धनतेरस के दिन को आरोग्य के देवता भगवान धन्वंतरि के प्राकट्य दिवस यानी धन्वंतरि जयंती के रूप में मनाया जाता है

पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अपने हाथों में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे

साल 2026 में धनतेरस की पूजा का मुख्य मुहूर्त शाम 06:02 बजे से 07:57 बजे तक रहेगा

इस दिन प्रदोष काल शाम 05:33 से रात 08:09 बजे तक और वृषभ काल शाम 06:02 से 07:57 बजे तक रहेगा

धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि की षोडशोपचार विधि से पूजा करना अत्यंत फलदायी माना गया है

पूजा के दौरान भगवान को धूप, दीप, चंदन, हल्दी, अक्षत (चावल), और फूल-माला अर्पित करें

पूजा के समय "ॐ नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धन्वंतराये..." मंत्र का जाप जरूर करें

भगवान धन्वंतरि की आरती गाकर उन्हें सात्विक भोग लगाएं और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करें

पूजा के बाद घर के कोनों में दीये जलाएं और दक्षिण दिशा की ओर यमराज के नाम का एक विशेष दीया अवश्य रखें

भगवान विष्णु के अंशावतार भगवान धन्वंतरि को संसार का पहला वैद्य कहा जाता है, जिन्होंने मानवता को आयुर्वेद का ज्ञान दिया