साल 2026 में पितृ पक्ष की शुरुआत 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध के साथ हो रही है

पितृ पक्ष का समापन 10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या के दिन होगा

यह 16 दिनों का पखवाड़ा पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनके तर्पण के लिए समर्पित होता है

शास्त्रों के अनुसार, इस काल में पितृगण पृथ्वी लोक पर आकर अपने वंशजों का आशीर्वाद स्वीकार करते हैं

पूर्वजों की जिस तिथि पर मृत्यु हुई हो, श्राद्ध कर्म उसी दिन किया जाना चाहिए

यदि पुरखों की सही तिथि ज्ञात न हो, तो सर्वपितृ अमावस्या के दिन तर्पण व पिंडदान करना सबसे उत्तम माना जाता है

श्राद्ध कर्म हमेशा दिन के आठवें मुहूर्त यानी कुतप काल (सुबह 11:36 से दोपहर 12:24 तक) में करना फलदायी होता है

पितृ पक्ष के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और भूमि पूजन जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं

इस अवधि में शाम या रात्रि के समय श्राद्ध करना वर्जित माना गया है, साथ ही सादगी का पालन करना चाहिए