उत्तर प्रदेश की हाई-प्रोफाइल मैनपुरी सदर सीट पर 2027 के चुनाव को लेकर सियासी पारा चढ़ने लगा है। सभी दल अपनी बिसात बिछा रहे हैं

मैनपुरी सदर सीट पर जीत-हार में जातीय समीकरण सबसे अहम हैं

इस सीट पर यादव और क्षत्रिय मतदाता सबसे ज्यादा प्रभावी हैं और हार-जीत तय करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं

शाक्य, बघेल, कश्यप जैसी अन्य पिछड़ी जातियां और करीब 20% दलित मतदाता किसी भी दल का खेल बनाने या बिगाड़ने की ताकत रखते हैं

कभी सपा का अभेद्य किला मानी जाने वाली इस सीट पर 2022 में भाजपा ने सेंध लगाई और जयवीर सिंह ने जीत दर्ज की थी

समाजवादी पार्टी के लिए अपना पारंपरिक गढ़ वापस पाना प्रतिष्ठा का प्रश्न है। पार्टी 'PDA' फॉर्मूले के सहारे वापसी की उम्मीद में है

भाजपा अपनी संगठनात्मक ताकत, हिंदुत्व और विकास कार्यों के दम पर 2022 के प्रदर्शन को दोहराने की पूरी कोशिश करेगी

क्षेत्र में उद्योगों की कमी से बेरोजगारी और किसानों के लिए आवारा पशुओं का आतंक बड़े मुद्दे हैं

चुनाव में यह देखना दिलचस्प होगा कि मैनपुरी सदर की जनता विकास के मुद्दों पर वोट करती है या पारंपरिक जातीय वफादारियों के साथ जाती है