी आचार संहिता (Election Code of Conduct and Security) को देखते हुए इसे 20 अप्रैल को ही लागू करने का नया आदेश जारी कर दिया गया। नए निर्देश के मुताबिक, उत्तर और दक्षिण बंगाल के 16 जिलों में आज रात 9 बजे से शराब की सभी दुकानें और बार पूरी तरह बंद रहेंगे। शराबबंदी की इस नई समय सीमा (New deadline for Dry Day) का उद्देश्य चुनाव से पहले किसी भी तरह की अशांति को रोकना है। यह प्रतिबंध 23 अप्रैल को मतदान की प्रक्रिया समाप्त होने तक प्रभावी रहेगा।
चुनावी क्षेत्रों का भौगोलिक विस्तार
आपकी जानकारी के लिए बता दे कि, पहले चरण के मतदान के लिए जिन क्षेत्रों को चुना गया है, वे भौगोलिक और राजनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। प्रथम चरण के मतदान केंद्र और प्रभावित जिले (Polling stations and affected districts) उत्तर बंगाल के कूचबिहार, अलीपुरद्वार, जलपाईगुड़ी, कलिम्पोंग और दार्जिलिंग से लेकर दक्षिण बंगाल के मुर्शिदाबाद, बीरभूम और बांकुड़ा तक फैले हुए हैं। कुल 152 सीटों पर होने वाले इस चुनाव में शांति व्यवस्था और सुरक्षित मतदान प्रक्रिया (Law and Order for Secure Voting) सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने झाड़ग्राम और मेदिनीपुर जैसे इलाकों में भी शराब की बिक्री पर सख्त रोक लगा दी है।
सुरक्षित मतदान के लिए आबकारी निदेशालय के निर्देश
आबकारी निदेशालय के इस अचानक आए फैसले से शराब कारोबारियों और विक्रेताओं के बीच कुछ समय के लिए भ्रम की स्थिति पैदा हो गई। हालांकि, शराब व्यापारियों की प्रतिक्रिया और प्रशासनिक अनुपालन (Traders’ response and Administrative compliance) सकारात्मक रही है और दुकानदारों ने प्रशासन के आदेशों का पालन करने की बात कही है। चुनाव आयोग की ओर से यह स्पष्ट कर दिया गया है कि मतदान की शुचिता और मतदाताओं की सुरक्षा (Integrity of voting and Voter safety) सर्वोपरि है। किसी भी तरह की अवैध शराब की सप्लाई या वितरण को रोकने के लिए पुलिस बल को भी अलर्ट पर रखा गया है।
बंगाल का चुनावी गणित
पश्चिम बंगाल की राजनीति के लिए यह चुनाव निर्णायक साबित होने वाला है। राजनीतिक दलों का प्रचार अभियान और चुनावी समीकरण (Political campaigning and Election equations) अपने अंतिम दौर में हैं, जहाँ सत्ताधारी TMC, मुख्य विपक्षी दल BJP और CPI(M) अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं। 23 अप्रैल को पहले चरण और 29 अप्रैल को दूसरे चरण के मतदान के बाद, सभी की निगाहें 4 मई को होने वाली मतगणना और चुनावी परिणामों (Counting of votes and Election results) पर टिकी होंगी। 294 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत हासिल करने के लिए यह शुरुआती चरण बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, यही कारण है कि सुरक्षा को लेकर कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है।









