West Asia Crisis: युद्ध के बीच सुरक्षित रहेंगे भारतीय, विदेश मंत्रालय का बड़ा कदम, जानें इमरजेंसी नंबर!

पश्चिम एशिया में ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच भारत सरकार ने अपने नागरिकों के लिए सुरक्षा चक्र तैयार कर लिया है। विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली में एक विशेष कंट्रोल रूम बनाया है जो सुबह 9 से रात 9 बजे तक सक्रिय रहेगा। विभिन्न देशों के दूतावासों के इमरजेंसी नंबर भी जारी किए गए हैं।

West Asia Crisis

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 4, 2026

West Asia Crisis: पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में युद्ध की ज्वाला अब अत्यंत विकराल रूप ले चुकी है। इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए जा रहे भीषण हमलों के कारण क्षेत्र में मौजूद हजारों भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने नई दिल्ली में एक विशेष नियंत्रण कक्ष (Control Room) स्थापित किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बुधवार को बताया कि यह कदम युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में फंसे भारतीयों को तत्काल सहायता प्रदान करने और उनके परिजनों के सवालों के जवाब देने के लिए उठाया गया है। यह नियंत्रण कक्ष वर्तमान में सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।

दिल्ली स्थित विशेष नियंत्रण कक्ष के हेल्पलाइन नंबर

यदि आपके परिजन या परिचित इस समय पश्चिम एशिया के किसी भी देश में हैं और उन्हें सहायता की आवश्यकता है, तो आप भारत सरकार द्वारा जारी इन आधिकारिक नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं:

  • टोल-फ्री नंबर: 1800118797

  • लैंडलाइन नंबर 1: +91 11 2301 2113

  • लैंडलाइन नंबर 2: +91 11 2301 4104

  • लैंडलाइन नंबर 3: +91 11 2301 7905

विभिन्न खाड़ी देशों में भारतीय दूतावासों के आपातकालीन संपर्क

विदेश मंत्रालय ने केवल दिल्ली ही नहीं, बल्कि युद्ध क्षेत्र के पास स्थित विभिन्न देशों के भारतीय दूतावासों के भी इमरजेंसी नंबर सार्वजनिक किए हैं। भारतीय नागरिक स्थानीय स्तर पर सहायता के लिए इन नंबरों का उपयोग कर सकते हैं:

देशआपातकालीन संपर्क नंबर
ईरान+98 9128109115 / +98 912810910
इज़राइल+972 54 7520711 / +972 54 2428378
सऊदी अरब (रियाद)+966 11 4884697 / 800 247 1234
संयुक्त अरब अमीरात+971 543090571 (WhatsApp)
कुवैत+965 65501946
लेबनान+961 76860128
कतर+974 55647502

28 फरवरी से शुरू हुआ खूनी संघर्ष: क्या है पूरा मामला?

पश्चिम एशिया में इस विनाशकारी युद्ध की शुरुआत शनिवार, 28 फरवरी 2026 को हुई थी। अमेरिका और इजरायल ने एक संयुक्त खुफिया ऑपरेशन के तहत ईरान के भीतर कई रणनीतिक ठिकानों पर भीषण हमले किए। इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई और कई अन्य शीर्ष सैन्य अधिकारियों की मौत की पुष्टि हुई। ईरानी सरकारी मीडिया ने जब खामेनेई की मृत्यु को स्वीकार किया, तो पूरे क्षेत्र में प्रतिशोध की लहर दौड़ गई। इसे आधुनिक इतिहास के सबसे बड़े सैन्य अभियानों में से एक माना जा रहा है, जिसने कूटनीतिक वार्ताओं के सारे रास्ते लगभग बंद कर दिए हैं।

जवाबी हमलों का सिलसिला और रणनीतिक ठिकानों पर खतरा

खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने ‘ऑपरेशन प्रतिशोध’ के तहत इजराइली संपत्तियों और मध्य पूर्व में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को अपना निशाना बनाया है। खाड़ी क्षेत्र के रणनीतिक स्थानों, बंदरगाहों और तेल रिफाइनरियों के पास लगातार धमाके हो रहे हैं। ड्रोन और मिसाइलों के इस आदान-प्रदान ने हवाई मार्गों और समुद्री व्यापार को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। ऐसी अनिश्चित स्थिति में, भारत सरकार का प्राथमिक लक्ष्य वहां रह रहे लगभग 90 लाख से अधिक भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

नागरिकों के लिए विशेष एडवायजरी और सुरक्षा निर्देश

विदेश मंत्रालय ने सलाह दी है कि भारतीय नागरिक वर्तमान में इन प्रभावित देशों की गैर-जरूरी यात्रा से बचें। जो लोग पहले से वहां मौजूद हैं, वे अपने संबंधित दूतावास में पंजीकरण (Registration) अवश्य करा लें ताकि आपात स्थिति में उन्हें सुरक्षित निकाला जा सके। नियंत्रण कक्ष के माध्यम से पल-पल की स्थिति पर नजर रखी जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर ‘इवेक्यूएशन’ (निकासी अभियान) की योजना भी तैयार रखी गई है।

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