यदि पुरखों की सही तिथि ज्ञात न हो, तो सर्वपितृ अमावस्या के दिन तर्पण व पिंडदान करना सबसे उत्तम माना जाता है
श्राद्ध कर्म हमेशा दिन के आठवें मुहूर्त यानी कुतप काल (सुबह 11:36 से दोपहर 12:24 तक) में करना फलदायी होता है
पितृ पक्ष के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और भूमि पूजन जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं