उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों पर वर्चस्व की जंग की शुरुआत हो रही है, जहाँ सत्ता की चाबी जातिगत समीकरणों पर टिकी है

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'जीरो टॉलरेंस' और विकास के दम पर भाजपा राज्य में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने का दावा कर रही है

समाजवादी पार्टी महंगाई, बेरोजगारी और PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के जरिए सत्ता में वापसी की पुरजोर कोशिश में जुटी है

पश्चिमी उत्तर प्रदेश का जाटलैंड और किसान राजनीति का गढ़ माना जाने वाला बागपत (52) इस बार बेहद रणनीतिक मोड़ पर खड़ा है

बागपत क्षेत्र के अंतर्गत बागपत नगर पालिका, खेकड़ा नगर पालिका, अमीनगर सराय और बड़ागांव जैसे प्रमुख क्षेत्र आते हैं

यह इलाका राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के प्रभाव में आता है, जहाँ कृषि और शहरी विकास दोनों ही चुनावी मुद्दे बनते हैं

प्रशासनिक संशोधनों और हालिया SIR प्रक्रिया के बाद बागपत विधानसभा सीट के मतदाता आंकड़ों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है

लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान यहाँ लगभग 3,30,947 मतदाता थे, जो SIR प्रक्रिया के बाद घटकर करीब 2,87,008 रह गए हैं

बागपत में जीत का रास्ता केवल वादों से नहीं, बल्कि जाट, मुस्लिम और अन्य जातियों के रणनीतिक गठबंधनों से तय होता है

क्या बागपत में भाजपा अपनी पकड़ मजबूत रखकर इतिहास दोहराएगी या फिर विपक्षी गठबंधन बाजी पलटने में कामयाब होगा?