Suman Kalyanpur Death : भारतीय संगीत जगत से एक बेहद ही दुखद और झकझोर देने वाली खबर सामने आ रही है। अपनी मखमली आवाज से दशकों तक करोड़ों दिलों पर राज करने वाली दिग्गज पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर अब हमारे बीच नहीं रहीं। 89 वर्ष की आयु में उन्होंने अपने निवास स्थान पर अंतिम सांस ली और इस नश्वर दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया। सुमन जी ने अपने लंबे और शानदार करियर में न सिर्फ हिंदी, बल्कि मराठी, असमिया, गुजराती, बंगाली और पंजाबी सहित कई क्षेत्रीय भाषाओं में भी अपनी जादुई आवाज का जादू बिखेरा था। उनके निधन की खबर से पूरी फिल्म और संगीत इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है।
मराठी सिनेमा से की थी शुरुआत
सुमन कल्याणपुर का संगीत सफर बेहद गरिमामयी और प्रेरणादायक रहा है। उन्होंने अपने पेशेवर गायन करियर की शुरुआत मराठी सिनेमा से की थी। साल 1953 में आई मराठी फिल्म ‘शुक्राची चांदनी’ में उन्होंने अपना पहला गाना रिकॉर्ड किया था, जिसे लोगों ने खूब पसंद किया। इसके बाद उन्होंने हिंदी सिनेमा का रुख किया, जहां फिल्म ‘दरवाजा’ से उन्होंने बॉलीवुड में कदम रखा। इस पहली ही हिंदी फिल्म में उनकी प्रतिभा को देखते हुए उन्हें एक या दो नहीं, बल्कि पूरे 4 गाने गाने का मौका मिला। अपनी बेहतरीन और सुरीली गायिकी के दम पर उन्होंने इंडस्ट्री में बहुत जल्द अपनी एक अमिट पहचान बना ली।
आवाज में थी लता जैसी मिठास
संगीत के क्षेत्र में सुमन कल्याणपुर का योगदान अतुलनीय और अमूल्य रहा है। उनके इसी समर्पण के लिए उन्हें भारत सरकार द्वारा देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान ‘पद्म भूषण’ से नवाजा गया था। इसके अलावा उन्हें गदिमा प्रतिष्ठान की ओर से ‘गदिमा अवॉर्ड’ सहित कई बड़े पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था। संगीत समीक्षकों और प्रशंसकों का मानना था कि सुमन जी की आवाज की बनावट और मिठास महान गायिका लता मंगेशकर से काफी मिलती-जुलती थी। यही वजह थी कि संगीत प्रेमी उन्हें आदर और प्यार से ‘दूसरी लता मंगेशकर’ कहकर भी पुकारते थे।
पेंटिंग के शौक से ऑल इंडिया रेडियो तक
सुमन कल्याणपुर को बचपन से ही संगीत के साथ-साथ पेंटिंग करने का भी बेहद शौक था। हालांकि, समय के साथ उनका झुकाव संगीत की तरफ ज्यादा बढ़ गया। कॉलेज के दिनों में उन्होंने बकायदा शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ग्रहण की। उनकी किस्मत ने तब करवट बदली जब साल 1952 में उन्हें ‘ऑल इंडिया रेडियो’ पर गाने का एक सुनहरा अवसर मिला। रेडियो पर उनकी आवाज को सुनकर फिल्म इंडस्ट्री के संगीतकार बेहद प्रभावित हुए और उन्हें फिल्मों के ऑफर मिलने शुरू हो गए। अपने सफर में उन्होंने मोहम्मद रफी, मन्ना डे और तलत महमूद जैसे महान गायकों के साथ कई सदाबहार युगल गीत गाए।
850 से अधिक हिंदी गानों का सफर
सुमन जी ने सिर्फ हिंदी और मराठी ही नहीं, बल्कि असमिया, कन्नड़, मैथिली, भोजपुरी, राजस्थानी, ओडिया और पंजाबी जैसी भाषाओं को भी अपनी आवाज से समृद्ध किया। एक आंकड़े के मुताबिक, उन्होंने अपने पूरे करियर में 850 से भी ज्यादा सुपरहिट हिंदी गाने गाए। उनके गाए कुछ बेहद प्रसिद्ध गानों में ‘जिंदगी इम्तेहान लेती है’, ‘बहना ने भाई की कलाई से’, ‘आजकल तेरे-मेरे प्यार के चर्चे’, ‘मेरा प्यार भी तू है’ और ‘ना-ना करते प्यार तुम्हीं से कर बैठे’ शामिल हैं। भले ही आज सुमन जी हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके ये सदाबहार नगमे हमेशा संगीत प्रेमियों के दिलों में जिंदा रहेंगे।










