Vijay Shah Controversy: कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए गए विवादित बयान के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार के रवैये पर कड़ी नाराजगी और हैरानी जताई है। यह मामला राज्य के मंत्री विजय शाह से जुड़ा है, जिनके बयान के बाद उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। इसी एफआईआर को रद्द कराने के लिए विजय शाह ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। अदालत में इस केस की सुनवाई के दौरान सरकार की भूमिका पर गंभीर सवाल उठे।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद आया था बयान
कर्नल सोफिया कुरैशी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर मीडिया को आधिकारिक ब्रीफिंग दी थी। इसके बाद मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह ने उन्हें लेकर एक बयान दिया, जिसे आपत्तिजनक और विवादित माना गया। इसी बयान को लेकर उनके खिलाफ मामला दर्ज हुआ और जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया।सुनवाई के दौरान एसआईटी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसने विजय शाह के खिलाफ अभियोजन चलाने की अनुमति के लिए राज्य सरकार से औपचारिक मंजूरी मांगी थी। हालांकि हैरानी की बात यह रही कि अगस्त से अब तक राज्य सरकार ने इस आवेदन पर कोई फैसला नहीं लिया है। कोर्ट ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए सरकार से स्पष्टीकरण मांगा।
सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि अगस्त 2025 से लेकर जनवरी तक सरकार ने एसआईटी की रिपोर्ट पर कोई निर्णय नहीं लिया है। उन्होंने राज्य सरकार की दलीलों पर असंतोष जताते हुए कहा कि सिर्फ यह कहना पर्याप्त नहीं है कि रिपोर्ट पर विचार किया जा रहा था। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि कानून के तहत समयबद्ध फैसला लेना सरकार की जिम्मेदारी है।सीजेआई सूर्यकांत ने बताया कि एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट सील कवर में कोर्ट को सौंपी थी, जिसे बाद में ओपन कोर्ट में खोला गया। रिपोर्ट में जांच के कई पहलुओं का जिक्र था, हालांकि याचिकाकर्ता के पुराने मामलों को इसमें शामिल नहीं किया गया। इसके बावजूद एसआईटी ने जांच के बाद विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने की सिफारिश की थी।
सरकार को जल्द कदम उठाने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि मध्य प्रदेश सरकार कानून के अनुसार अभियोजन की अनुमति देने या न देने पर उचित और जल्द फैसला ले। अदालत ने खुफिया विभाग के डीआईजी डी. कल्याण चक्रवर्ती को भी उन बिंदुओं पर गौर करने को कहा, जिनका उल्लेख अन्य याचिकाओं में किया गया है।विजय शाह की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदन सिंह ने दलील दी कि याचिकाकर्ता माफी मांग चुके हैं और जांच में सहयोग भी कर रहे हैं। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि रिकॉर्ड में कोई माफीनामा मौजूद नहीं है और अब बहुत देर हो चुकी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि वह पहले ही माफी के स्वरूप पर टिप्पणी कर चुका है।
‘मगरमच्छ के आंसू’ बताकर माफी खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने विजय शाह की सार्वजनिक और ऑनलाइन माफी को पहले ही खारिज कर दिया था। कोर्ट ने इसे कानूनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश बताते हुए ‘मगरमच्छ के आंसू’ करार दिया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस तरह की माफी गंभीर आरोपों से राहत पाने का आधार नहीं बन सकती।अब इस मामले में सबकी निगाहें मध्य प्रदेश सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद यह देखना अहम होगा कि राज्य सरकार अभियोजन की अनुमति पर कब और क्या फैसला लेती है। यह मामला न सिर्फ कानूनी बल्कि राजनीतिक रूप से भी काफी अहम माना जा रहा है।










